सर्जिकल स्ट्राइक पर निबंध (Surgical Strike Essay In Hindi)

आज हम सर्जिकल स्ट्राइक पर निबंध (Essay On Surgical Strike In Hindi) लिखेंगे। सर्जिकल स्ट्राइक पर लिखा यह निबंध बच्चो (kids) और class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए लिखा गया है।

सर्जिकल स्ट्राइक पर लिखा हुआ यह निबंध (Essay On Surgical Strike In Hindi) आप अपने स्कूल या फिर कॉलेज प्रोजेक्ट के लिए इस्तेमाल कर सकते है। आपको हमारे इस वेबसाइट पर और भी कही विषयो पर हिंदी में निबंध मिलेंगे, जिन्हे आप पढ़ सकते है।


सर्जिकल स्ट्राइक पर निबंध (Surgical Strike Essay In Hindi)


प्रस्तावना

सर्जिकल स्ट्राइक यानी सरप्राइज टारगेट पर अचानक होने वाला हमला या युद्ध। सर्जिकल स्ट्राइक में व्यक्ति को सम्भलने का मौका तक नहीं मिलता ओर ये हमले किये नहीं जाते, थोपे जाते है।

यह कथन सत्य है, क्युकी कोई भी इंसान युद्ध की त्रासदी नहीं झेलना चाहता। शांति का मान व्यक्ति को जन्मजात ही मिला है। लेकिन फिर भी युद्ध होते है। इसका एकमात्र कारण यही है की युद्ध होते रहे है। बुरे लोगो द्वारा युद्ध थोपे जाते है व् मध्य लोगो द्वारा उसका प्रतिकार करने के लिए युद्ध स्वीकार किये जाते है।

भारत देश सर्जिकल स्ट्राइक या युद्ध को नापसंद करता है।

सर्जिकल स्ट्राइक अपने राष्ट्र्र की सीमाओं को पार करने और कैंपों और हथियारों को नष्ट करने और आतंकवादियों को मारने का एक सुनियोजित हमला है। सर्जिकल स्ट्राइक में कोई भी ताकतवर निर्दोष लोगों और सार्वजनिक संपत्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता हैं।

सेना रक्षा मंत्रालय और सेना के अधिकारियों के उचित मार्गदर्शन और निर्देशों के साथ यह प्रदर्शन करती है। यह सर्जिकल स्ट्राइक भारतीय सेना ने 28 और 29 सितंबर 2016 को पाकिस्तान के खिलाफ की थी। भारत देश सदैव ही अध्यात्मवादी और शांतिप्रिय राष्ट्र रहा है।

सर्जिकल स्ट्राइक क्या है?

सर्जिकल स्ट्राइक उसे कहते है जिसमे एक ऐसी सैन्य कार्रवाई होती है, जिसमे एक या अधिक सैन्य या आतंकी लक्ष्यों को नुक्सान पहुचाया जाता है। ये कार्रवाई गुपचुप तरिके से होती है। आमतोर पर इस सेना के दो अंग होते है, जो की थलसेना और वायुसेना के तालमेल या एक अंग के जरिये होती है।

इसमें कोशिश की जाती है की इस हमले में उस टारगेट को बर्बाद कर दिया जाए, जिसके लिए ये आपरेशन किया गया है। सर्जिकल स्ट्राइक में ये भी ध्यान में रखा जाता है की इससे गैर सैनिक या गैर आतंकी ठिकानो और आम नागरिको को कोई नुक्सान नहीं पहुंचे।

ये विशेष प्रकार का हमला होता है। इस हमले में बनाई रणनीति बहुत ही समझबूझ ओर विशेष ध्यान रखकर बनाई जाती है। इसमें समय, स्थान, कमांडोज की सँख्या का विशेष तौर पर ख्याल रखा जाता है। इस अभियान की जानकारी बेहद गोपनीय रखी जाती है। जिसकी जानकारी सिर्फ चुनिंदा लोगो को ही होती है।

सर्जिकल स्ट्राइक किस तरह की जाती है?

सर्जिकल स्ट्राइक किस प्रकार की जाती है और उसकी प्लानिंग किस प्रकार की जाती है वो इस प्रकार है।

जिस जगह पर हमला होने वाला होता है, उसकी पूरी जानकारी जुटाई जाती है और उसी के हिसाब से आगे की प्लानिंग की जाती है। सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम देने के लिए कमांडो दस्ता तैयार किया जाता है। बहुत ही गोपनीय तरिके से हेलीकाप्टर से कमांडो दस्ते को टारगेट तक पहुंचाया जाता है।

फिर होता है, दुश्मन पर चारों तरफ से हमला। दुश्मन को सँभलने का मौका दिए बगैर उसे वही घेर कर ढेर कर दिया जाता है। हमले को अंजाम देने के बाद कमांडो जिस तेजी से गए थे उसी तेज रफ़्तार में वापस भी लौट आते है।

सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान इस बात का खास ध्यान रखा जाता कि आसपास रहने वाले लोगो को उनकी इमारतों, घरों, गाड़ियों, जानवरो आदि को कोई नुकसान ना पहुंचे। निडर ओर बेखोफ होकर बहादुरी के साथ अपने काम को अंजाम देने का खास ध्यान रखा जाता है। सर्जिकल स्ट्राइक अचानक होने वाला हमला है।

कब – कब हुई सर्जिकल स्ट्राइक

हमारे देश भारत मे 9 बार भारतीय सेना ने एलओसी के पार जाकर सर्जिकल स्ट्राइक के ऑपरेशन को अंजाम दिया है और पाकिस्तानी सेना को सबक सिखाया है।

1 मई 1998 में सर्जिकल स्ट्राइक

1998 में पाकिस्तान ने खुद भारतीय सेना के इस ऑपरेशन की सयुंक्त राष्ट्र से शिकायत की और ये शिकायत संयुक्त राष्ट्र्र की वार्षिक बुक में 1998 के 321 के पेज में दर्ज है। इस बुक के मुताबिक पाकिस्तान ने 4 मई को शिकायत में कहा कि पीओके में एलओसी के 600 मीटर पार बन्दाला सेरी में 22 लोगो को मार डाला गया।

पाकिस्तान गांव में मौजूद कुछ चश्मदीद के हवाले से ये भी बताया गया की करीब एक दर्जन शख्स, काले कपड़ो में आधी रात को आये, उन्होंने कुछ पर्चे भी छोड़े जिस पर एक मे बदला बिग्रेड वही दूसरे पर्चे पर लिखा था बुरे काम का बुरा नतीजा।

इस प्रकार कई पर्चे पाकिस्तान ने छोड़े जिस पर कुछ ना कुछ गलत बात ही लिखी थी। पाकिस्तान की ओर से जब इस हमले के लिए भारत सरकार पर उंगली उठाई गई, तो नई दिल्ली की ओर से जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया गया।

हालांकि उस समय अमेरिका के कुछ अधिकारियों की तरफ से माना गया था कि ये कारवाई पठानकोट ओर धाकिकोट के गांवों में 26 भारतीय नागरिकों की हत्या के बदले में की गयी थी।

1999 ग्रीष्मकाल में सर्जिकल स्ट्राइक

1999 की गर्मियों में करगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना की टुकड़ी ने जम्मू के पास मुनावर टीवी नदी से एलओसी को क्रॉस किया था। जिस वजह से ही इस ऑपरेशन में पाकिस्तान की एक पूरी चौकी को उड़ा दिया गया था ।

उसके बाद ही पाकिस्तान में BAT का गठन किया गया था। इसमे पाकिस्तान ने SAG के कमांडो को शामिल किया था। एक भरतीय सैनिक का सिर कलम कर देने की वजह BAT को ही माना गया।

जनवरी 2000 में सर्जिकल स्ट्राइक

करगिल के युद्ध के 6 महीने बाद ही जनवरी 2000 में 21-22 को नीलम नदी के पार, नडाला एनक्लेव में एक पोस्ट पर रेड के दौरान 7 पाकिस्तान सेनिको को कथित तौर पर पकड़े जाने का दावा किया जाता है।

पाकिस्तान के मुताबिक ये सातों सैनिक भारतीय सैनिकों की गोलीबारी में घायल हुए थे। बाद में इन सेनिको के शवों को पाकिस्तान को वापस कर दिया गया था। भारतीयों सेना के सूत्रों के अनुसार भारतीय सेना की ओर से कैप्टन सौरभ कालिया ओर 4 जाट रेजिमेंट के जवानोँ भवँर लाल बागरिया, अर्जुन राम, भीखा राम, मुला राम ओर नरेश सिंह की शहादत के बाद सर्जिकल स्ट्राइक की गई थी।

मार्च 2000 में सर्जिकल स्ट्राइक

भारत द्वारा पाक पर की गई इस सर्जिकल स्ट्राईक का युद्ध कारगिल युद्ध के बाद LOC पर तैनात 12 बिहार बटालियन के कैप्टन गुरजिंदर सिंह, इन्फेंट्री बटालियन कमांडो की टीम के साथ पाकिस्तान की चौकी पर किया गया था। ये पाकिस्तानी सेना के पूर्व में किये गए हमले की जबाबी कारवाई थी।

सितम्बर 2003 में सर्जिकल स्ट्राईक

2003 में एलओसी पर दोनों देशो में सीजफायर लागू होने के बाद से दूसरे की जमीन पर जाकर होने वाले ऑपरेशन की कम ही जानकारी उपलब्ध है। लेकिन पाकिस्तान की ओर से एलओसी पर निगरानी वाले संयुक्त राष्ट्र्र प्रेषक दल को दर्ज शिकायत से पता चलता है कि, क्रॉस बॉडर ऑपरेशन बदस्तूर जारी रहे।

पाकिस्तान ने एक शिकायत में दावा किया कि भारतीय सैनिकों ने 18 सितम्बर 2003 को पूंछ के भिम्बर गली के पास बरोह सेक्टर में एक पोस्ट पर हमला किया। इस घटना में पाकिस्तानी जेसीओ समेत 4 जवान मारे गए।

जून 2008 में सर्जिकल स्ट्राईक

2008 में दो बार घटना घटी थी। ये वो साल था जब एलओसी पर टकराव की घटनाएं बढ़ने लगी थी। पाकिस्तान की शिकायत के रिकार्ड के मुताबिक पुंछ के भट्ठल सेक्टर में 19 जून 2008 को भारतीय सैनिको की कार्रवाई में चार पाकिस्तान के जवान मारे गए थे।

इससे पहले 5 जून 2008 को पूँछ जे सल्होत्री गांव में क्रांति बॉर्डर पर हमला हुआ था। जिसमे 2-8 गुरखा रेजिमेंट के जवान जावैश्वर शहीद हुआ था।

अगस्त 2011 में सर्जीकल स्ट्राईक

30 अगस्त सन 2011 को पाकिस्तान ने शिकायत दर्ज कराई कि उसके एक जेसीओ समेत चार जवान केल में नीलम नदी घाटी के पास भारतीय सेना की कार्रवाई में मारे गए। अखबार ‘द हिंदू’ ने इस घटना पर सूत्रों के हवाले से बताया था कि ये ऑपरेशन कारनाह मे भारतीय जवानों पर हमले में दो भारतीय सैनिकों की हत्या और उनके शवों को क्षतविक्षत किए जाने के बदले में किया गया था.

जनवरी 2013 में सर्जीकल स्ट्राईक

6 जनवरी 2013 की रात को क्रॉस बॉडर फायरिंग के बाद 19 इम्फेंट्री डिवीजन कमांडर गुलाब सिंह रावत ने पाकिस्तानी पोस्ट पर हमला किया। पाकिस्तान से कहा गया कि सावन पात्रा में स्थित उसकी पोस्ट पर भारतीय सेनिको ने हमला किया है।

लेकिन भारत ने उस वक्त इस बात का खंडन किया था। भारत के तत्कालीन प्रवक्ता जगदीश दहिया ने कहा कि हमारे किसी भी सैनिक ने एलओसी को पार नही किया है। लेकिन तनाव की गर्मी की वजह से ऐसा चलता रहता है और ये 1990 में जम्मू कश्मीर की लड़ाई शुरू होने के बाद से ही चल रहा है।

सर्जिकल स्ट्राइक किस प्रकार से की जाती है?

सर्जिकल स्ट्राइक में तीनों ही सैनिक दलों का बहुत कड़ाई के साथ ओर सतर्क रहकर प्रयोग किया जाता है। और इसका प्रयोग हवाई हमले के माध्यम से अथवा शत्रु क्षेत्र में विशेष सैनिक दस्ते को हवाई जहाज से उतारकर अथवा जमीन के रास्ते से ही सैनिक टुकड़ी को भेजकर हमले किये जाते है।

भारत के तीनों ही सैनिक दलों के पास अपने विशेष सैनिक दस्ते सर्जिकल स्ट्राइक के लिए तैयार रखे जाते है। ताकि समय आने पर तुरंत इस पर कार्य शुरू हो सके।

सर्जिकल स्ट्राइक में कोन- कोन से कमांडो होते है?

सर्जिकल स्ट्राइक में ऑपरेशन कमांड से सी4 आई एस आर (C4ISR) की आवश्यकता विशेष रूप से होती है। जिसका अर्थ है कमांड कंट्रोल कम्युनिकेशन कम्प्यूटर इंटेलिजेंस सर्विलाइन्स तथा रेकांसेन्स।

भारतीय सेना की पैराशूट रेजिमेंट के पास अत्यधिक प्रशिक्षित पैरा कमांडो का दल है, जिनको विशेष तौर पर ऐसे ही लक्ष्यों अथवा मिशन को अंजाम देने के लिए तैयार किया जाता है।उसी तरह भारतीय जलसेना के पास मार्कोस तथा वायुसेना के पास गरुढ़ नाम की सैनिक टुकड़ियों है। जो सर्जिकल स्ट्राइक जैसी स्तिथियों के लिए हमेशा तैयार रहती है।

सर्जिकल स्ट्राइक के लिए लड़ाकू विमानों की मदद से बम गिराकर भी शत्रु सेना का बहुत अधिक नुकसान किया जा सकता है। ओर इसका उपयोग अधिकतर घनी आबादी वाले क्षेत्रों में किया जाता है। जहाँ पर भूमि से जाने पर सेना के दस्ते को अधिक खतरा होता है, वहाँ जहाज से बम गिराना अधिक कारगर साबित होता है।

उपसंहार

हमारा देश भारत किसी भी प्रकार के युद्ध या आतंकवाद को पसंद नहीं करता ओर ना ही अपने ओर से कोई युद्ध शुरू करता है। परंतु ये भी सत्य है कि जब- जब हमारे देश भारत मे किसी ने भी कोई हमला किया, तो हमारे भारत के सैनिको ने सर्जीकल स्ट्राईक करके उन देशों को जबाव जरूर दिया है।


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तो यह था सर्जिकल स्ट्राइक पर निबंध (Surgical Strike Essay In Hindi), आशा करता हूं कि सर्जिकल स्ट्राइक पर हिंदी में लिखा निबंध (Hindi Essay On Surgical Strike) आपको पसंद आया होगा। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा है, तो इस लेख को सभी के साथ शेयर करे।

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