सरदार वल्लभभाई पटेल पर निबंध (Sardar Vallabhbhai Patel Essay In Hindi)

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सरदार वल्लभभाई पटेल पर निबंध (Sardar Vallabhbhai Patel Essay In Hindi)


प्रस्तावना

देश में अगर राजनीतिक क्षेत्रों में बात की जाती है तो बहुत से प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति ने देश में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हमारे देश में इसी तरह सरदार वल्लभभाई पटेल भी थे जो एक भारतीय पॉलीटिशियन थे।

सरदार वल्लभभाई पटेल उप प्रधानमंत्री के रूप में कार्य करते थे। इन्होंने एक भारतीय अभिव्यक्ति और राजनेता के रूप में बहुत बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरदार वल्लभभाई पटेल पॉलिटिशन पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे और भारतीय गणराज्य के संस्थापक भी थे।

इन्होंने स्वतंत्रता के लिए बहुत संघर्ष किया और स्वतंत्र राष्ट्र बनाने के लिए मार्गदर्शन भी दिया। इन्हें भारत और अन्य जगहों पर सरदार के नाम से जाना जाता है। सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म गुजरात शहर में हुआ था ।

वह पटेल जाति समुदाय से संबंध रखते थे। इनके पिता का नाम झेवर भाई पटेल और माता का नाम लाडवा देवी था। यह अपने माता-पिता के चौथी संतान थे। इनसे बड़े तीन भाई थे जिनका नाम सोमाभाई, नरसी भाई, विट्ठल भाई था।

सरदार वल्लभभाई पटेल जी ने अपनी पढ़ाई लंदन से की थी और बैरिस्टर बाबू बने। बाद में यह अहमदाबाद में वकालत की पढ़ाई करने लगे। इन्होंने महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित होकर आंदोलन में भाग लेना शुरू कर दिया।

गुजरात में खेड़ा आंदोलन

स्वतंत्रता आंदोलन में अपना सबसे बड़ा योगदान पटेल जी ने 1918 में खेड़ा आंदोलन मे संघर्ष करके दीया। यह आंदोलन सरदार वल्लभभाई पटेल का सबसे बड़ा और पहला आंदोलन था।

गुजरात में खेड़ा उन दिनों बहुत भयानक सूखे के कारण परेशानी में था। जब किसानों ने अंग्रेज़ सरकार से कर की छूट की मांग की तो अंग्रेज सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया।इसलिए सरदार वल्लभभाई पटेल ने और गांधी जी ने और अन्य लोगों ने किसानों के नेतृत्व में उन्हें प्रेरित करने के लिए यह आंदोलन किया।

इस आंदोलन से अंग्रेजी सरकार को झुकना पड़ा और उस साल के लगान की छूट दी यह सरदार वल्लभभाई पटेल की पहली सफलता थी।

सत्याग्रह आंदोलन

भारत संविधान संग्राम के दौरान 1928 में गुजरात में हुआ सत्याग्रह आंदोलन एक प्रमुख किसान आंदोलन था। इस किसान आंदोलन का नेतृत्व सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा किया गया था।

इस आंदोलन के करने का कारण सरकार द्वारा किसानों के लगान को 30% तक बनाना था। वल्लभभाई पटेल जी ने इस लगान में वृद्धि को लेकर जमकर विरोध किया। सत्याग्रह आंदोलन को कुचलने के लिए सरकार ने बहुत ही कठिन निर्णय लिए।

फिर भी सरकार को किसानों की बात माननी पड़ी। जब यह मामला सामने आया तब इसमें 22% लगान की बढ़ोतरी को गलत बताया गया और बाद में इसे 6% तक कर दिया गया।

सरदार की उपाधि

सत्याग्रह आंदोलन मैं महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल को महिलाओं द्वारा सरदार की उपाधि दी गई। ऐसा इसलिए क्योंकि इस आंदोलन में सरदार वल्लभभाई पटेल ने सफलता प्राप्त की और किसानों के लगान को कम करवाया।

किसान संघर्ष और सत्याग्रह आंदोलन के संदर्भ में और बारदोली किसान संघर्ष के संदर्भ में गांधी जी ने कहा कि इस तरह का संघर्ष हमें स्वराज के पास पहुंचा रहा है। हम स्वराज्य को पाने के लिए ज्यादा दूर नहीं है। इसी तरह के संघर्ष हमारे लिए सहायक सिद्ध हो सकते हैं।

रियासतो का विलय

आजादी के समय में भारत में 565 देशी रियासतें थी। भारत में इनका क्षेत्रफल 40% था, जब सरदार पटेल ने आजादी के ठीक पहले वीपी मैनन के साथ में मिलकर बहुत सारे देसी राज्य को भारत में मिलाने का काम शुरू कर दिया।

तब सरदार वल्लभ भाई पटेल और वी पी मेनन ने देसी राजाओं को बहुत समझाया कि उन्हें सहायता देना संभव नहीं है। तब सरदार वल्लभभाई पटेल और मेनन की इस तरह विनती करने पर 3 राज्यों को छोड़कर बाकी सभी राज्यों ने भारत में मिलने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया।

3 राज्य ऐसे थे जिन्होंने भारत में मिलने से मना किया और वह है जम्मू कश्मीर, जूनागढ़ और हैदराबाद।

जूनागढ़ का विलय

जूनागढ़ के पास एक छोटी सी रियासत थी, जो चारों तरफ से भारतीय भूमि से गिरी हुई थी। यह पाकिस्तान के समीप भी नहीं थी। जूनागढ़ के नवाबों ने 15 अगस्त 1947 को पाकिस्तान के अंदर विलय होने की घोषणा कर दी।

परंतु राज्य के अंदर सबसे ज्यादा हिंदू धर्म था वह भारत के अंदर मिलना चाहता था। नवाब के विरुद्ध बहुत आंदोलन हुआ नवाब का बहुत विरोध किया गया। जिसके बाद भारतीय सेना ने जूनागढ़ में प्रवेश कर लिया।

जैसे ही नवाब को इस बात का पता चला वह भागकर पाकिस्तान चला गया और 9 नवंबर 1947 को जूनागढ़ को भारत में मिला लिया गया।

हैदराबाद का विलय

हैदराबाद भारत का सबसे बड़ा राज्य था, जो चारों तरफ से भारतीय जमीन से गिरा हुआ था। परंतु वहां के निजाम ने पाकिस्तान के राजस्थान से स्वतंत्र बनाने का दावा किया और अपनी सेना को बढ़ाने लग गया।

इस दौरान निजाम ने बहुत सारे हथियारों का आयात भी शुरू कर दिया। इस बात से पटेल चिंतित होने लगे, तब भारतीय सेना ने 13 सितंबर 1948 को हैदराबाद के अंदर प्रवेश कर लिया। 3 दिनों के बाद निजाम ने खुद का आत्मसमर्पण कर लिया और हैदराबाद को भारत में मिलन होने के लिए मंजूरी दे दी।

पंडित जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल

आजाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और प्रथम उपप्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल में आकाश और पाताल का अंतर था। जबकि दोनों ने इंग्लैंड से बैरिस्टर की डिग्री प्राप्त की थी।

परंतु सरदार वल्लभभाई पटेल वकालत के मामले में नेहरू जी से बहुत आगे थे और उन्होंने पूरी ब्रिटिश साम्राज्य के सभी विद्यार्थियों में से प्रथम स्थान प्राप्त किया था। नेहरू जी और पटेल में खास बातें नेहरू जी सोचते थे, परंतु सरदार वल्लभभाई पटेल उनपर अमल कर डालते थे।

जहां नेहरू जी शास्त्रों के ज्ञाता थे वहीं दूसरी ओर पटेल शास्त्र के पुजारी थे। पटेल जी ने भी ऊंची शिक्षा ली थी लेकिन उन्हें कभी अहंकार नहीं था। वह हमेशा कहा करते थे कि मैंने कला और विज्ञान में बहुत ऊंची उड़ान नहीं भरी है।

मेरा तो विकास झोपड़ियों में गरीब किसान के खेतों की भूमि और शहरों के गंदे मकानों में हुआ है। पंडित जी को गांव की गंदगी से बहुत चिढ़ थी। पंडित जी समाजवादी प्रधानमंत्री बनना चाहते थे।

देश की आजादी के पश्चात सरदार वल्लभभाई पटेल ने उप प्रधानमंत्री बनने के साथ प्रथम गृह, सूचनाओं, रियासत, विभाग के मंत्री भी बने थे। सरदार वल्लभभाई पटेल ने अपनी महानता से 562 छोटी छोटी रियासतों को भी भारत के अंदर मिला लिया था। वह अपने एक खाली झोले को लेकर पी वी मेनन के साथ सभी राज्यों के राजाओं से विनती करने के लिए निकल पड़े थे।

कश्मीर की रियासतों

जहां कश्मीर की रियासतों की बात आती है, तो नेहरू जी ने कश्मीर को भारत में विलय करने की जिम्मेदारी भी ली थी। परंतु यह सत्य है कि सरदार पटेल कश्मीर के जनमत संग्रह और कश्मीर के मुद्दे को संयुक्त राज्य अमेरिका में ले जाने के लिए बहुत विरोध कर रहे थे।

हालांकि सरदार पटेल ने निसंदेह 562 रियासतों का एकीकरण करके विश्व इतिहास में एक चमत्कार कर दिया था। महात्मा गांधी ने वल्लभभाई पटेल को इन रियासतें के बारे मे लिखा था की रियासतें की समस्या इतनी जटिल थी कि केवल तुम ही हल कर सकते थे।

महात्मा गांधी जी के इसी बात ने सरदार पटेल को अपने नजरों में महान बताया। जहां विदेशी विभाग में पंडित जी का कार्य अच्छा था, फिर भी कहीं बार वल्लभभाई पटेल को कैबिनेट के विदेशी विभाग समिति में जाना पड़ता था।

आजादी के बाद

आजादी के बाद बहुत से राज्यों के लोग कॉन्ग्रेस समिति के पक्ष में थे। क्योंकि इन कांग्रेस समितियों का परिचालन कांग्रेस द्वारा किया जा रहा था। गांधी जी की इच्छा का आदर करते हुए वल्लभ भाई पटेल जी ने प्रधानमंत्री पद की दौड़ से अपने आप को दूर रखा और नेहरु जी का समर्थन किया, ताकि नेहरू जी प्रधानमंत्री पद पर आ सके।

वल्लभ भाई पटेल ने उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री का कार्य करना पसंद किया। कि तू उसके बाद भी नेहरू जी और पटेल जी के बीच में हमेशा संबंध तनावपूर्ण रहते थे। ऐसा इसलिए था क्योंकि नेहरू जी से कई गुना ज्यादा पटेल जी ज्ञानी थे।

इन तनावपूर्ण संबंध के कारण दोनों ने कई बार इस पद को त्यागने की धमकी भी दी थी। गृह मंत्री के रूप में उनकी पहली प्राथमिकता थी देसी राज्यों को भारत में मिलाना। वल्लभभाई पटेल ने बिना किसी खून खराबे के यह काम पूरा करके दिखाया।

जब उन्होंने हैदराबाद को भारत में मिलाने के लिए भारत की सेना को भेजा, तो उसके बाद से ही उन्हें भारत के लोह पुरुष के रूप में जाना जाने लगा। हमारे देश में बहुत से सेनानी और राजनीतिक पद पर कार्य करने वाले नेताओ ने देश को आजाद कराने से देश की बागडोर को संभालने तक अपनी भूमिका निभाई।

उपसंहार 

सरदार वल्लभभाई पटेल जी ने आजादी के बाद भी बहुत से राज्यों को भारत में लाने के लिए अपना बहुत योगदान दिया। जिन्हें आज भी इतिहास में गिना जाता है और पढ़ा जाता है। सरदार वल्लभभाई पटेल जी के इन कार्यो को देश कभी भी भुला नहीं सकता।


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तो यह था सरदार वल्लभभाई पटेल पर निबंध, आशा करता हूं कि सरदार वल्लभभाई पटेल पर हिंदी में लिखा निबंध (Hindi Essay On Sardar Vallabhbhai Patel) आपको पसंद आया होगा। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा है, तो इस लेख को सभी के साथ शेयर करे।

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