मेरा प्रिय मित्र पर निबंध (My Best Friend Essay In Hindi)

आज के इस लेख में हम मेरा प्रिय मित्र पर निबंध (Essay On My Best Friend In Hindi) लिखेंगे। मेरा प्रिय मित्र पर लिखा यह निबंध बच्चो और class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए लिखा गया है।

मेरा प्रिय मित्र पर लिखा हुआ यह निबंध (Essay On My Best Friend In Hindi) आप अपने स्कूल या फिर कॉलेज प्रोजेक्ट के लिए इस्तेमाल कर सकते है। आपको हमारे इस वेबसाइट पर और भी कही विषयो पर हिंदी में निबंध मिलेंगे, जिन्हे आप पढ़ सकते है।

मेरा प्रिय मित्र पर निबंध (My Best Friend Essay In Hindi)


प्रस्तावना 

हम सब के वैसे तो कई मित्र होते हैं, लेकिन एक सच्चे और अच्छे मित्र की जरूरत जीवन में सभी को होती है। कौनसा मित्र हमारा सच्चा मित्र है इसकी पहचान करना थोड़ा मुश्किल होता है। लेकिन समय बीतने पर हमें खुद ही एहसास हो जाता है कि कौन हमारा हितकारी मित्र है।

कई बार बहुत से लोग चिकनी चुपड़ी बातें करके हमें बहका लेते हैं और हमें लगने लगता है कि ये हमारा प्रिय मित्र है। लेकिन ऐसे व्यक्ति कभी अच्छे मित्र नहीं बनते और काम निकल जाने पर वे हमसे दूरियां बना लेते हैं।

जबकि एक अच्छा मित्र कभी ऐसा नहीं करता है वो जरूरत पड़ने पर हमारी मदद करता है और हमें वास्तविकता से परिचित करवाता है।

मेरा प्रिय मित्र

मेरा प्रिय मित्र का नाम रवि है। वह मेरे साथ मेरे विद्यालय में पढ़ता है। मेरे कई मित्र हैं जो बचपन से मेरे साथ स्कूल में पढ़ते हैं, लेकिन उन सबसे मेरी मित्रता इतनी गहरी नहीं हो पाई जितनी की रवि से 3 वर्षों में हो गई है। इन तीन सालों में ऐसी कई घटनाएं घटित हुई जिनसे मुझे ये एहसास हुआ कि रवि ही मेरा सच्चा मित्र है।

मैं अपने आप को भाग्यशाली समझता हूं कि मुझे इतना अच्छा मित्र मिला। उसमें वो सभी खूबियां हैं जो एक अच्छे मित्र में होनी चाहिए। हम दोनों एक दूसरे का हर अच्छी बुरी परिस्थितियों में साथ निभाते हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि हमारी मित्रता आजीवन ऐसी ही रहेगी। 

मेरे प्रिय मित्र की खूबियां

रवि एक मध्यम वर्गीय परिवार से सबंध रखता है, लेकिन उसका पूरा परिवार पढ़ा लिखा और संस्कारी है। वह मृदुभाषी है और बड़ों की इज्जत करता है। वो पढ़ाई में मुझसे बहुत अच्छा है और खेलों में भी रुचि लेता है।

वह सभी से आत्मविश्वास के साथ बातें करता है और जल्द ही सबसे घुल मिल जाता है। जब हम दोनों साथ बैठकर बातें करते हैं तो हमें समय का पता ही नहीं चलता। उसे कहानियां और कविताएं लिखने का शौक है और मुझे पढ़ने का, इसलिए हमारी खूब जमती है।

वो जब भी कोई नई कहानी या कविता लिखता है तो सबसे पहले मुझे सुनाता है। उसने हमारे दोस्ती पर भी कई कविताएं लिखी हैं, जो मुझे सबसे ज्यादा पसंद हैं। वो बहुत ही अच्छा इंसान है और सभी की सहायता करता है।

हमारे स्कूल में जब भी स्काउटिंग के टास्क दिए जाते हैं, या फिर समाज सेवा के कार्य करने के लिए कहा जाता है तो वही सबसे आगे होता है। वो सत्यवादी है और जितना मुझे पता है मैंने उसे कभी झूठ बोलते हुए नहीं देखा।

चाहे किसी को कटु ही क्यों ना लगे पर वो खुद अच्छा बनने के लिए झूठ का सहारा नहीं लेता है। एक सच्चे मित्र की यही तो पहचान होती है कि वो आपको सच का रास्ता दिखाता है।

जब भी मुझे किसी बात में उलझन होती है तो मैं उसे ही बताता हूं और वो मुझे सही सलाह देता है। उसकी कई खूबियां हैं जो मुझे समय के साथ धीरे धीरे पता चलती गई और हमारी मित्रता भी प्रगाढ़ होती चली गई।

कुछ खास घटनाएं

मेरे बहुत से मित्र हैं लेकिन रवि उनमें से कैसे खास बन गया इसके बारे में जब भी मैं सोचता हूं तो मुझे कई बातें याद आती हैं। जिनमें से एक है जब उसने मेरा साथ दिया और एक सच्चे मित्र का फर्ज निभाया था।

जब मैं दसवीं कक्षा में पढ़ता था तब रवि ने हमारे स्कूल में एडमिशन लिया था। उस समय मैं किशोरावस्था के अल्हड़पन में पढ़ाई को लेकर कुछ लापरवाह हो गया था और इसलिए यही सोचता था कि मुझे सब आता है।

जब अध्यापक कक्षा में पढ़ाते थे तब मैं ध्यान नहीं देता था। इसका परिणाम ये हुआ की अर्धवार्षिक परीक्षा में मैं दो विषयों में फेल हो गया। उस समय रवि ने मुझे समझाया और मन लगाकर पढ़ने को प्रेरित किया।

मुझे जब भी पढ़ाई में कोई दिक्कत होती थी तो वो मेरे घर आकर मुझे पढ़ने में मदद करता था, जिसकी वजह से दसवीं की वार्षिक परीक्षा में मैं अच्छे नंबरों से पास हुआ। एक बार हमारे विद्यालय में खेल समारोह आयोजित हुआ और हम दोनों ने उसमें भाग लिया।

हमें कबड्डी बहुत पसंद थी तो हमनें उसी खेल में हिस्सा लिया। अलग अलग विद्यालयों की टीमें हमारे विद्यालय में आई थीं। उनमें से कुछ छात्र काफी ईर्ष्यालु प्रकृति के थे, इसलिए कबड्डी के खेल के दौरान उन्होंने मुझे बहुत बुरी तरीके से पकड़ा और धक्का दिया।

जिससे मुझे पैर में गहरी चोट आ गयी। तब रवि ने मुझे संभाला और अध्यापकों कि सहायता से अस्पताल पहुंचाया। उसने उन छात्रों की शिकायत प्रधानाध्यापक से भी कि, जिन्होंने ऐसा व्यवहार किया था।

फिर रवि बहुत बार मेरे घर आता और जब तक मुझे डॉक्टर ने स्कूल जाने को मना किया था, वो मुझे सारे महत्वपूर्ण टॉपिक जो स्कूल में पढ़ाए जाते थे, घर पर ही समझा देता था। इस प्रकार से बहुत सी ऐसी बातें इन तीन सालों में हुई जिनसे हम दोनों का रिश्ता गहरा होता चला गया।

हमारी मित्रता अमीरी गरीबी से परे

मेरा मित्र रवि क्योंकि एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखता है तो वह पैसों की कीमत अच्छे से समझता है और फिजूलखर्ची नहीं करता। इसके विपरित मैं एक धनी परिवार से हूं और जब मैं उससे मिला नहीं था तब तक बहुत फालतू खर्च करता था।

मैं कई बार अपने कक्षा के छात्रों के साथ मिलकर पार्टियां करता और महंगी महंगी चीजें खरीदता था। लेकिन जब मेरी रवि से मित्रता हुई तब उसने मुझे समझाया की धन कमाना बहुत मुश्किल है और हमारे माता पिता बहुत मेहनत करके पैसे कमाते हैं, तो हमें उस बर्बाद नहीं करना चाहिए।

अन्य सभी दोस्तों से विपरित उसने मुझे महंगे उपहार देने से भी मना किया और कहा अगर तुम्हारे पास पैसे बचते हैं, तो तुम उन्हें जमा करो या फिर उनसे किसी गरीब असहाय  की सहायता करो।

उसकी बातों का मुझ पर बहुत प्रभाव पड़ा और मैं समझा की अमीरी और गरीबी मित्रता के रिश्ते पर असर नहीं डालती है। उसके लिए केवल एक दूसरे के प्रति सच्ची भावनाएं होना ही काफी है।

कृष्ण और सुदामा की मित्रता भी तो ऐसी ही थी, उनमें धन की दीवार कभी आड़े नहीं आयी। अब हम दोनों अपने जन्मदिन पर अपनी अपनी श्रद्धानुसार जरूरतमंदो की सहायता करते हैं, जिससे हमें असीम शांति और खुशी का अनुभव होता है।

विश्वासपात्र मित्र

मेरा प्रिय मित्र रवि पर मैं बहुत भरोसा करता हूं और हर एक बात बिना किसी झिझक के उसे बता सकता हूं। एक सच्चे मित्र की यह भी पहचान होती है कि वह आपके रहस्यों को सबके सामने उजागर नहीं करता है और आप उस पर विश्वास कर सकते हैं।

अगर आपको ऐसा महसूस हो कि आप अपनी कुछ खास बातें अपने मित्र को नहीं बता सकते, तो निश्चय ही वह आपका सच्चा मित्र नहीं है। अतः जिस पर विश्वास हो उससे ही सब बातें साझा करनी चाहिए।

मैंने कई ऐसी बातें रवि को बताई जो मैं दूसरे लोगों के साथ नहीं बांटना चाहता था और उसने भी मेरी सभी बातों को सुना तथा किसी को बताकर मेरा मजाक नहीं बनाया, जो कि ज्यादातर व्यक्ति किया करते हैं।

सही सलाहकार

एक अच्छा मित्र वही होता है जो आपको उचित सलाह दे और आपको गलत राह पर जाने से रोके। हमें कई ऐसे व्यक्ति जीवन में मिलते हैं जो हमें अपनी अपनी तरह से समझाते हैं।कुछ लोग अच्छी सलाह देते हैं और कुछ दूसरों की परेशानी में भी अपना स्वार्थ सिद्ध करने में जुटे होते हैं और इसलिए सबको बहकाते हैं।

अतः मुझे जब भी लगा कि मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि इस परिस्थिति में क्या करना चाहिए तो मैंने अपने माता पिता और अपने मित्र रवि की ही सलाह ली है। क्योंकि उसने हमेशा मुझे सही रास्ता दिखाया है।

उसने मुझे मेरे अच्छे कार्यों के लिए प्रोत्साहित किया, मेरी तारीफ की और मुझसे कोई गलत कार्य ना हो इसके लिए सावधान किया। उसने मुझे अपनी गलती को स्वीकारना भी सिखाया और कहा कि हम सभी इंसान हैं और हमसे गलतियां हो सकती हैं, लेकिन हमें अपनी गलतियों से सीख लेनी चाहिए और कोशिश करनी चाहिए कि आगे से ऐसा ना हो।

मेरा जब भी मन उदास हो या मूड खराब हो तो वह एक जादू की तरह चुटकियों में मेरा मूड ठीक कर देता है। वह मेरे हर सुख दुख का साथी है और मेरे आत्मसम्मान की कद्र करता है।

उसकी सच्चाई और ईमानदारी से मुझे बहुत प्रेरणा मिलती है। हम जो भी काम करते हैं या करने के बारे में सोचते हैं उसके लिए साथ मिलकर प्लानिंग बनाते हैं। हम अपनी छुट्टियां साथ में ही बिताना पसंद करते हैं और साथ ही घूमने जाते हैं।

उपसंहार 

मैं चाहता हूं कि सभी को ऐसा सच्चा मित्र मिले। हमें मित्र की परख करना आना चाहिए और अगर कभी अच्छा मित्र मिले तो उसका साथ नहीं छोड़ना चाहिए तथा उसकी कद्र करनी चाहिए, क्योंकि अच्छे मित्र का होना जीवन में बहुत आवश्यक है ताकि आपको भावात्मक संबल मिले और आप सही राह पर चलें।

किसी कवि ने सही कहा है –

कुछ रिश्ते होते हैं बहुत अनमोल

जिनका नहीं होता है कोई तोल मोल

उन्ही में से एक रिश्ता है मित्रता

जिसे पाने तरसती है हर हस्ती

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मेरा प्रिय मित्र पर निबंध (Short Essay On My Best Friend In Hindi)


हमारे जिंदगी में एक अच्छा और ईमानदार दोस्त होना बहुत ज्यादा जरुरी हैं, लेकिन किस्मत वाले को ही एक अच्छा दोस्त मिलता हैं। दोस्ती एक ऐसा रिश्ता हैं जो कहीं भी किसी से हो सकता हैं।

मेरा भी एक बहुत अच्छा दोस्त हैं, हम दोनों एक ही मुहल्ला में रहते थे। एक साथ स्कूल जाते थे और साथ में खेलते भी थे। हम अपने स्कूल का होम वर्क साथ में ही करते थे। हम दोनों गणित के सभी प्रशन एक साथ बैठ कर बनाते थे।

जिससे हम दोनों में से कोई प्रश्न का उत्तरनहीं बनता था, तो हम एक दूसरे से मदद लेते थे और सभी प्रश्नो को हल कर देते थे। हमारे स्कूल में भी सभी बच्चे और शिक्षक जानते थे की ये दोनों अच्छे दोस्त हैं। किसी को हम दोनों में से किसी से काम होता था तो किसी एक को बता देता था और समझता था दोनों को बता दिया। इतनी गहरी हमारी दोस्ती थी।

हम दोनों एक दूसरे के घर जाते थे और हमारे परिवार के सभी लोग हमारे दोस्ती से खुश रहते थे। हम दोनों दोस्त हमेशा ये कोशिश करते थे की कुछ गलत नहीं करे, जिससे हमारे परिवार को कोई दिक्कत हो और हम दोनों एक दूसरे के परिवार को अपना ही परिवार समझते है।

हम अपने दोस्त के घर जा कर कई -कई घंटे बैठे रहते थे और बाते करते रहते थे और उस वक़्त हमे समय का पता भी नहीं चलता था। मेरा दोस्त मुझे हर तरह से मदद करता हैं, वो मुझे हमेशा अच्छी चीजे सिखने के लिए प्रोत्साहित करता हैं। वो मुझे अच्छी राह पर चलना बताता हैं और मुझे मेरे जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए कहता है।

हमारे स्कूल ख़तम होने के बाद हम दोनों रोज ट्रेन से अपने शहर कॉलेज के लिए जाने लगे थे। एक दिन मेरा दोस्त बिमार हो गया था तो मेरा भी कॉलेज जाने का मन नहीं था। लेकिन कॉलेज में कुछ विशेष काम होने के कारण मुझे अकेले ही कॉलेज जाना पड़ा।

इस कारन देर होने से मैं बिना टिकट लिए ही ट्रेन में चढ़ गया था। कुछ दूर ट्रैन चली और टीटी टिकट चेक करने आ गया था, लेकिन मेरे पास टिकट नहीं होने के बजह से टीटी ने मुज़पर फाइन लगा दिया था।

परन्तु मेरे पास फाइन देने के लिए उतने पैसे नहीं थे, तो उसने मुझे एक स्टेशन के लॉकर में कैदी के तरह बंद कर दिया। अब मैं सोचने लगा की अब क्या करे, मैं अपने परिवार के सदस्य को यह बात नहीं बता सकता था।

क्योकि पापा मुझे ही डाटने लगते क्योंकी वो हमेशा टिकट के लिए अलग से कुछ पैसे मुझे जरूर देते थे। उस समय मैंने अपने दोस्त को फ़ोन किया, वो बीमार था लेकिन यह सब सुनते ही वह बोला की मैं तुरंत पहुंचता हु तुम घवराना नहीं और वो घर से कुछ बहाना कर के तुरंत अपने मोटरसाइकल से मेरे पास पैसे लेकर पहुँच गया।

मेरे दोस्त के आते ही उसने तट को फाइन के पैसे दे दिए और फिर मैं उसके साथ घर चला गया। वो बीमार था लेकिन वो मेरे लिए बिना किसी देरी के आ गया, इसे ही सच्चा दोस्त कहते है और ऐसी होती है दोस्ती।

ऐसे दोस्तों का हमारे जिंदगी में होना ज्यादा जरुरी हैं, क्योकि कुछ बाते जो हम अपने परिवार के सदस्य को नहीं बोल सकते, वो बाते हम अपने दोस्तों से शेयर कर सकते हैं। दोस्त हमे हमारे गलत समय में और अच्छे समय में साथ जरूर देते हैं।

हमारे जिंगदी में अनेक तरह के दोस्त मिलते हैं। कुछ दोस्त हमसे उम्र में बड़े होते हैं, वो हमसे अपने छोटे भाई के तरह व्यव्हार करते हैं। वह हमे बहुत कुछ सिखाते हैं, वो अपने जिंदगी से सीखी हुई बात हमें बताते हैं।

जिससे हमें बहुत कुछ सिखने को मिलता हैं। कुछ दोस्त लगभग हमारे उम्र के होते हैं जो हमारे खास दोस्त होते हैं। जो हमारे सभी तरह के कामो में शामिल होते हैं, हम लोग ज्यादा से ज्यादा मस्ती करते हैं।

कुछ हम से छोटे उम्र के दोस्त भी होते हैं, जिन्हे हमें अपने जिंदगी में सीखी हुई बातो को सिखाते हैं। जिससे उन्हें उन दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ता जो हम अपने जिंदगी में करते है।

हमें दोस्ती हमेशा ईमानदारी से निभाना चाहिए, हमें अपने दोस्त की हमेशा सहायता करना चाहिए। उसे हमे वो सभी चीजे सीखानी चाहिए जिससे हमे जीवन में दिक्कतो से लड़ने में मदद हुई है।

दोस्ती एक ऐसा पवित्र रिश्ता है जो अच्छे और गलत सभी समय हमें मदद करता हैं। जब हमारा बुरा वक्त चल रहा होता हैं उस समय हमारा दोस्त ही हमारी मदद करता हैं। जब कभी हमारा दोस्त किसी दिक्कत में होता है तो उसे हमेसा मदद करनी चाहिए। दोस्ती में हमेसा ईमानदारी और भरोसा होना चाहिए।

जब भी मेरे दोस्त के जीवन में किसी भी बात की दिक्कत होती हैं तो हम दोनों एक साथ बैठ कर उसे सुलझाते हैं। अपनी दोस्ती किसी और की बातो से कभी ख़राब नहीं करनी चाहिए, क्योकि हमारे जिंदगी में कुछ ऐसे भी लोग मिलते हैं जो हमारे दोस्ती को तोडना चाहते हैं।

लेकिन अगर हम लोग एक दूसरे पर भरोसा रखेंगे, तो हमारी दोस्ती कभी भी किसी के कुछ कहने से नहीं टूटेगी और हम हमेशा अपने दोस्तों के साथ खुश रहेंगे।


तो यह था मेरा प्रिय मित्र पर निबंध, आशा करता हूं कि मेरा प्रिय मित्र पर हिंदी में लिखा निबंध (Hindi Essay On My Best Friend) आपको पसंद आया होगा। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा है, तो इस लेख को सभी के साथ शेयर करे।

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