लता मंगेशकर पर निबंध (Lata Mangeshkar Essay In Hindi)

आज हम लता मंगेशकर पर निबंध (Essay On Lata Mangeshkar In Hindi) लिखेंगे। लता मंगेशकर पर लिखा यह निबंध बच्चो (kids) और class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए लिखा गया है।

लता मंगेशकर पर लिखा हुआ यह निबंध (Essay On Lata Mangeshkar In Hindi) आप अपने स्कूल या फिर कॉलेज प्रोजेक्ट के लिए इस्तेमाल कर सकते है। आपको हमारे इस वेबसाइट पर और भी कही विषयो पर हिंदी में निबंध मिलेंगे, जिन्हे आप पढ़ सकते है।


लता मंगेशकर पर निबंध (Lata Mangeshkar Essay In Hindi)


प्रस्तावना

लता मंगेशकर हमारे देश भारत की सबसे अधिक आदरणीय और संगीत की मलिका है। उनके जैसे शायद ही आज तक इस धरती पर किसी ने जन्म लिया है, जो उनके जैसे जादुई आवाज का धनि होगा।

हमारे भारत देश की सुरो की धनी लता मंगेशकर जी की छबि, भारतीय सिनेमा में एक पाश्र्वगायिका के रूप में जगत विख्यात है और उनकीं उपलब्धियों से उनका कार्यकाल भरा पड़ा है।

लता मंगेशकर जी के आवाज के भारतीय उपमहादिपो के साथ पूरी दुनिया में दीवाने भरे पड़े है। ये बात जगत विख्यात है की उनके जैसी जादुई आवाज की गाइका आज तक इस धरती पर ना कोई हुई है और नाही कोई होगी।

लता मंगेशकर जी का जन्म और परवरिश

लता मंगेशकर जी का पूरा नाम कुमारी लता मंगेशकर है। इनका जन्म २८ सितंबर 1928 में इंदौर मध्य्प्रदेश में हुआ था। ये पांच भाई और बहन है, जिसमे सबसे बड़ी लता मंगेशकर जी है।

इनकी तीन बहने आशा, उषा, मीना मंगेशकर और भाई ह्रदयनाथ मंग्गेशकर है। इनके पिताजी का नाम दीनानाथ मंगेशकर है, जो रंगमंच के कुशल गायक थे। लतामंगेश्कर जी के पिताजी उन्हें पांच साल की उम्र से ही संगीत की शिक्षा पर्दान कर रहे थे।

उनके के साथ उनकी तीनो बहने आशा, उषा और मीना भी संगीत की शिक्षा ग्रहण करती थी। लता मंगेशकर जी के माँ का नाम शेवंती मंगेशकर था, जो एक गृहणी थी। लता जी को बचपन से ही संगीत में अत्यधिक रूचि थी।

लता मंगेशकर जी ने अमानत अली खान साहिब और बाद में अमानत खान के साथ पढ़ाई करि और इन्होने संगीत को ही अपनी आजीविका के रूप में चुना। लता मंगेशकर जी का जन्म भले ही इंदौर में हुआ हो, लेकिन इनकी परवरिश महाराष्ट में हुई थी।

लता मंगेशकर जी बचपन से ही गायिका बनना चाहती थी। लता जी बचपन से ही कुंदन लाल सहगल से शादी करने का कहती थी। परन्तु परिस्थिति और जीवन ने उन्हें जीवन में अकेले ही रखा।

पर उपलब्धिया जितनी उनके पास है, शायद ही किसी और के पास होंगी। पहली बार लता जी ने वसंत जोगलेकर द्वारा निर्देशित फिल्म कीर्ति हसाल के लिए गाया था। हालांकि उनके पिताजी को लता जी का फिल्मो में गाना पसंद नहीं था। इसलिए भी उनका वो गाना रिलिज भी नहीं हुआ था।

जब केवल लता जी 13 वर्ष की थी, तब उनके पिताजी का देहांत हो गया था। घर में सबसे बड़ी होने के कारण घर की सारी जिम्मेदारी उनके कंधो पे आ गयी थी। इस बजह से ही उन्होंने और उनकी बहनो ने मिलकर अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाया।

परन्तु उनके पिता के देहांत के 7 वर्ष बाद, आशा जी ने 1949 में गणपतराव भोंसले जी के साथ प्रेम विवाह कर लिया, जिससे लता जी काफी नाराज हुई और दोनों ही बहनो में दूरिया आ गयी। एक बार फिर लता जी के कंधो पर परिवार की जिम्मेदारी आ गयी। उन्होंने प्रण लिया की आजीवन विवाह नहीं करेंगी और अपने घर की परवरिश करेंगी।

हमारे देश भारत की स्वर कोकिला लता मंगेशकर

ये बात तो आप सब को पता ही होंगी की हमारे देश के लता मंगेशकर जी को उनकी मीठी आवाज के कारण भारत की स्वर कोकिला कहा जाता है। अर्थात कोयल जैसी मीठी वाणी।

लता जी उनके समय में अपनी आवाज के बलबूते बहुत बड़ी प्लेबैक सिंगर बन गयी थी। उन्होंने लगभग 30,000 गाने गाये है, वो भी 36 भाषा में गाने गाये है। उन्होंने अपने घर के पेसो की किल्ल्त की बजह से कई हिंदी और मराठी फिल्मो में काम भी किया है।

अभिनेत्री के रूप में उन्होंने पहली बार “पाहिली मंगलागौर” जो की 1942 में आई थी, उसमे स्नेहप्रभा प्रधान की छोटी बहन की भूमिका निभाई थी। बाद में उन्होंने कई फिल्मो में काम किया, जिसमे माझे बाल, चिमुकला संसार (1943), गजभाऊ (1944), बड़ी माँ (1945), जीवन यात्रा (1946), मांद (1948), छत्रपति शिवाजी (1952) यह फिल्मे शामिल थी।

बड़ी माँ में लता जी ने नूरजहाँ के साथ अभिनय किया और उनके छोटी बहन की भूमिका निभाई। उन्होंने खुद की भूमिका के लिए गाने भी गाये और आशा जी के लिए पाश्र्वगायन किया।

लता जी की आवाज के बारे में हम सब जानते ही है, मीठी आवाज की धनी लता जी के गानो ने कभी हंसाया तो कभी रुलाया। लता जी के गांनो से सीमा पर खड़े जवानो को एक सहारा मिल जाता है, जो उन्हें सिमा पर लड़ने की एक ताकत प्रदान करते है।

लता जी के गानो को बच्चे से लेकर बड़े सभी बहुत पसंद करते है। लता जी ने अपने आप को पूरी तरह से संगीत को समर्पित कर दिया है।

लता मंगेशकर जी के पुरुस्कार

लता जी को अनगिनत पुरस्कार प्राप्त हुए है, साथ ही उनके ही नाम से “लता मंगेशकर पुरस्कार ” को मध्य्प्रदेश शासन द्वारा हर साल दिया जाता है। जो की गायक, गायिका के अलावा संगीत कारो को दिया जाता है। लता मंगेशकर पुरस्कार एक राष्टीय स्तर का पुरस्कार है। जो की संगीत के क्षेत्र में काम करने के लिए दिया जाता है।

लता मंगेशकर जी को प्राप्त पुरस्कार में पद्म भूषण पुरस्कार, भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान “भारत रत्न”, नूरजहाँ पुरस्कार, महाराष्ट भूषण, राष्टीय पुरूसकार, महारष्ट सरकार पुरस्कार, दादा साहब फाल्के अवार्ड शामिल है।

इन्हे मिले पुरस्कार यही ख़त्म नहीं होते है, इन्हे राजीव गांधी अवार्ड, एन.टी.आर पुरस्कार, जी सीने का लाइफ टाइम अवार्ड, फिल्म फेयर अवार्ड, सबसे अधिक गीत गाने का गिनींज बूक अवार्ड, फिल्म फेयर लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड, स्क्रीन का लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड भी मिला है।

लता मंगेशकर जी को मिले पुरस्कार इतने है की हम सोच नहीं सकते। उन्होंने अपने जीवन में वो मुकाम हासिल कर लिया है जिसे हासिल करना आज के समय नामुनकिन सा लगता है।

उपसंहार

लता मंगेशकर जी के जैसे महान विभूतिया धरती पर बहुत कम ही जन्म लेती है। उनकी आवाज को बच्चो से लेकर बड़े सभी पसंद करते है। उन्होंने उनके जीवन में कई सुख और दुखो को देखा, लेकिन अपनी डगर से कभी नहीं हिली और आगे बढ़ती ही गयी।

उसी मेहनत और लग्न के ही चलते आज उनका नाम पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। उन्होंने देश भक्ति गीत गा कर सबको रुलाया भी है और वह गीत था “ये मेरे वतन के लोगो”। इस गाने को सुनकर प्रधान मंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू जी के आखे भी भर आई थी। ऐसा है लता जी का भावपूर्ण और मर्मस्पर्श स्वर।


तो यह था लता मंगेशकर पर निबंध (Lata Mangeshkar Essay In Hindi), आशा करता हूं कि लता मंगेशकर पर हिंदी में लिखा निबंध (Hindi Essay On Lata Mangeshkar) आपको पसंद आया होगा। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा है, तो इस लेख को सभी के साथ शेयर करे।

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