वृक्षारोपण पर निबंध (Vriksharopan Essay In Hindi)

आज हम वृक्षारोपण पर निबंध (Essay On Vriksharopan In Hindi) लिखेंगे। वृक्षारोपण पर लिखा यह निबंध बच्चो (kids) और class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए लिखा गया है।

वृक्षारोपण पर लिखा हुआ यह निबंध (Essay On Tree Plantation In Hindi) आप अपने स्कूल या फिर कॉलेज प्रोजेक्ट के लिए इस्तेमाल कर सकते है। आपको हमारे इस वेबसाइट पर और भी कही विषयो पर हिंदी में निबंध मिलेंगे, जिन्हे आप पढ़ सकते है।


वृक्षारोपण पर निबंध (Vriksharopan Essay In Hindi)


प्रस्तावना

हमारे देश में नहीं अपितु पूरे विश्व में भी वनों का विशेष महत्व है। वन ही प्रकृति की महान शोभा के भंडार है। वनों के द्वारा प्रकृति का जो रूप खिलता है, वह मनुष्य को प्रेरित करता है।दूसरी बात यह है कि वन ही मनुष्य, पशु- पक्षी, जीव -जंतु आदि के आधार है। वन के द्वारा ही सब के स्वास्थ्य की रक्षा होती है।

वन इस प्रकार से हमारे जीवन की प्रमुख आवश्यकता है। अगर वन ना रहे तो हम नहीं रहेंगे और यदि वन रहेंगे तो हम रहेंगे। कहने का तात्पर्य यह है कि वन से हमारा अभिन्न संबंध है, जो निरंतर है और सबसे बड़ा है। इस प्रकार से हमें वनों की आवश्यकता सर्वोपरि होने के कारण हमें इसकी रक्षा की भी आवश्यकता सबसे बढ़कर है।

वृक्षारोपण की परिभाषा

वृक्ष वृक्ष+रोपण से बना है। वृक्षों को कहीं रोपना, पौधे को कहीं लगाने की जो क्रिया होती है उसे वृक्षारोपण कहते हैं।

मनुष्य जीवन ओर वृक्षारोपण

मानव का जीवन बिना ऑक्सीजन के जी नहीं सकता। यह ऑक्सीजन हमें शुद्ध और स्वच्छ हवा से ही प्राप्त होती है। ये शुद्ध हवा हमें वृक्ष द्वारा ही प्राप्त होती है। वृक्ष हमारे जीवन का आधार होते हैं। वृक्ष के बिना मानव जीवन का धरती पर कोई अस्तित्व ही नहीं हो सकता।

अगर हमें पर्यावरण को बचाना है, तो अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना होगा। जिस प्रकार व्यक्ति अपने बच्चे का पालन पोषण करता है। उसी प्रकार वृक्ष का भी करना चाहिए। एक बार आपका बच्चा आपके जीवन से अलग हो सकता है, परंतु एक वृक्ष जीवन भर आपका साथ निभाता है।

एक वृक्ष दस पुत्रों के समान होता है। इसलिए वृक्ष हमारे जीवन का एक आधार है जो केवल थोड़ा सा पानी और सूर्य की किरणे मांगते हैं। बदले में फल, सब्जी और पेड़ों की मीठी छाव हमें प्रदान करते हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है कि अपने पूरे जीवन में एक वृक्ष तो जरूर लगाएं।

वृक्ष हमारे साथी

वृक्ष ना केवल हमारे साथी मित्र हैं, बल्कि वो सच्चे साथी भी हैं। जो हमारे जीवन में हमें प्रत्येक क्षेत्र में काम आते है। ये केवल हमे फल, सब्जी आदी प्रदान नहीं करते, बल्कि जीवन की सभी मूलभूत आव्यकताओं की पूर्ति करतें है।

यहां तक कि खाने के साथ रहने के लिए घर भी इन्हीं की देन है। वृक्ष हमे स्वस्थ रखने का तो काम करते ही है। साथ ही ये हमें धूप के साथ छांव भी देते है। इनकी छांव में बैठकर लोग आराम ओर सुकून प्राप्त करते है।

वनोन्मूलन एवं इसके कारण

हमारी पृथ्वी पर कई प्रकार के पौधे पाए जाते है, जो हमारी पृथ्वी पर हम मनुष्य के लिए अति आवश्यक होते है। आज ये पृथ्वी पर बहुत बड़ा खतरा बन गया है। वनोन्मूलन का अर्थ वृक्ष को काटना कहलाता है ओर इनको नष्ट करके भूमि का उपयोग अन्य कार्य में करना।

जैसे कृषि के लिए भूमि प्राप्त करना, घरो एवं कारखानों का निर्माण करना, फर्निचर बनाने एवम लकड़ी का उपयोग ईंधन के रूप में करना। भीषण सूखा भी इसी के कारण ही है।

व्यक्ति अपनी सुख सुविधाओं के लिए बेधड़क पेड़ पोधो की कटाई करता है। जिनकी बजह से ही आज प्रदुषण अधिक बढ़ गया है ओर इसका भयंकर उदाहरण दिल्ली जैसे शहर में देखने को मिल रहा है। जहां विना मास्क के व्यक्ति रह नहीं सकता, तो सॉस कहा से लेगा।

उसके लिए स्वस्छ हवा चाहिए, इसके लिए पेड़ पौधे लगाने की जरूरत है। परन्तु पेड़ पोधो की जगह आज घरो ने ले लि है। जब पेड़ पौधो की जगह भी हम इंसान ही घेर लेंगे, तो भला स्वच्छ हवा के रूप में ऑक्सीजन कहा से पाएंगे। वक्त रहते मनुष्य को समझना होंगा नही तो उनका जीवन खतरे में पड़ सकता है। इसके लिए वृक्ष लगाना बहुत जरूरी है।

धरती का सौंदर्य वृक्षारोपण

हमारी पृथ्वी का सौंदर्य हरियाली है ओर ये हमारी पृथ्वी पर बरकरार रहे इसके लिए हमे अधिक से अधिक वृक्ष लगाने की जरूरत है। हमारे देश के कुछ क्षेत्र तो हरियाली की वजह से इतने खूबसूरत है, जिन्हें स्वर्ग की संज्ञा तक दे दी गयी है।

हरियाली किसे नहीँ अच्छी लगती, यह हरियाली की बजह से ही हर जगह पक्षियो की चहल-पहल सुनाई आती है। पक्षी इन वृक्ष पर अपना घर बनाके रहते है। हरियाली जिसे देखने पर हमारी आखो में सुकून प्राप्त होता है, वही अगर सभी जगह सूखा हो, पेड़ पौधे ना हो तो सोचिये कैसा लगेगा।

वृक्षारोपण की आवश्यकता

वृक्षारोपण की आवश्यकता हमारे देश में आदिकाल से ही रही है। बड़े-बड़े ऋषि मुनियों के आश्रम के वृक्ष- वन वृक्षारोपण के द्वारा ही तैयार किए गए हैं। महाकवि कालिदास ने ‘अभिज्ञान शाकुंतलम’ के अंतर्गत महर्षि कनव के शिष्यों के द्वारा वृक्षारोपण किए जाने का उल्लेख किया है।

शकुंतला की विदाई के समय वृक्षों के पत्तों के गिरने और उनमें नए-नए फूलों के आने का उल्लेख, महाकवि ने शकुंतला से संबंधित करते हुए महर्षि कनव के द्वारा वृक्षारोपण के महत्व की और संकेत किया है। इस प्रकार से हम देखते हैं कि वृक्षारोपण की आवश्यकता प्राचीन काल से ही समझी जाती रही है। आज भी इसकी आवश्यकता बनी हुई है।

अब प्रश्न है कि वृक्षारोपण की आवश्यकता क्यों होती है? इसके उत्तर में हम यह कह सकते हैं कि वृक्षारोपण की आवश्यकता इसलिए होती है, ताकि वृक्ष सुरक्षित रहे। उनके स्थान रिक्त न हो सके। क्योंकि अगर वृक्ष या वन नहीं रहेंगे तो हमारा जीवन शून्य होने लगेगा।

एक समय ऐसा आएगा कि हम जी भी नहीं पाएंगे। जीवन नष्ट होने का कारण यह हो जाएगा कि वनों के अभाव में प्रकृति का संतुलन बिगड़ जाएगा। प्रकृति का संतुलन जब बिगड़ जाएगा, तब संपूर्ण वातावरण इतना दूषित ओर अशुद्ध हो जाएगा कि हम ठीक से सांस नहीं ले सकेंगे और ना ही ठीक से अन्य जल ग्रहण कर पाएंगे।

वातावरण के दूषित और अशुद्ध होने से हमारा मानसिक, शारीरिक और आत्मिक विकास कुछ ना हो सकेगा और ना ही हम किसी प्रकार से जीवन जीने में समर्थ हो सकेंगे। इस प्रकार से वृक्षारोपण की आवश्यकता हमें संपूर्ण रूप से प्रभावित करती हुई हमारे जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।

वृक्षारोपण की आवश्यकता की पूर्ति होने से हमारे जीवन और प्रकृति का परस्पर क्रम बना रहता है। वृक्षारोपण की आवश्यकता की पूर्ति को आने जाने पर हमें वनों से जीवन की विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति हो जाती है। वनों के होने से हमें ईंधन के लिए प्राप्त रूप से लकड़ियां प्राप्त हो जाती है।

बांस की लकड़ी और घास से हमें कागज प्राप्त हो जाता है। जो हमारे कागज उद्योग का मुख्य आधार है। वनों की पत्तियां, घास, पौधे, झाड़ियां की अधिकता के कारण से भूमि का कटाव तीव्र गति से ना होकर मंद गति से होता है, या नहीं के बराबर होता है।

वनों के द्वारा वर्षा का संतुलन बना रहता है। इससे हमारी कृषि ठीक ढंग से होती है। वन ही बाढ़ के प्रकोप को रोकते हैं। वन ही बढ़ते हुए और उड़ते हुए रेत के कणों को कम करते  हुए भूमि का संतुलन बनाए रखते है।

बढ़ती हुई भीषण जनसंख्या के कारण वनों के विस्तार की आवश्यकता इसलिए है कि, इससे रोजगार और उत्पादन मात्रा में वृद्धि आ सके। यह सौभाग्य का विषय है कि सन 1952 में सरकार ने नई वन नीति की घोषणा करके वन महोत्सव की प्रेरणा दी है।

इससे वन रोपण के कार्य में तेजी आई है। इस प्रकार हमारा ध्यान अगर वन सुरक्षा की ओर लगा रहेगा तो हमें वनों से होने वाले लाभ, जैसे जड़ी बूटियों की प्राप्ति, पर्यटन की सुविधा, जंगली पशु पक्षियों का दर्शन, इनकी खाल, पंख या बाल से प्राप्त विभिन्न आकर्षक वस्तुओं का निर्माण आदि सब कुछ हमें प्राप्त होते है।

अगर प्रकृति देवी का स्वरूप वन संपदा नष्ट हो जाएगी, तो हमें प्रकृति के कोप से बचाना असंभव हो जाएगा।

हमारे देश में वृक्ष की पूजन

हमारे देश में जहां वृक्ष लगाए जाते है वही इनकी पूजा उपासना भी की जाती है। हमारे हिन्दू धर्म में कई ऐसे वृक्ष है, जिनकी हम पूजा करते है। जैसे बरगद, पीपल, निम ,आँवला आदि इन सभी की हम पूजा करते है साथ ही व्रत भी रखते है।

और इन वृक्षो की पूजा के बाद ही अपने व्रत को तोड़ते है। हमारे शास्त्रों के अनुसार ये सभी वृक्ष पूजनीय है। ये वृक्ष ना केवल पूजनीय है बल्कि यह ओषधियाँ से परिपूर्ण होते है। निम तो है ही सही एक ओषधि पूर्ण वृक्ष, वही पीपल ओर बरगद आदि भी कम नहीँ है।

इन वृक्ष के आसपास रहने से हमारा शरीर स्वस्थ रहता है ओर मन को शांति प्राप्त होती है। गीता में श्रीकृष्ण ने कहा है।

मुलतः ब्रह्मा रूपाय मध्यतो विष्णु रूपिन्ह:

अगर्त्त:शिव रूपाय अश्वव्याय नमो नमः

मतलव इनके मूल यानी जड़ में ब्रह्मा, मध्य में विष्णु ओर अग्रभाग में शिव का वास होता है। इसी कारण अश्वव्याय नामधारी वृक्ष को नमन किया जाता है। जब हमारे देश में वृक्ष की पूजा अर्चना की जाती है। वही कुछ स्वार्थी ओर लालची लोग वृक्ष को काटकर उन्हें बेच देते है, या जलाने के काम या अन्य दूसरे कामो में प्रयोग कर लेते है।

उन्हें ये समझना होंगा की अगर पेड़ नहीँ रहेंगे तो हम भी नहीं रहेंगे। इसके लिए हमे वृक्ष लगाना चाहिए ना की उन्हें काटकर स्वयं को नुकसान पहुचाना चाहिए।

वृक्षारोपण से होने वाले लाभ

वृक्षारोपण में लगाए पौधे जब एक वनों का रूप ले लेते है, तो यह हमारे कई महत्वपूर्ण तरीके से मद्दत करते है ओर लाभ पहुंचाते है। वनों से लाभ कुछ इस प्रकार है।

(1) वनों से ओषधियाँ प्राप्त होती है।

(2) वनों से जड़ी बूटियाँ मिलती है।

(3) वनों से मकान निर्माण की सामग्री मिलती है।

(4) वनो से गोंद प्राप्त होता है।

(5) जानवरो का चारा, जैसे घास आदि प्राप्त होता है।

(6) वृक्ष की बजह से ही अच्छी बरसात सम्भव है।

(7) रंग ओर कागज भी वनों से ही प्राप्त होते है।

(8) वनों से लकड़ी, फर्नीचर, दवाइया आदि प्राप्त होती है।

(9) वनों की बजह से ही कई उद्योग चलते है। जो रोजगार का साधन बनते है।

(10) वन दूषित वायु को ग्रहण करके हमे शुद्ध वायु देते है।

हम अधिकतर इन वनों पर ही निर्भर रहते है। जिस प्रकार वायु ओर जल जरूरी है।उसी प्रकार वृक्ष भी जरूरी है। वन है तो हम है ओर स्वस्थ है। इसलिए वृक्ष हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग ही है, जो हमे साफ वायु व स्वच्छ आक्सीजन प्रदान करता है।

वृक्ष काटने से नुकसान

आज मानव भौतिक प्रगति की ओर अधिक क्रियाशील हो रहा है। वह अपने स्वार्थ को पूरा करने के लिए वृक्ष की कटाई कर रहा है। अपने आप को एक प्रतियोगिता से जोड़ कर वो भी औधोगिक प्रतियोगिता में अपने आप को सबसे उप्पर देखना चाहता है।

इसलिये मानव वृक्षो की कटाई कर रहा है ओर इस हेतु वृक्ष किं कमी से वनों का क्षेत्रफल दिन पर दीन कम होता जा रहा है। एक अनुमान के अनुसार एक करोड़ हेक्टेयर इलाके के वन एक दिन में काटे जा रहे है ओर भारत में 10 लाख हेक्टयर इलाकों में बटे वनों को काटा जा रहा है।

वनों की कटाई की वजह से आजकल पक्षियों का पहले की तरह चहकना कम सा हो गया गया है। प्राकृतिक संतुलन बिगड़ गया है। ये सब इंसानो की बजह से ही हो रहा है। हम इंसानो को अक्ल से काम लेना चाहिए ओर इस बेकीमती खजानों को बचाने के लिए भरकस मेहनत करना चाहिए। ना खुद वृक्ष काटे ओर ना ही दुसरो को काटने दे।

उपसंहार

इस प्रकार हम देखते है की वृक्ष हमारे जीवन का अमूल्य अंग है। अगर ये हमारे जीवन में नही रहे तो हम खाने पीने ओर सांस लेने के काबिल भी नही रहेंगे। इसलिए वृक्ष लगाए ओर अपने जीवन को बीमारियों से घिरने से बचाये।

वृक्षारोपण करना है जरूरी काम।

स्वस्थ रहे ओर खुश रहे, इसकी छाँव में करे आराम।

वृक्ष है सोने का खजाना।

इनको बचाना हमारा महत्वपूर्ण काम।

वृक्षारोपण करिए ओर हमारे देश को हरा भरा ओर सुंदर बनाइये।


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तो यह था वृक्षारोपण पर निबंध, आशा करता हूं कि वृक्षारोपण पर हिंदी में लिखा निबंध (Hindi Essay On Vriksharopan) आपको पसंद आया होगा। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा है, तो इस लेख को सभी के साथ शेयर करे।

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