सानिया मिर्ज़ा पर निबंध (Sania Mirza Essay In Hindi)

आज हम सानिया मिर्ज़ा पर निबंध (Essay On Sania Mirza In Hindi) लिखेंगे। सानिया मिर्ज़ा पर लिखा यह निबंध बच्चो (kids) और class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए लिखा गया है।

सानिया मिर्ज़ा पर लिखा हुआ यह निबंध (Essay On Sania Mirza In Hindi) आप अपने स्कूल या फिर कॉलेज प्रोजेक्ट के लिए इस्तेमाल कर सकते है। आपको हमारे इस वेबसाइट पर और भी कही विषयो पर हिंदी में निबंध मिलेंगे, जिन्हे आप पढ़ सकते है।


सानिया मिर्ज़ा पर निबंध (Sania Mirza Essay In Hindi)


प्रस्तावना

खेल की दुनिया में सानिया मिर्जा एक बहुत ही बड़ा नाम है। उन्होंने अपनी मेहनत और खेल के दम पर भारत का नाम पूरे विश्व भर में प्रसिद्ध किया है। सानिया मिर्जा टेनिस की एक बहुत बड़ी खिलाड़ी मानी जाती है।

सानिया मिर्जा ने अपने खेल और अपने हुनर के दम पर खेलकर दुनिया में बहुत नाम कमाया है। वह दुनिया के सबसे सफल खिलाड़ियों में से एक मानी जाती है। वह कई सारे भारतीय युवाओं की प्रेरणा बन चुकी हैं।

सानिया मिर्जा ने अपने जीवन की शुरुआत बिल्कुल एक सामान्य लड़की की तरह ही की थी। लेकिन सही समय पर सही दिशा मिलने से उन्होंने अपने जीवन को सफल बनाया। उन्होंने अपने अंदर छुपे हुनर को पहचाना और उसे और भी ज्यादा निखारा।

उन्होंने अपने सपने को पूरा करने के लिए दिन रात एक कर दिए। सानिया मिर्जा ने कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खेलों में अपने खेल के दम पर लोगों का दिल जीता। सानिया मिर्जा भारत में तो जानी-मानी खिलाड़ी है ही, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उन्होंने कई लोगों को अपने खेल का दीवाना बनाया है।

अपने खेल के दम पर उन्होंने कई सारे खिताब अपने नाम किए हैं। उन्होंने कई सारे गोल्ड मेडल और सिल्वर मेडल जीते हैं। सानिया मिर्जा ने वाकई में खेल जगत की ऊंचाइयों को छू लिया है।

सानिया मिर्जा का जीवन

सानिया मिर्जा का जन्म 5 नवंबर 1986 में मुंबई के एक सामान्य वर्गीय परिवार में हुआ। उनके परिवार में कुल 4 लोग हैं। उनकी मां नसीम मिर्जा, पिता इमरान मिर्जा और उनकी छोटी बहन अनाम मिर्ज़ा और खुद सानिया मिर्जा।

सानिया मिर्जा के माता पिता नसीम मां और पिता इमरान मिर्जा उनसे बहुत ही प्यार करते थे। उनके पिता इमरान मिर्जा एक बिल्डर थे जो बिल्डिंग डेवलपमेंट का कार्य करते थे।

सानिया मिर्जा किमान नसीब मिर्जा को पेंटिंग का काफी शौक था और इसी कारण से सानिया मिर्जा के पिता इमरान मिर्जा ने पेंटिंग का बिजनेस शुरू किया। जिसे आगे चलकर सानिया मिर्जा की मां नसीब मिर्जा ने संभाला। सानिया मिर्जा के पिता एक अच्छे बिल्डर तो थे ही, लेकिन कभी कबार एक संवाददाता के रूप में भी कार्य करते थे।

सानिया मिर्जा ने अपने स्कूली दिनों की शुरुआत मुंबई के एक स्कूल से की। अपने स्कूल में पढ़ाई के साथ-साथ सानिया मिर्जा खेल में भी रुचि लेने लगी। वे केवल 6 वर्ष की थी जब उन्होंने टेनिस खेलना प्रारंभ किया।

उनके टेनिस खेलने पर उनके और उनको टेनिस सिखाने पर उनके पिता ने उनका पूरा समर्थन किया। सानिया मिर्जा के घर में भी पैसों की काफी समस्या थी। लेकिन पैसों की समस्या होने के बावजूद उनके पिता ने उनके खेल को कभी कम नहीं आंका। उन्होंने अपने संबंधियों से मदद मांगी।

कुछ समय बाद बिज़नस के सिलसिले में सानिया मिर्जा के परिवार को मुंबई से हैदराबाद आना पड़ा। जिसके बाद से सानिया मिर्जा का परिवार मुंबई से हैदराबाद शिफ्ट हो गया और हैदराबाद में ही रहने लगा। सानिया मिर्जा कहती हैं, कि उनके खेल में सबसे ज्यादा योगदान उनके पिता का रहा है। इसके बाद आते हैं उनके गुरु रॉजर एंडरसन।

रॉजर एंडरसन ने उन्हें टेनिस खेलना सिखाया और इसके बाद से ही सानिया मिर्जा और भी ज्यादा रुचि लेकर और मेहनत और लगन से टेनिस खेलना सीखने लगीं। सानिया मिर्जा ने अपने खेल के कारण अपनी पढ़ाई में कभी रुकावट नहीं आने दी।

खेल के साथ-साथ पढ़ाई में भी पूरा ध्यान देती थी। उन्होंने नसर स्कूल से शिक्षा प्राप्त करने के बाद सेंट मैरी कॉलेज से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया। ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्होंने चेन्नई से डॉक्टर की उपाधि हासिल की। इतना ही नहीं सानिया मिर्जा टेनिस खेलने के साथ-साथ तैराकी का भी शौक रखती हैं।

खेल के मैदान में सानिया मिर्जा

खेल के क्षेत्र में सानिया मिर्जा ने कई बड़े बड़े खिताब अपने नाम किए हैं। अपने शार्ट के माध्यम से टेनिस में कई बड़े खिलाड़ियों को हराया। उन्होंने अपनी जीत से ना केवल अपना और अपने परिवार का बल्कि अपने देश का भी नाम रोशन किया है।

सानिया मिर्जा ने अर्जुन पुरस्कार अपने नाम किया। 2004 में सानिया मिर्जा ने अर्जुन अवॉर्ड फॉर लॉन टेनिस जीता और इसके बाद वर्ष 2006 में सानिया मिर्जा को पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित किया गया। 2015 में अपने खेल के दम पर सानिया मिर्जा ने राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार अपने नाम किया।

इतना ही नहीं सानिया मिर्जा के इतनी उपाधियों के कारण तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने सानिया मिर्जा को तेलंगाना में ब्रांड अंबेसडर बना दिया। इसके अलावा 2003 से 2013 तक लगातार एक दशक तक सानिया मिर्जा ने खुद को नंबर वन महिला टेनिस खिलाड़ी के रूप में जमाए रखा।

वह केवल 18 वर्ष की उम्र में अंतरराष्ट्रीय खेल खेलने लगी थी और उनका नाम चर्चा में आने लगा था। इसके बाद उन्हें वर्ष 2016 में पद्म भूषण अवार्ड से सम्मानित किया गया। सानिया मिर्जा ने अपने खिलाड़ी के करियर को सही मायनों में नई ऊंचाइयां दी हैं।

निष्कर्ष

सानिया मिर्जा बहुत ही बेहतरीन भारतीय दिग्गज खिलाड़ी हैं। उन्होंने विश्व स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है। उनकी सफलता का यही राज है कि उन्होंने कभी हार नहीं मानी। हालांकि उनके रास्ते में कई रुकावटें आई। वर्ष 2012 में खेल खेलने के दौरान उन को गंभीर चोट लग गई थी, जिसके कारण उनका सिंगल टेनिस खेलना संभव नहीं हो पाया।

लेकिन पैर में चोट लगने के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और वह अपने सपने की ओर अग्रसर होते गई। उन्होंने पूरी मेहनत के साथ डबल खिलाड़ी टेनिस खेलना शुरू किया और टेनिस के क्षेत्र में वापसी की। सानिया मिर्जा आज के समय में युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल जीतने के साथ-साथ लोगों का दिल भी जीता है।


तो यह था सानिया मिर्ज़ा पर निबंध, आशा करता हूं कि सानिया मिर्ज़ा पर हिंदी में लिखा निबंध (Hindi Essay On Sania Mirza) आपको पसंद आया होगा। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा है, तो इस लेख को सभी के साथ शेयर करे।

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