वन महोत्सव पर निबंध (Van Mahotsav Essay In Hindi)

आज हम वन महोत्सव पर निबंध (Essay On Van Mahotsav In Hindi) लिखेंगे। वन महोत्सव पर लिखा यह निबंध बच्चो (kids) और class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए लिखा गया है।

वन महोत्सव पर लिखा हुआ यह निबंध (Essay On Van Mahotsav In Hindi) आप अपने स्कूल या फिर कॉलेज प्रोजेक्ट के लिए इस्तेमाल कर सकते है। आपको हमारे इस वेबसाइट पर और भी कही विषयो पर हिंदी में निबंध मिलेंगे, जिन्हे आप पढ़ सकते है।


वन महोत्सव पर निबंध (Van Mahotsav Essay In Hindi)


प्रस्तावना

मनुष्य औद्योगीकरण और शहरीकरण इत्यादि के कारण पेड़ो की निरंतर कटाई कर रहा है। मनुष्य अपने आश्रय के लिए अपना आशियाना बना रहे है। उद्योगों के विकास और विद्यालय, शॉपिंग मॉल इत्यादि के निर्माण के लिए वनो की अंधाधुंध कटाई की जा रही है।

पेड़ो के अत्यधिक कटाई के कारण पर्यावरण का संतुलन बिगड़ रहा है। वन उन्मूलन एक बहुत बड़ी समस्या है। मनुष्य उन्नति की आड़ में वनो की लगातार कटाई कर रहा है, जिससे जीव जंतुओं को तकलीफो का सामना करना पड़ रहा है।

वृक्षों से मनुष्यो को औषधि, लकड़ी, फल, चन्दन और कई प्रकार के अनगिनत चीज़ें प्राप्त होती है। वनो को इस प्रकार काटने से प्राकृतिक आपदाओं को न्यौता मिल रहा है। वनो को काटने से पृथ्वी नष्ट हो रही है और अगर ऐसे ही चलता रहा तो एक दिन सब कुछ समाप्त भी हो जाएगा।

पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है और इसका एक और कारण है निरंतर प्रदूषण। वृक्ष वायु प्रदूषण को नियंत्रित कर सकते है। वृक्षों से हमे ऑक्सीजन प्राप्त होता है। अगर वृक्ष नहीं होंगे तो ऑक्सीजन नहीं होगा, तो हम सब प्राणियों का जीवित रहना मुश्किल हो जाएगा। अब भी समय है कि हम जागरूक हो जाए और वृक्षारोपण करे और वनो को संरक्षित करे।

वन महोत्सव क्या है?

पेड़ों के महत्व को समझते हुए वन महोत्सव को मनाया जाता है। वन महोत्सव की शुरुआत सन 1950 में हुयी थी। इसे जंगलों के संरक्षण और उसे बचाने के इरादे से किया गया था। वनों की कटाई के बुरे प्रभाव पृथ्वी पर पड़ रहे है। इसी के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए एक बड़ी पहल की गयी थी।

आज भी यह पहल जारी है। वन महोत्सव को प्रत्येक वर्ष जुलाई के पहले सप्ताह में मनाया जाता है। प्राचीन काल से ही गुप्त और मुगल वंशो ने पेड़ो को सुरक्षित करने के लिए पहल की थी। जैसे जैसे हमारा देश उन्नति कर रहा है, मनुष्य और अधिक स्वार्थी और लालची बन गया है।

वह यह भूल रहा है कि वह सिर्फ पर्यावरण को ही नहीं बल्कि खुद को भी नष्ट कर रहा है। सन 1947 से ही वनो को सुरक्षित रखने के प्रयत्न किये जा रहे है। वनो को अगर संरक्षित नहीं किया गया तो मानव जाति खतरे में पड़ जायेगी।

देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू, डॉ राजेंद्र प्रसाद और मौलाना अब्दुल कलाम ने मिलकर वन महोत्सव को जुलाई के पहले हफ्ते में मनाना आरम्भ किया था। तभी से वन महोत्सव मनाया जाता है। कुछ संस्थाएं मिलकर वृक्षारोपण करके लोगो में जागरूकता फैलाने की कोशिशे कर रही है।

वन महोत्सव के दिन सरकार द्वारा लाखो वृक्ष लगाए जाते है। इसके पीछे का सिर्फ एक ही उद्देश्य है अधिक से अधिक पेड़ हर रोज़ लगाना और लोगो में जागरूकता फैलाना कि वह भी अपने आस पास पेड़ लगाए। जहां हर एक पेड़ काटा गया वहां दस पौधे अवश्य लगाने होंगे। हम इस तरह से अपने प्राकृतिक सुंदरता को नष्ट नहीं कर सकते है।

वर्ष 1947 में इस महोत्सव को अनौपचारिक रूप से लागू किया गया था। उसके पश्चात सन 1950 में इसे कृषि मंत्री कन्हैया लाल मुंशी ने आधिकारिक तौर पर जारी किया। यह एक सकारात्मक और नेक कदम था। अगर यह पहल ना की गयी होती तो जितने वन आज इस धरती पर मौजूद है उतने भी नहीं होते।

वन महोत्सव की अहमियत

मनुष्य जितना वृक्षों की कटाई कर रहा है, उतने वह लगा नहीं रहा है। वन नहीं होंगे तो हमे कई अमूल्य सामग्री प्राप्त नहीं होगी और सबसे अहम बात है वर्षा नहीं होगी। अगर वर्षा नहीं होगी तो जल की समस्या होगी और सूखा पड़ेगा।

हर साल मनुष्य प्राकृतिक आपदाओं को बुलावा देता है। इसलिए सरकार वनो को बचाने के लिए यह मुहीम चला रही है और वन महोत्सव मना रही है। सभी लोगो को अधिक वृक्ष लगाने चाहिए और एक दूसरे को सचेत करने की ज़रूरत है।

पेड़ो की देखभाल है आवश्यक

वन महोत्सव के उस हफ्ते में लाखो पेड़ लगाए जाते है, मगर कुछ ही पेड़ बच पाते है। लोग पेड़ तो लगा लेते है परन्तु उनकी देखभाल नहीं करते है। पेड़ लगाने के संग उनकी देखभाल करना भी ज़रूरी होता है। बिना पानी और देखभाल के पौधे जीवित नहीं रहते है। हमे गंभीरता पूर्वक इस मुहीम के साथ शामिल होकर अपना कर्त्तव्य निभाना चाहिए।

वन महोत्सव की ज़रूरत क्यों है?

वन महोत्सव बेहद आवश्यक है। निरंतर पेड़ो की कटाई और कभी ना खत्म होने वाला प्रदूषण पृथ्वी के तापमान में वृद्धि कर रहा है। हिमालय में बर्फ पिघल रहे है। बर्फ पिघलने के कारण नदियों का जल स्तर बढ़ रहा है। इससे बाढ़ जैसी स्थिति प्रत्येक वर्ष हमारे देश के कई राज्यों को झेलनी पड़ रही है।

प्राकृतिक आपदाओं को मनुष्य के इन गतिविधियों ने बढ़ावा दिया है। इससे जान माल का काफी नुकसान होता है। इसलिए वन महोत्सव को मनाना ज़रूरी है ताकि लोग ज़्यादा से ज़्यादा पेड़ लगाए और उसकी देखभाल करे।

वनो का महत्व

वनो में अनगिनत वृक्ष होते है। वहां की हवा शुद्ध होती है। वन सिर्फ मानव के लिए ही नहीं बल्कि जीव जंतुओं के लिए भी महत्वपूर्ण है। वनो से हमे कई मूल्यवान सामग्री प्राप्त होती है। पेड़ो से हमे छाया, फल और फूल मिलते है। वनो से प्राकृतिक सुंदरता में चार चाँद लग जाते है।

प्रकृति की सुंदरता वनो से कई गुना अधिक बढ़ जाती है। वन प्राकृतिक संसाधन है। पेड़ पौधे वातावरण में मौजूद जहरीली गैसों को सोख लेते है। वनो से चन्दन की लकड़ियां मिलती है। वन भूमि कटाव को रोकता है, जिससे उपजाऊ मिटटी नष्ट नहीं होती है।

वनो से ऑक्सीजन प्राप्त होता है। अगर वन होंगे तो प्राकृतिक आपदाएं कम हो जायेगी। पेड़ो से चारो तरफ हरियाली छायी रहती है। इसे सुरक्षित रखना हर मानव का कर्त्तव्य है।

पृथ्वी पर दुष्प्रभाव

वनो और पेड़ो की अधिक कटाई के कारण गंभीर हालात उत्पन्न हो रहे है। आंधी और तूफ़ान के कारण सब कुछ नष्ट हो जाता है। आज गर्मियों की अवधि में वृद्धि हो रही है और सर्दी का समय बेहद कम हो गया है।

कुछ राज्यों में गर्मी 47 डिग्री से 50 डिग्री तक पहुँच गयी है। इतनी गर्मी में मनुष्य की मौत हो सकती है। वनो के लगातार कटने से वनो में रहने वाले पशु पक्षी पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।कई प्रजातियां समाप्त हो गयी है और कुछ विलुप्त होने के कगार पर खड़ी है।

प्रदूषण भी अपने चरम सीमा पर पहुँच गया है और इससे कई तरह की बीमारियां हो रही है। बढ़ते प्रदूषण के कारण सांस लेने में भी मुश्किल हो रही है। सड़को पर लगातार गाड़ियाँ वायु को प्रदूषित कर रही है। वनो के कटने से वृक्ष की कमी हो रही है। वृक्ष होंगे तो प्रदूषण भी कम होगा। जितनी तेज़ी से उद्योगों के विकास के लिए हम वन काट रहे है, उतनी तेज़ी से हम वृक्ष लगा नहीं रहे है।

वनो की कमी एक गंभीर समस्या

वन नीति के मुताबिक धरती के कुल क्षेत्रफल में तेंतीस प्रतिशत भाग में वन होने चाहिए। मगर हमारे देश में मात्र बीस प्रतिशत ही वन रह गए है। तेज़ी से बढ़ती हुयी जनसंख्या के कारण भी लोग वनो को काट रहे है, ताकि घर बना सके।

खुद के घर बनाने के लिए वह वनो में रहने वाले प्राणियों का घर भी छीन रहे है। 2017 में वनो में सिर्फ एक प्रतिशत की वृद्धि हुयी है। यह वृद्धि दर बिलकुल कम है। प्रदूषण को अवशोषित और नियंत्रित करने के लिए हमे वनो का संरक्षण करना होगा। बढ़ते हुए प्रदूषण को रोकने के लिए हमारे पास वन बहुत कम है।

देश के कुछ राज्य जिनमे वन मौजूद है

अभी भी भारत के कुछ राज्यों में वन है। उन राज्यों के नाम है मिजोराम, अंडमान निकोबार द्वीप समूह और उत्तरपूर्वी राज्यों के कुछ हिस्सों में वन पाए जाते है। देश के कुछ हिस्से ऐसे भी है जहां वन हुआ करते थे, मगर अभी वह मरुस्थल में परिवर्तित हो रहे है।

महाराष्ट्र और गुजरात में वनो को शहरीकरण के उद्देश्य से काटा जा चूका है। वनो को विकसित करने के लिए सख्त कदम उठाने की ज़रूरत है। वरना आने वाले दिनों में हम वनो के लिए तरसते रह जाएंगे।

वनो को काटने की वजह

जिस तरीके से आबादी बढ़ रही है, उनकी ज़रूरतें भी बढ़ रही है। उनके खाने और रहने की जगहों की मांगे भी बढ़ रही है। यह एक वजह है जिसके लिए वनो को काटा जा रहा है। कुछ ऐसे अवैध लकड़ी के उद्योग है जो सरकार की अनुमति लिए बिना वनो को काटते है।

उन लकड़ियों से फिर फर्नीचर बनाकर, लोगो को ज़्यादा दाम में बेचते है। वनो से कई प्रकार की जड़ी बूटियां मिलती है, जिससे औषधि बनाई जाती है। जिस तरह से प्रत्येक वर्ष आबादी बढ़ रही है, दवाईयों की मांग बढ़ रही है, जिसके लिए पेड़ो को काटा जा रहा है।

वनो के कटाव को रोकने के उपाय

जनसंख्या वृद्धि दर को रोकना अनिवार्य है। वनो को संरक्षित करने के लिए लोगो को जागरूक करना आवश्यक है। सरकार अपनी तरफ से वनो को संरक्षित करने का प्रयास कर रही है। हम सबको मिलकर वनो को सुरक्षित रखना होगा।

जो लोग अवैध रूप से वनो की कटाई कर रहे है, उन्हें सख्त सजा दी जानी चाहिए। हमे लकड़ियों से बने सामग्रियों का इस्तेमाल कम करना होगा, ताकि हम पेड़ो को कटने से बचा पाए।

निष्कर्ष

वनो को बचाना बेहद आवश्यक है। हमारा अस्तित्व वनो पर निर्भर करता है। वनो को काटने से पृथ्वी पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। कई जीव जंतुओं की प्रजातियां विलुप्त हो रही है। पृथ्वी और पर्यावरण पर भयानक असर पड़ रहा है। समय रहते हम सभी को सचेत हो जाना चाहिए अन्यथा हम सब कुछ खो बैठेंगे और प्रकृति अपना विकराल रूप धारण कर लेगी।

हमे सरकार का साथ देते हुए वन महोत्सव को मनना चाहिए और कम से कम 1 पेड़ लगाकर उसकी देखभाल करनी चाहिए। यह हमे हर साल करना चाहिए। जब इस देश का हर व्यक्ति साल में एक पेड़ लगाएगा तो सोचिये कितने पेड़ लग जायेंगे।


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तो यह था वन महोत्सव पर निबंध (Forest Festival Essay In Hindi), आशा करता हूं कि वन महोत्सव पर हिंदी में लिखा निबंध (Hindi Essay On Van Mahotsav) आपको पसंद आया होगा। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा है, तो इस लेख को सभी के साथ शेयर करे।

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