ग्रीष्म ऋतु पर निबंध (Summer Season Essay In Hindi)

आज के इस लेख में हम ग्रीष्म ऋतु पर निबंध (Essay On Summer Season In Hindi) लिखेंगे। ग्रीष्म ऋतु पर लिखा यह निबंध बच्चो (kids) और class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए लिखा गया है।

ग्रीष्म ऋतु पर लिखा हुआ यह निबंध (Essay On Summer Season In Hindi) आप अपने स्कूल या फिर कॉलेज प्रोजेक्ट के लिए इस्तेमाल कर सकते है। आपको हमारे इस वेबसाइट पर और भी कही विषयो पर हिंदी में निबंध मिलेंगे, जिन्हे आप पढ़ सकते है।


ग्रीष्म ऋतु पर निबंध (Summer Season Essay In Hindi)


प्रस्तावना

प्रकृति की लीलाये निराली है और इसकी एक तरह से कलाकृति कहे या सदृश्य जिसे देखना ही बनता है। इस प्रकृति की रचना का शिल्पकार ईश्वर है ओर हमारे देश मे तो प्रकृति पग-पग में अपनी ईश्वरीय रूपी धरती की मनमोहक छवि के दर्शन कराती है।

हमारे देश मे भगवान का आशीर्वाद है, क्योकि कि हमे हर तरह के ऋतुयें देखने को मिल जाते है। ये सौभाग्य बस हमे ही प्राप्त है, जबकि कहि ओर ये सब देखने को भी नहीं मिलता है।हमारे यहाँ छः ऋतुएं बारी-बारी से आकर, पृथ्वी को अपने अनुसार साज श्रृंगार कराती है। मनुष्य को ये एक अमूल्य उपहार है, इसलिए मनुष्य और प्रकृति एक दूसरे के अभाव में सौंदर्य-हीन है।

हमारे देश भारत में छः ऋतुएं होते है, जिनमे बसन्त ऋतु (spring Season), ग्रीष्म ऋतु (Summer Season), वर्षा ऋतु (Rainy Season), शरद ऋतु (Autumn Season), हेमन्त ऋतु (pre winter Season), शीत ऋतु (winter season) शामिल है।

ग्रीष्म ऋतु का कारण

हमारे देश भारत में ग्रीष्म ऋतु सामान्यतः 15 मार्च से 15 जून तक रहता है। इस समय का समय सूर्य भूमध्य रेखा से कर्क रेखा की ओर बढ़ता है। जिससे सम्पूर्ण देश में तापमान में वृद्धि होने लगती है। इस समय कर्क रेखा की ओर अग्रसर होने के साथ ही तापमान का अधिकतम बिंदु भी क्रमशः दक्षिण से उत्तर की ओर बढ़ता जाता है ओर मई के अंत में देश के उत्तरी -पश्चमी भाग में यह 48 सेंटीग्रेड होता है।

ग्रीष्म ऋतु

भारतवर्ष पर प्रकृति की विशेष कृपा है। विश्व में यही एक देश है, जहां वर्ष में छः ऋतुओ का आगमन नियमित रूप से होता है। सभी ऋतुओ में प्रकृति की निराली छटा होती है ओर जीवन के लिए प्रत्येक ऋतु का अपना महत्व होता है।

काल-कर्म से वसंत ऋतु के बाद ग्रीष्म ऋतु आता है। भारतीय गणना के अनुसार जयेष्ठ-अषाढ़ के महीनों में ग्रीष्म ऋतु होता है। इस ऋतु के प्रारम्भ होते ही बसन्त की कोमलता ओर मादकता समाप्त हो जाती है ओर मौसम गर्म होने लगता है। धीरे-धीरे गर्मी इतनी बढ़ जाती है की प्रातः आठ बजे के बाद ही घर से बहार निकलना कठिन हो जाता है।

शरीर पसीने से नहाने लगता है। प्यास से गला सूखता रहता है। सड़को पर कोलतार पिघल जाता है। सुबह से ही लू चलने लगती है। कभी-कभी तो रात को भी लू चलती है। गर्मी की दोपहर में सारी सृष्टि तड़प उठती है। छाया भी ढूंढती है।

कवि बिहारी के शब्दो में…

बैठी रही अति सघन बन, पैठी सदन तन माँह,

देखी दुपहरी जेठ की, छाहो चाहती छाँह।

एक ओर दोहे में कवि बिहारी कहते है की ग्रीष्म की दोपहरी में गर्मी से व्याकुल प्राणी वैर-विरोध की भावना को भूल जाते है। परस्पर विरोध भाव वाले जन्तु एक साथ पड़े रहते है। उन्हें देखकर ऐसा प्रतीत होता है, मानो यह संसार कोई तपोवन में रहने वाले प्राणियों में किसी के प्रति दुर्भावना नहीं होती।

बिहारी का दोहा इस प्रकार है….

कहलाने एकत वसत, अहि मयूर मर्ग -बाघ।

जगत तपोवन सो कियो, दीरघ दाघ निदाघ।

गर्मी में दिन लम्बे ओर रातें छोटी होती है। दोपहर का भोजन करने पर सोने व आराम करने की तबियत होती है। पक्की सड़को का तारकोल पिघल जाता है। सड़के तवे के समान तप जाती है।

बरसा रहा है, रवि अनल भूतल तवा-सा जल रहा।

है चल रहा सन-सन पवन, तन से पसीना ढल रहा।।

रेतीले प्रदेशो जैसे राजस्थान व हरियाणा में रेत उड़-उड़कर आँखों में पड़ती है। जब तेज आंधी आती है तो सर्वनाश का दर्शय उपस्थित हो जाता है। धनी लोग इस भयंकर गर्मी के प्रकोप से बचने के लिए पहाड़ो पर जाते है। कुछ लोग घरो में पंखे ओर कूलर लगा कर गर्मी को दूर भगाते है।

भारत एक गरीब देश है। भारत की दो तिहाई से अधिक जनसंख्या गांवो में रहती है। बहुत से गांवो में बिजली ही नहीं है। कड़कती धूप में किसानों को ओर शहरों में मजदूरों को काम पड़ता है। काम न करेंगे, तो भूखों मरने की नोबत आ जाती है।

गर्मी दुखदाई होती है, परंतु फसलें सूर्य की गर्मी से ही पकती है। खरबूजे, आम, लीची, बेल, अनार, तरबूज आदि का आनंद भी हम गर्मी के मौसम में ही लेते हैं। फालसे, ककड़ी और खीरे गर्मी में ही खाते है ओर अपनी गर्मी को भगाने की कोशिश करते हैं।

लस्सी ओर शरबत गर्मी के समय तो अमृत समान है। दोपहर को गली में तो बच्चे भी कुल्फी ओर आइसक्रीम वाले को घेर लेते हैं। मई व जून की जानलेवा गर्मी के कारण स्कूल बंद हो जाते हैं। गर्मी में लू लगने का डर रहता है, इसलिए लोग घरो में ही रहते है।

गर्मी में लोग आकाश को देखते है और सोचते हैं कि कब बादल आए और छम – छम पानी बरसा जाए। गर्मी के बाद ऋतुओ की रानी वर्षा ऋतु का आगमन होता है। वर्षा के आने का कारण ग्रीष्म ऋतु ही होता है। क्योंकि गर्मी में नदियां, समुद्रों आदि का पानी सूखकर भांप के रूप में आकाश में जाता है और वही बादल बन कर बादलों से छम – छम बारिश करता है।

ग्रीष्म ऋतु हमें कष्ट सहने की शक्ति देता है। इससे हमें यह प्रेरणा मिलती है कि मनुष्यो को कष्टो ओर कठिनाइयों से घबराना नही चाहिए। बल्कि उन पर विजय प्राप्त करना चाहिए और स्मरण रखना चाहिए कि जिस प्रकार प्रचण्ड गर्मी के बाद मधुर वर्षा का आगमन होता है, उसी प्रकार जीवन में कष्टों के बाद सुख का समय अवश्य आता है।

विज्ञान की कृपा से नगरवासी गर्मी के भयंकर कोप से बचने में अब लगभग सफल हो गए हैं। बिजली के पंखे, कूलर, एयर कंडीशन, ( वातानुकूलित साधन) आदि से गर्मी के कष्ट को दूर भगाना संभव हो गया है। शीतल-पेय तथा आइसक्रीम आदि का मजा ग्रीष्म में ही आता है।

ग्रीष्म में हमारे बहुत से अनाज, फल, मेवे आदि पकते है। सैकड़ों प्रकार के फूल खिलते हैं। बागों में आमो पर फल लगते हैं, कोयले बोलने लगती है। ग्रीष्म में दोपहर के समय सोने का बहुत मजा आता है। नहाने और तैरने का आनन्द भी ग्रीष्म में ही हैं।

ग्रीष्म ऋतु से बचाव के उपाय

गर्मी के मौसम में हमे स्वस्थ रहने के लिए बहुत सी सावधानियां बरतनी चाहिए, जो निम्नलिखित है।

(1) गर्मी के मौसम से बचने के लिए सबसे पहले तो अपने शरीर को भरपूर मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। इसलिए पानी आदिक से अधिक पिये, नहीं तो डिहाइड्रेशन की समस्या उत्पन्न हो जाती है। इसलिए पानी का सेवन अधिक करे।

(2) गर्मी के मौसम में ऐसे वस्त्र का चुनाव करे, जो हमारे शरीर को गर्मी से बचाये। इसके लिए सूती के आरामदायक वस्त्रो को पहने ओर गर्मी के मौसम के अनुसार ही वस्त्रो का कलर का भी सही प्रयोग करे।

(3) हमे गर्मी से बचने के लिए ठंडे पदार्थो का सेवन करना चाहिए।

(4) हमे हमारी गर्मी को दूर करने के लिए अगर हम गर्म शहरों में रहते है, तो ठंडे ओर पहाड़ी क्षेत्रो में जाना चाहिए।

(5) हमे लू से बचने के लिए भी बहुत सारा पानी पीना चाहिए।

(6) धूप की हानिकारक पराबैगनी किरणों से बचाव के लिए घर से निकलना ही नहीं चाहिए ओर यदि निकलना भी पड़े तो सुबह को ही निकले या शाम को ही निकले। गर्मी से बचने के लिए स्कार्फ, सनग्लास, पानी की बोतल ओर सनस्क्रीन लगा कर निकले।

(7) हमे हमारे बचाव के साथ ही बेजुबान पक्षीओ के लिए पानी ओर दाना रखना चाहिए। ताकि वो अपनी भूख ओर प्यास के लिए इधर-उधर ना भटके ओर एक ही जगह उन्हें सब मिल जाए।

(8) साथ ही बड़े पालतू जानवरों जैसे गाय, कुत्ता, घोड़े आदि का भी ध्यान रखे, इनको खाने के लिए इनका खाना ओर पीने के लिए भरपूर पानी देना ना भूले।

(9) हमे उन लोगो को भी हमेशा पानी का पूछना चाहिए, जो हमारे लिए काम करते है। कड़क दुपहरी में जैसे ऑनलाइल काम करने वाले कर्मचारी, डाकिये आदि।

(10) गर्मी से बचने वाले संसाधनों का प्रयोग करना चाहिए, जैसे कूलर, एयरकंडीशन, पंखे आदि। साथ ही में बिजली का प्रयोग कम ही करने की कोशिश करनी चाहिए।

(11) हमें पानी ओर बिजली की बर्बादी से बचाव करना चाहिए।

(12) अगर हमे गर्मी से बचना है, तो हमे हमारे आसपास का वातावरण हरा भरा रखना होंगा। इसके लिए हमे अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाना चाहिए, बृक्षारोपण करना चाहिए।

ग्रीष्म ऋतु ओर बच्चे

ग्रीष्म ऋतु बड़ो के लिए भले ही बहुत सी परेशानी ओर तकलीफ लेकर आते है। परन्तु इसी मौसम को बच्चे बहुत मस्ती से मनोरंजन करके लाभ उठाते है। सबसे पहली खुशी तो उनके लिए गर्मी की छुटी होती है। जो स्कूल द्वारा उन्हें प्रदान की जाती है।

इस मौसम में हम जहाँ दोपहरी में पानी के पास लू से बचाव के लिए नही जाते, वही बच्चे एक नही कई बार जाके नहाते है ओर पानी में मस्ती करते है। इस समय बच्चों की अधिक प्रिय आइसक्रीम ओर कुल्फी खाने को मिलती है।

अधिकतर बच्चे तो छुटियो का आनन्द उठाने के लिए ठंडे इलाको में अपने परिवार के साथ चले जाते है। जो बच्चे फल नही खाते, वो गर्मी के मौसमी फलो को खाना पसंद करते है। गांवो में तो बच्चे तलावो, झीलों आदि में तैरने का भी मज़ा लेते है।

आमों के वृक्षों से आप तोड़ना, पेड़ो पर झूलना जैसे मस्ती भरे कार्य करते है। हम बड़ो को जहां ये गर्मी चुभती है, वही बच्चों के लिए ये मौसम मस्ती ओर छुटी मनाने का हो जाता है।

उपसंहार

वृक्षारोपण द्वारा गलियों, बाजारों, सड़कों, राजमार्गों पर शीतल छाया की व्यवस्था की जा सकती है। इसके लिए वृक्षारोपण स्थान- स्थान पर करना चाहिये। स्थान-स्थान पर शीतल जल के प्याऊ लगाकर तथा पशुओं के लिए खेल (जलकुंड) बनवाकर ग्रीष्म की प्यास बुझाने की व्यवस्था की जा सकती है।

हमें ग्रीष्म के कोप से बचाव के लिए पहले से ही व्यवस्था कर लेनी चाहिए, ताकि गर्मी से बचाव हो सके। क्योंकि कोई भी मौसम हमे कुछ देकर ही जाता है। इसलिए हमें तो प्रकृति का धन्यवाद करना चाहिए, जिसने हमें मौसम के रूप में सभी तरह के मौसम को देखने का अवसर दिया है। जबकि कहि कहि तो ये सब नसीब भी नहीं होता है ओर उन्ही परिस्थितियों में रहना पड़ता है, जिसे प्रकृति ने उन्हें दिया है।


इन्हे भी पढ़े :-

तो यह था ग्रीष्म ऋतु पर निबंध, आशा करता हूं कि ग्रीष्म ऋतु पर हिंदी में लिखा निबंध (Hindi Essay On Summer Season) आपको पसंद आया होगा। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा है, तो इस लेख को सभी के साथ शेयर करे।

Sharing is caring!

Leave a Comment