रबींद्रनाथ टैगोर पर निबंध (Rabindranath Tagore Essay In Hindi)

रबींद्रनाथ टैगोर भारत के एक लोकप्रिय कवी है। आज हम भारत के सबसे पहले कविताओं के लिए नोबल पुरस्कार जितने वाले रबींद्रनाथ टैगोर के बारे में निबंध (Rabindranath Tagore Essay In Hindi) लिखेंगे। रबींद्रनाथ टैगोर पर लिखा यह निबंध बच्चो और class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 के विद्यार्थियों के लिए लिखा गया है।

रबींद्रनाथ टैगोर पर लिखा हुआ यह निबंध (Essay On Rabindranath Tagore In Hindi) आप अपने स्कूल या फिर कॉलेज प्रोजेक्ट के लिए इस्तेमाल कर सकते है। आपको हमारे इस वेबसाइट पर और भी कही विषयो पर हिंदी में निबंध मिलेंगे, जिन्हे आप पढ़ सकते है।


रबींद्रनाथ टैगोर पर निबंध (Rabindranath Tagore Essay In Hindi)


रबींद्रनाथ टैगोर का जन्म ७ में १८६१ में हुआ था। रबीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म कोलकाता में एक ऐसे परिवार में हुआ था जिनकी आर्थिक स्थिति काफी अच्छी थी।

रविंद्र नाथ टैगोर के पिता का नाम देवेंद्र नाथ टैगोर था। रविंद्र नाथ टैगोर देवेंद्र नाथ जी के ९ वे पुत्र थे। रविंद्र नाथ टैगोर की माता का नाम सारदा देवी था।

रविंद्र नाथ टैगोर जी ने उनकी पढ़ाई घर पर ही की थी। उन्हें कुछ शिक्षक घर पर ही पढ़ाया करते थे। रविंद्र नाथ टैगोर के दादा का नाम द्वारकानाथ टैगोर था।

रविंद्र नाथ टैगोर के दादा काफी अमीर थे। वह जाने-माने जमीदार और समाज सुधारक थे।

रबीन्द्रनाथ टैगोर जब ११ साल के थे तो वे उनके पिता के साथ १८७३ में कोलकाता से निकले और वह अपने पिता के साथ कई दिनों तक भारत की यात्रा कर रहे थे।

रविंद्र नाथ टैगोर एशिया के पहले नोबेल विजेता थे। जिन्होंने उनके कविताओं के लिए नोबेल पुरस्कार जीता था। उन्होंने १९१३ में गीतांजलि और अन्य कविताओं के लिए नोबेल पुरस्कार जीते थे।

रविंद्र नाथ टैगोर को ब्रिटिश के राजा जॉर्ज ५ के द्वारा नाइटहुड उपाधि से सम्मानित किया गया था। रविंद्र नाथ टैगोर जी की कविताएं भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में प्रसिद्ध थी।

भारत और बांग्लादेश के राष्ट्रगीत रविंद्र नाथ टैगोर ने ही लिखे हैं। रबीन्द्रनाथ टैगोर की कविता जना गण मना भारत की नेशनल एंथम है। रविंद्र नाथ जी की दूसरी कविता अमर सोनार बांग्ला बांग्लादेश की नेशनल एंथम है।

जब रविंद्र नाथ टैगोर अपने पिता के साथ भारत की यात्रा पर निकले थे। तू वहां हिमालय के डलहौजी हिल स्टेशन पर पहुंचने से पहले शांतिनिकेतन और अमृतसर के दौरे पर गए थे।

जहां पर उन्होंने इतिहास, खगोल विज्ञान, आधुनिक विज्ञान, संस्कृत के साथ ही महान लोगों के जीवनी का अभ्यास किया था।

वहां उन्होंने कालिदास जी के कविताओं का अध्ययन भी किया। सन १८७४ में रबीन्द्रनाथ टैगोर की कविता अभिलाषा को तातोबोधिनी नाम के पत्रिका में गुप्त रूप से प्रकाशित किया गया था।

१८७८ में रबीन्द्रनाथ टैगोर की पहली कविताओं की किताब जिसका नाम था “कवि कहानी” प्रकाशित हुई थी।

रबीन्द्रनाथ टैगोर १८७८ में अपने बड़े भाई सत्येंद्र नाथ टैगोर के साथ इंग्लैंड, कानून की शिक्षा प्राप्त करने के लिए गए थे।

उसके बाद वह १८८० में भारत को लौटे।भारत में आने के बाद उन्होंने एक कवि और लेखक के तौर पर अपना जीवन शुरू किया।

रविंद्र नाथ टैगोर जी की शादी १८८३ में हुई थी। रबीन्द्रनाथ टैगोर जी की शादी मृणालिनी देवी राय चौधरी जी के साथ हुई थी।

रविंद्र नाथ टैगोर जी को दो बेटे और तीन बेटियां हुई थी। १८८४ में रबीन्द्रनाथ ठाकुर ने कई नाटक और कविताएं लिखी जिस में शामिल है “कोरि ओ कलम, राजा औ रानी, और विसर्जन।

उसके बाद १८९० में रविंद्र नाथ टैगोर शिलाईदहा जोकि आज के समय बांग्लादेश में है। वहां पर रहने चले गए।

वहां पर जाने का कारण था कि वह अपने परिवार के संपत्ति को देखने गए थे। इस बीच १८९३ से लेकर १९०० में रबीन्द्रनाथ टैगोर ने और ७ कविताओं के संग्रह को लिखा।

जिनमें सोनार तारी, कनिका जैसे कविताओं का समावेश था। रविंद्र नाथ टैगोर १९०१ में बंग दर्शन नाम की पत्रिका के संपादक बन गए।

उसके अगले ही साल सन १९०२ मैं उनके पत्नी का निधन हो गया। जिसके बाद रविंद्र नाथ टैगोर ने अपने पत्नी के याद में उन्हें समर्पित करते हुए “स्मरण” नाम के कविताओं का संग्रह लिखा।

जब १९०५ में लॉर्ड curzon बंगाल को दो विभागों में विभाजित करने का निर्णय लिया। तो इस निर्णय का रविंद्र नाथ जी ने पड़े जोरो से विरोध किया।

रविंद्र नाथ टैगोर जी ने विरोध के बहुत सी बैठकों में भाग लिया। उसके बाद रविंद्र टैगोर नहीं है राखी बंधन समारोह को अविभाजित बंगाल की एकता का प्रतीक के रूप में परिचित किया।

१९०९ में रबीन्द्रनाथ टैगोर ने गीतांजलि को लिखना शुरू किया। उसके बाद रबीन्द्रनाथ टैगोर फिर एक बार १९१२ में यूरोप गए।

यह उनकी दूसरी बार यूरोप के लिए यात्रा थी। उनके लंदन की यात्रा में उन्होंने उनके कुछ कविताओं और गानों को इंग्लिश भाषा में भाषांतरित किया।

उसके बाद रविंद्र नाथ टैगोर लंदन में विलियम rothenstein से मिले। विलियम एक चित्रकार थे।वे रबींद्रनाथ टैगोर के कविताओं से काफी प्रभावित हुए।

उन्होंने रबींद्रनाथ टैगोर के कविताओं कि कुछ प्रतियां (copies) बनाई। उसके बाद विलियम ने येट्स और कुछ अंग्रेजी कवियों को उन प्रतियां को दिया।

उस वक्त येट्स काफी रोमांचित थे।वह रबीन्द्रनाथ टैगोर के कविताओं से काफी प्रभावित हुए थे। उन्होंने गीतांजलि का परिचय तब दिखा जब उसे सितंबर १९१२ को प्रकाशित किया गया।

उसके बाद रविंद्र नाथ टैगोर को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह नोबेल पुरस्कार उन्हें १९१३ में गीतांजलि के लिए दिया गया।

रविंद्र नाथ टैगोर गांधीजी के बहुत बड़े समर्थक थे। लेकिन उन्होंने कभी भी राजनीति में कदम नहीं रखा।

सन १९२१ में रविंद्र नाथ टैगोर ने विश्व भारती नाम की यूनिवर्सिटी की स्थापना की थी। उन्होंने अपने जीवन की सारी जमा पूंजी इस यूनिवर्सिटी को बनाने के लिए दे दी।

यहां तक कि उन्होंने नोबेल पुरस्कार में मिली हुई सारी धनराशि यूनिवर्सिटी के लिए दे दी।

१९४० में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने विशेष समारोह का आयोजन किया। जिसमें उन्हें साहित्य में डॉक्टरेट की उपाधि देकर सम्मानित किया गया था।

सन १९४१ में गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर जी की मृत्यु हुई। उनकी मृत्यु उनके पूर्वजों के घर जो कि कोलकाता में हैं वहां, ७ अगस्त १९४१ में हुई। और इसी के साथ एक महान कवि और लेखक इस दुनिया से चले गए।


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तो यह थी रबींद्रनाथ टैगोर जी की कहानी और रबींद्रनाथ टैगोर जी पर निबंध, आशा करता हूं कि रबींद्रनाथ टैगोर पर हिंदी में लिखा निबंध (Hindi Essay On Rabindranath Tagore) आपको पसंद आया होगा। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा है, तो इस लेख को सभी के साथ शेयर करे।

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