मेरे सपनो का भारत पर निबंध (Mere Sapno Ka Bharat Essay In Hindi)

आज हम मेरे सपनो का भारत पर निबंध (Mere Sapno Ka Bharat Essay In Hindi) लिखेंगे। मेरे सपनो का भारत पर लिखा यह निबंध kids और class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए लिखा गया है।

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मेरे सपनो का भारत पर निबंध (Mere Sapno Ka Bharat Essay In Hindi)


प्रस्तावना

अपनी मातृभूमि के लिए कुछ करने की बात सभी सोचते है, इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति स्वप्न देखता है। इसी प्रकार मेरा भी एक स्वप्न है, मेरे सपनो का भारत। जहां विभिन्न संस्कृतियों ओर धर्मों के लोग एक-दूसरे के साथ सौहार्द से मिलजुल कर रहते है।

लेकिन फिर भी जातिवाद, पंथ, धर्म, लिंग इसमे भेदभाव आर्थिक स्थिति के आधार पर किया जाता है। मेरे सपनो का भारत एक ऐसी जगह होगा, जहां किसी तरह का भेदभाव ओर किसी प्रकार का दुख, दर्द, भ्र्ष्टाचार, बेरोजगारी कुछ भी नहीं होगा ओर मेरा देश भारत खुशहाल ओर तरक्की करके पूरे विशव में अपना एक अलग ही स्थान बनायेगा।

मेरे सपनो के भारत में जातिप्रथा का अंत

मेरे देश की यह विडम्बना ही है की इस युग में भी जातिवाद के पोषकों की कमी नहीँ है। इसके पोषक कई आधारों पर इसका समर्थन करते है। समर्थन का एक आधार यह कहा जाता है की, आधुनिक सभ्य समाज में कार्य कुशलता के लिए श्रम विभाजन को आवश्यक माना जाता है।

जातिप्रथा ही श्रम का दूसरा रूप है। इसमे कोई बुराई नही है ऐसा माना जाता है। इस तर्क के सम्बन्ध में फिलहाल तो यही आपत्तिजनक है की जाती प्रथा श्रम विभाजन के साथ-साथ श्रमिक विभाजन का भी रूप लिए हुए है।

श्रम विभाजन निश्चय ही सभ्य समाज की आवश्यकता है, परन्तु किसी भी सभ्य समाज में श्रम विभाजन की व्यवस्था श्रमिको का विभिन्न वर्गों में अस्वाभाविक विभाजन नहीं करती। भारत की जाती प्रथा की एक ओर विशेषता यह है की यह श्रमिकों का अस्वभाविक विभाजन ही नहीँ करती, बल्कि विभाजन विभिन्न वर्गों को एक-दूसरे की अपेक्षा में ऊंच-नीच भी करार देती है, जो की विश्व के किसी समाज में नहीँ पायी जाती।

जातिप्रथा को यदि श्रम विभाजन मान लिया जाए, तो यह स्वभाविक विभाजन नहीँ है, क्योंकि यह मनुष्य की रुचि पर आधारित नहीं है। कुशल व्यक्ति या सक्षम -श्रमिक समाज का निर्माण करने के लिए आवश्यक है।

मेरा सपना है की व्यक्ति अपने पेशे ओर कार्य का चुनाव स्वयं करे, ना की श्रमिक के रूप में जातिवाद या जाती प्रथा जैसी कुरूतियो का जन्म दे। मेरे भारत में माता-पिता का जो पैसा या कार्य होता है, वो बच्चा जब जन्म लेता है तब ही निर्धारण कर दिया जाता हैं ओर में इस परम्परा के बिल्कुल खिलाफ हू।

मैं चाहता हूँ की मेरे सपनो के भारत में बच्चों को जातिवाद, श्रमिक बनने जैसी कुरूतियो को छोड़ कर अपने मन मुताबिक सही कार्य ओर अन्य कार्य चूनने का मौका मिले। मेरे सपनो के भारत में कोई जातिवाद, साम्प्रदायिकता ओर प्रदेशिकता नहीं होंगी।

सर्वप्रथम में संप्रदायिमता का नाश करूँगा, चाहे उसका स्वरूप या स्तर कोई भी क्यो न हो। इस प्रकार की सभी प्रवर्तिया जो अलगाववाद व भेदभाव को हवा देती है, उन्हें भी हटाना चाहिए।

मेरे सपनो के भारत का वैज्ञानिक रूप

मैं मेरे भारत देश को वैज्ञानिक रूप से विकसित व उन्नत होते देखना चाहता हूँ। में एक ऐसे भारत का स्वपन देखता हु, जहां शिक्षा एवं वैज्ञानिक योजनायें हो। अंधविश्वास तथा भावुकता के लिए उसमे कोई स्थान नहीँ हों। मैं भारत को विज्ञान व तकनीकी के शिर्ष पर देखना चाहता हूँ, क्योंकि आज का युग विज्ञान व सूचना प्रोधोगिकी का है।

प्रत्येक राष्ट्र जो संपन्नता एवं सम्रद्धि चाहता है, उसे विज्ञान एवं सूचना प्रोधोगिकी को अपेक्षित महत्व देना होंगा। वरना वह अपने नागरिको को अच्छा जीवन स्तर उपलब्ध नहीं करा पायेगा।

परंतु फिर भी देखने में आता है की अधिक पैसा ओर आधुनिक साधन को देखकर अधिक बुद्धिमान ओर अपने कार्य में निपुण व्यक्ति हमारे देश को छोड़कर बहार के देश में जाकर कार्य करना ज्यादा पसंद करते है। जो हमारे देश के लिए बहुत दुख की बात ओर निरसता की बात है।

जबकि यही होनहार ओर प्रतिभाशाली व्यक्ति हमारे देह में रहकर ना जाने कितनी तरक़्क़ी ओर ना जाने कितने वैज्ञानिक बदलाव ला सकते है। वे हमारे देश भारत को वैज्ञानिक रूप में बहुत ऊँचे स्थान पर ले जा सकते है।

मैं मेरे सपनो के भारत में वो सभी सुविधा मुहिया करुँगा जहां किसी को भी अपने ज्ञान का प्रयोग किसी दूसरे देश में जाकर ना करना पड़े। किसी को भी अपने देश का नाम रोशन करने में कोई बाधा ना आये इसका भी मैं ध्यान रखूंगा।

मेरे सपनो का भारत खाद्यान्न की दृष्टि

मेरे सपनो का भारत खाद्यान्न की दृष्टि से आत्मनिर्भर होंगा। प्रत्येक भूमि को उपजाऊ बनाया जाएगा, ताकि खाद्यान्न के क्षेत्र में मेरा भारत आत्मनिर्भर हो सके। कृषि पर विशेष ध्यान देना होगा, क्योंकि यह अर्थव्यवस्था का आधार है। नई गहन कृषि योजनाए शुरू करनी होंगी व कृषको को अच्छे बीज तथा उर्वरक प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना होगा।

साथ ही उन्हें आधुनिक उपकरणों व साधन प्रदान कराने होंगे, ताकि एक ओर हरित क्रांति का लाभ प्राप्त किया जा सके। में चाहता हूँ की देश का औधोगिकीकरण भी हो। यह उधोगों का युग है, इस युग में राष्ट्र को संपन्नता एवं उन्नति के शिखर पर होना चाहिए।

में भारत की प्रतिरक्षा को सदृढ़ करना चाहता हू। भारत इतना शक्तिशाली राष्ट्र बन जाए की इसकी तरफ आँख उठाकर देखने की किसी शत्रु राष्ट्र की हिम्मत न हो। राष्ट्र की रक्षा व सुरक्षा को सदेव महत्व देना होंगा। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए देश को प्रतिरक्षा के आधुनिक यंत्रो से सुसज्जित करना होंगा।

क्योंकि विशव में आज सैनिक शक्ति की ही मान्यता होती है। हमनें कारगिल में यह सिद्ध कर दिया की हम किसी से कम नहीँ है। किन्तु सैन्य सर्वोच्चता तक पहुँचने के लिए हमें कठिन श्रम करना होगा।

अज्ञानता, अशिक्षा का बहिष्कार

अज्ञानता व अशिक्षा का बहिष्कार मेरी अगली प्राथमिकता होगी। लोगो को व्रहद् स्तर पर शिक्षित करना होगा, तभी प्रजातन्त्र अधिक व्यवहारिक होगा व व्यकितगत स्वतंत्रता का जनमानस में प्रसार होगा।

अमीर-गरीब भेदभाव का अंत

इसके अतिरिक्त मेरे सपनो के भारत में मैं अमीर-गरीब के मध्य के अंतर को मिटा देना चाहता हूँ। राष्ट्रिय आय को समाज के हर वर्ग में बराबर वितरित करना होगा। मेरे सपनो के भारत में सभी को रोटी, कपड़ा ओर मकान प्रदान कराना भी मेरी कोशिश होगी।

इस तक पहुचने ओर इसे पाने के लिए समाजवाद ही एकमात्र विकल्प है। उसका गम्भीरता से पालन करने पर भारत में आर्थिक समानता लाई जा सकती है। यदि इन उपायो पर पूर्ण निष्ठा के साथ कार्य हो, तो भारत की गिनती भी विशव के शीर्ष देशो में होंगी। ईश्वर मेरे स्वप्न को पूर्ण करे, ऐसी मैं पार्थना करता हु।

लिंग भेदभाव का अंत

मेरे सपनो के भारत में इस परंपरा का अंत आवश्यक है। आज भी लड़की के जन्म से पहले ही उसे मार दिया जाता है। जबकि उन्हें पता नहीं की आज की नारी वो सब कर रही है, जो एक पुरुष कर सकता है। हर क्षेत्र में वो पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है।

ऐसा कोई क्षेत्र नही जहां लड़किया अपना नाम ना कमा रही हो। परन्तु हमारे देश की बिडम्बना है की आज भी लड़की के जन्म लेने पर उसे मा के गर्भ में ही मार दिया जाता है। ये परिस्थिती इतने आधुनिक ओर वैज्ञानिक युग में आज भी देखने ओर सुनने में आती है।

ना जाने कितनी ही बेटिया इस भेदभाव के चलते बलि चढ़ चुकी है। ऐसे घटिया सोच रखने वाले व्यक्ति को मैं मेरे सपनो के भारत में कड़ी से कड़ी सजा प्रदान करुँगा। जिसके चलते ये बलि देने की परम्परा हमारे देश से खत्म हो जाये ओर मेरे सपनो के भारत में लड़के ओर लड़कियो में कोई भेदभाव ना हो।

भ्र्ष्टाचार का अंत

मेरे सपनो के भारत में भ्र्ष्टाचार जैसी कोई घिनोने कार्य नही होंगे। जहां देखो वहाँ भ्र्ष्टाचार, आज व्यक्ति डिग्रियां धारण करके भी घर में ही बैठा है, क्योंकि हमारे समाज में भाई भतीजा वाद जो लागू है। काबिल व्यक्ति बस ये सब देखकर भी कुछ नहीं कर पाता ओर भृष्टाचारी पनपता रहता है।

अपनी हुकूमत ऐसे चलाता है, जिसकी बजह से ना जाने कितने ही व्यक्ति उत्पीड़न ओर परेशान होकर अपनी जान तक दे देते है। क्योंकि ईमानदार उनके इशारो पर नहीं नाचना चाहता है। ऐसे भृष्टाचारियो को सबक सिखाना चाहिए।

आपको शायद पता ही होंगा की बहुत से विकसित देशो में भ्र्ष्टाचार बिल्कुल भी नहीँ है। वो इसलिये क्योंकि वहाँ के कानून ओर सरकार की कार्य करने की नीतियां है और ये तो पता ही है की हमारे देश भारत में भ्र्ष्टाचार दिन व दीन बड़ रहा है।

क्योंकि जब किसी नेता के हाथो भ्र्ष्टाचार होंगा वहां की जनता पीड़ित तो होंगी। साथ ही बड़े पद ओर उसका लाभ उठाने वाले अधिकारी इत्यादि अपने भृष्ट कामो से ना जाने कितने ही व्यक्ति के जीवन को ओर उनके केरियर पर काफी बड़ा आघात पहुचाते है।

जिस भी देश में भृष्टाचार होता है, उस देश का विकास सम्भव नही है। इसलिए मेरे सपनो के भारत में सख्त कानून का पालन होंगा जहां कोई भी भृष्टाचारी नहीँ होंगा।

बेरोजगारी

बेरिजगारी उसे कहते है जिसमे व्यक्ति किसी भी कीमत में काम करने को मिले उसे लेने को तैयार है और काम करने का इक्छुक है, परन्तु फिर भी उसे काम नही मिलता। अर्थात बेरोजगारी वह अवस्था है, जिसमे बहुत से योग्य व्यक्ति काम करने को तैयार होके भी उन्हें कोई काम नही मिल रहा होता।

इनमे कुछ व्यक्तियो को नहीँ जोड़ा जाता जैसे बुजुर्ग व्यक्ति, कोई बच्चा, कोई विद्यार्थी ये बेरोजगार के श्रेणी में नहीं आते। बेरोजगार उन्हें कहा जाता है जिनके पास काबलियत है, डिग्री है ओर व्यक्ति काम करने का इक्छुक भी है, फिर भी बेरोजगार है।

मेरा सपना है की मेरे सपनो के भारत में कोई बेरोजगारी से पीड़ित ना रहे, प्रत्येक व्यक्ति को कार्य मिले ओर उसे उसकी मेहनत का फल भी मिले ओर वो खुश भी रहे। यही मेरी कामना है।

मेरे सपनो के भारत की कृषि

कृषि वह क्षेत्र होता है जहां किसान अपनी मेहनत करके अनाज उत्पन्न करता है ओर इसी अनाज से हमारा और आप सभी का पेट भरता है। क्योंकि एक प्रकार से किसान हमे हमारा खाना प्रदान करता है, इसलिए इसका स्थान हमारे देश में अति महत्वपूर्ण है।

लेकिन बाबजूद इसके आज हमारे देश में किसानों की हालत बहुत खराब है। ना जाने कितने ही किसान आत्महत्या कर लेते है। किसानों की हालात को सुधारने के लिए हमारी सरकार ने बहुत सी योजनाए बनाई है, जिससे किसानों को सहायता मिलती है।

पर फिर भी ना जाने क्यों ओर क्या कारण है की जिसकी बजह से आज भी कई किसान आत्महत्या कर लेते है। इसमे उन गरीब किसानों की संख्या ज्यादा है, जिनको उनकी मेहनत के बदले कोई सुविधा नहीँ प्राप्त हो पाती है।

उनकी जगह उन लाभो का उपयोग कोई ओर कर लेता है, इसलिए हमारे देश की नीव इन किसानों पर ही टिकी है। क्योंकि ये हमे खाने के लिए अनाज देते है, इसलिए इनकी परिस्थितियों को सुधारना अतिमहत्वपूर्ण है। मेरे सपनो के भारत में कोई किसान आत्महत्या नहीं करेगा ओर गरीब से गरीब किसान खुश रहेंगा।

मेरे सपनो के भारत में समान अधिकार

हमारे देश भारत में भरतीय संविधान में सभी को दमण अधिकार प्राप्त है। ओर उसमे कहा गया है की भारत का प्रत्येक नागरिक एक समान है ओर किसी भी प्रकार से कोई भेदभाव नहीँ किया जाएगा। इसलिए विकासशील पार्टी बनाई गयी है, जिसके तहत पूरब हो या पश्चिम या, उत्तर हो या दक्षिण सभी को समान अधिकार प्राप्त होगा।

इतने नियम ओर संविधान के बाबजूद हमारे देश में भेदभाव ओर पक्षपात की नीति आज भी देखने को मिलती है। इसलिए में चाहता हूँ की मेरे देश भारत में सभी को सच में समान अधिकार मिले।

ये केवल किताबो में ही देखने को ओर पड़ने को नहीँ मिले, मेरे सपनो के भारत में सभी को समान अधिकार मिलेगा। इसके लिए कठोर कानूनों का निर्माण होगा और जहां भी भेदभाव ओर पक्षपात होगा वहाँ कड़ी से कड़ी सजा प्रदान की जाएंगी।

उपसंहार

मेरे सपनो का भारत एक ऐसा भारत होंगा, जहां कोई भेदभाव, कोई जातिवाद, कोई गरीबी, बेरोजगारी, नारियो पर अत्याचार कुछ भी नही होगा। सभी लोग खुशहाल रहेंगे। वैसे अभी कुछ समय से देखा जा रहा है की मेरे देश भारत ने वैज्ञानिक दृष्टि से काफी तरक़्क़ी की है, फिर भी अभी थोड़ी और गुंजाइश बाकी है। मेरे सपनो के भारत में सभी को समान अधिकार प्राप्त होंगा।


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तो यह था मेरे सपनो का भारत पर निबंध, आशा करता हूं कि मेरे सपनो का भारत पर हिंदी में लिखा निबंध (Hindi Essay On Mere Sapno Ka Bharat) आपको पसंद आया होगा। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा है, तो इस लेख को सभी के साथ शेयर करे।

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