राजनीति पर हिंदी निबंध (Indian Politics Essay In Hindi)

आज हम राजनीति पर निबंध (Essay On Indian Politics In Hindi) लिखेंगे। राजनीति पर लिखा यह निबंध बच्चो (kids) और class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए लिखा गया है।

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राजनीति पर हिंदी निबंध (Indian Politics Essay In Hindi)


भारत में राजनीतिक प्रणाली, देश के नागरिकों को अपने अनुसार सरकार चुनने का अधिकार देती है। क्योंकि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, हमारे देश में जनता सरकार का निर्माण करने में अपना योगदान देती है और अगले चुनाव के दौरान सरकार से असंतुष्ट होने पर सरकार को बदलने की शक्ति रखती है।

राजनेता लोगो को सरकार के माध्यम से योजनाओ को अवगत कराते है। राष्ट्र को मज़बूत और प्रभावशाली बनाने के लिए लोगो को राजनेताओ के निर्देशों का पालन करना पड़ता है।राजनीति किसी भी सरकार का आधार होती है ।

अपने वोट बैंक के समर्थन को भरने के लिए राजनेता  विभिन्न कार्यक्रमों को अंजाम देते है। हमारे देश में कुछ ईमानदार राजनीतिक नेता हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश हमारे अधिकांश नेता भ्रष्ट हैं। भारतीय नागरिक को वोट देने के लिए 18 वर्ष या उससे अधिक होना ज़रूरी है। वोट देना सभी नागरिको का संवैधानिक अधिकार है।

राजनेताओ की भ्रष्ट मानसिकता देश की उन्नति में बाधक बनकर खड़ी है। इस भ्र्ष्ट राजनीति की वजह से देश की आम जनता पीड़ित है। आम आदमी प्रत्येक महीने हर प्रकार के टैक्स भरता है। लेकिन फिर भी सड़के और बाकी सभी मुश्किलें वैसी की वैसी है।

भ्र्ष्टाचार राजनीति का एक गंदा चेहरा बनकर और उभर कर सामने आ रहा है। आम लोगो को इसकी परख करनी होगी और सही नेताओ और राजनितिक पार्टियों का चुनाव करना होगा। देश में कुर्सी को जीतने के लिए एक राजनितिक दल दूसरे दल के खिलाफ झूठी खबर फैलाते है।

हमेशा राजनेता वोट के वक़्त भाषण देते है और अपनी पार्टी को सही और दूसरी पार्टी को हर मामले में गलत ठहराते है। वोट ज़्यादा प्राप्त करने के लिए हर राजनितिक दल अपना हथकंडा अपनाते है। आप कह सकते है, राजनेता अधिक वोट प्राप्त करने के लिए साम, दाम, दंड, भेद जैसी रणनीति का इस्तेमाल करना नहीं भूलते है।

देश को उन्नति के मार्ग पर ले जाने के लिए देशवासी कर भरते है। भ्र्ष्ट राजनेता उन मेहनत के पैसो को अपने जेब में भर लेते है। हिन्दुस्तान को आजादी के पश्चात जितना विकास करना चाहिए था, उतना विकास दुर्भाग्यवश इन भ्र्ष्ट राजनेताओ के कारण नहीं कर पाया है।

राजनेता अपने हितो और स्वार्थ के लिए, जनता के साथ छल कपट करते है। देश की अर्थव्यवस्था की दुर्दशा करने वाला प्रमुख कारक है भ्र्ष्टाचार। भ्र्ष्ट नेताओ को अपने गद्दी से अधिक प्रेम होता है। उसको बनाये रखने के लिए वे आम लोगो को मूर्ख बनाते है।

अधिकतर चुनावों में यही देखने को मिलता है। लोग ऐसे भ्र्ष्ट नेताओ को समर्थन कर बैठते है और बाद में उन्हें निराश होना पड़ता है।

भारत में दो प्रमुख राजनीतिक दल है, एक है भारतीय जनता पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस। हर राजनैतिक दल के समक्ष एक प्रतीक चिन्ह होता है, जिसे चुनाव आयोग के पास पंजीकृत होना ज़रूरी है। इन प्रतीक चिन्हो को पहचानकर अशिक्षित गरीब लोग वोट दे सकते है। भारत में राष्ट्रीय स्तर पर तीन गठबंधन है, NDA, यूपीए और तीसरा मोर्चा।

भारत की राजनितिक व्यवस्था

भारत के राष्ट्रपति हमारे देश में राज्य के प्रमुख हैं, जबकि प्रधानमंत्री सरकार के प्रमुख हैं। हमारे पास एक ऊपरी सदन है, जिसे राज्य सभा के नाम से जाना जाता है। एक निचला सदन जिसे लोकसभा के रूप में जाना जाता है। इन सदनों के सदस्यों को संसद सदस्य के रूप में जाना जाता है।

लोकसभा

लोकसभा में कुल मिलाकर 545 सदस्य हैं। देश की आम जनता द्वारा 543 लोकसभा सदस्य चुनाव के द्वारा चुने जाते हैं। देश के राष्ट्रपति, जो लोकसभा सदस्य द्वारा चुने जाते हैं। उम्मीदवार की आयु लोकसभा सदस्यता के लिए तकरीबन 25 वर्ष होना अनिवार्य है।

राज्यसभा

राज्यसभा में लगभग 245 सदस्य होते हैं। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा राज्य सभा के 233 सदस्य चुने जाते हैं। 12 सदस्यों को राष्ट्रपति के माध्यम से नामांकित किया जाता है।उम्मीदवार को राज्य सभा सदस्य बनने के लिए उनकी आयु 30 साल होनी ज़रूरी है।

देश के संसद सदस्य, राजनीतिक प्रणाली के अभिन्न अंग है। ससंद सदस्य राजनीतिक फैसले लेने की ताकत रखते है। एक निर्वाचक मंडल द्वारा राष्ट्रपति को पांच वर्ष के लिए चुना जाता है। इसमें संसद के दोनों सदनों के सदस्य और राज्यों की विधानसभाओं के सदस्य शामिल होते हैं।

भारत का राष्ट्रपति राज्य और संघ की कार्यपालिका का प्रमुख होता है। अभी भारत के राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद जी है। एक निर्वाचक मंडल द्वारा उपराष्ट्रपति का चयन किया जाता है।संसद के दोनों सदन के सदस्य इस फैसले के दौरान मौजूद होते है। अभी भारत के उपराष्ट्रपति वैंकया नायडू है।

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्री परिषद के पास कार्यकारी शक्ति रहती है। केंद्रीय मंत्रिपरिषद मंत्रियों का दल है, जिसके साथ प्रधानमंत्री काम करते है। कार्य को विभिन्न विभागों और मंत्रालयों में अलग – अलग मंत्रियों के बीच बाँट दिया जाता है।

प्रधानमंत्री केंद्रीय मंत्रिमंडल का प्रमुख होता है। वर्त्तमान में हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी है। सरकार का गठन भारत में पाँच वर्षों के लिए किया जाता है। आजकल भारत में कई राजनीतिक दल बन गए है, जिनके उमीदवार अपने दल का प्रतिनिधित्व करते हुए चुनाव में लड़ते हैं।

जिस दल को चुनाव में बहुमत मिलता है वह सत्ता में आ जाती है। लोगों द्वारा देश की सरकार देश हित की उम्मीद से बनायी जाती है। आम जनता को बहुत सारी मुश्किलें अपने दैनिक जीवन में झेलनी पड़ती है। जिसका प्रमुख कारण, हमारे देश की राजनीतिक व्यवस्था के अंदर भ्रष्टाचार है।

अधिकांश राजनीतिक नेता भ्रष्टाचार में लिप्त होते है। हमारे राजनेताओं की ऐसी मानसिकता देश हित पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है। भ्र्ष्टाचार से देश की जनता सबसे अधिक पीड़ित है। आजकल जनता पर अधिक मात्रा में कर लगाया जा रहा है।

देश को विकसित और उन्नति की तरफ ना ले जाकर, इन पैसो का इस्तेमाल भ्रष्ट नेता अपने बैंक खाते भरने के लिए करते हैं। इन्ही सब कारणों के वजह से हमे आजादी के बाद जितना विकास करना चाहिए था उतना हम नहीं कर पाए है।

राजनीति का सीधा संबंध दलीय राजनीति से भी होता है। इस प्रकार की राजनीति में विभिन्न गुट सैद्धानिक सोच का तिरस्कार करते हुए, घटिया दर्जे की राजनीति का खेल खेलते है।आधुनिक राजनीतिज्ञो के लिए राजनीति देश सेवा नहीं, बल्कि एक पैसा कमाने का पेशा है।

उनकी विचारधारा में देश सिर्फ उनके स्वार्थो को पूरा करने का एक जरिया है। दलीय राजनीति में सिर्फ दल प्रमुख होता है, ना कि देश। भोले भाले विद्यार्थी गण इन कुटिल राजनीतिज्ञों के हाथो की कटपुतली मात्र है। विद्यार्थियों के उत्साह को गलत मार्ग दिखाते है और उनकी कमज़ोरी का फायदा उठाते है।

विद्यार्थियों को आंदोलन के नाम पर थोड़ फोड़ करने के लिए उकसाते है। ऐसे विद्यार्थी अपने जिन्दगी के मार्ग में गुम हो जाते है और समाज विरोधी कार्यो के दलदल में फंस जाते है।छात्रों को बिना सोचे समझे राजनीति में भाग नहीं लेना चाहिए।

छात्रों को विद्या ग्रहण करने के साथ देश की राजनीति का सम्पूर्ण अध्ययन करना चाहिए। विद्यार्थियों को अपने मत उजागर करने चाहिए और मताधिकार का सोच समझ कर उपयोग करना चाहिए। झंडे और डंडे वाली राजनीति में नहीं कूदना चाहिए।

भारत के स्वतंत्रता के आंदोलन में भाग लेना राजनीति नहीं, बल्कि वह राष्ट्र धर्म था। राष्ट्रीय दायित्वों को निभाना विद्यार्थियों और युवा वर्ग का परम् कर्त्तव्य है। अगर कोई भी भारतीय नागरिक चाहे, तो चुनाव लड़ सकते है। उसके लिए उनकी आयु कम से कम 25 वर्ष होनी चाहिए।

भारत में सरकार के विभिन्न पदों पर चुनाव लड़ने के लिए कोई शिक्षा मानदंड नहीं है और यह सबसे बड़ी परेशानी है। भारत में कई नेता अशिक्षित है। अगर नेता ही अशिक्षित होंगे और उनके हाथों में देश को चलाने की बागडोर होगी, तो लोग क्या यह उम्मीद कर सकते है कि देश का विकास सही दिशा में होगा?

अगर आपको चुनाव में खड़े होने वाला कोई भी उम्मीदवार योग्य और उपयुक्त नहीं लगता है, तो हम NOTA का उपयोग कर सकते है। इसका मतलब है नॉन ऑफ़ दा अबोव। इस प्रणाली को निर्वाचन आयोग ने विकसित किया है, ताकि वह जान सके कि कितने प्रतिशत लोग किसी भी उम्मीदवार को वोट देने लायक नहीं समझते है।

आप भी अगर किसी भी उम्मीदवार से सहमत नही है, तो नोटा का बटन दबा सकते है। इस बटन का रंग गुलाबी होता है। पहली बार नोटा विकल्प का उपयोग 2013 में हुआ था।भारतीय निर्वाचन आयोग ने विधानसभा चुनावों में इस NOTA बटन को उपलब्ध करवाया था।

देश की उन्नति के लिए शिक्षित राजनेताओ की ज़रूरत है। अगर नेता शिक्षित होंगे, तो निश्चित तौर पर समाज और देश के सच्चे मार्ग दर्शक बनेगे। जब तक राजनितिक व्यवस्था में सुधार नहीं होगा, तब तक देश समृद्ध राष्ट्र नहीं बन पायेगा।

देश को ईमानदार और कड़ा परिश्रम करने वाले नेताओ की ज़रूरत है। हमे जागरूक नेताओ की ज़रूरत है, जो देश के सुन्दर आज और भविष्य का निर्माण कर पाए। देश की कुछ लोकप्रिय महिलाएं है, जिन्होंने सशक्त रूप से राजनीति में कदम रखा और यह साबित किया कि औरत सिर्फ घर, दफ्तर ही नहीं, बल्कि देश भी सुचारु रूप से चला सकती है।

इंदिरा गाँधी भारत में कांग्रेस की अध्यक्ष बनी और फिर देश की तीसरी प्रधानमंत्री बनी थी। वह एक मज़बूत विचारधाराओ वाली महिला थी और राजनीति में उनकी बेहद दिलचस्पी थी।पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मज़बूत इरादों वाली महिला है। उन्हें इतना आत्मविश्वास था कि 1998 में उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से अलग होकर अपने अलग संगठन का गठन किया था।

वह भारतीय तृणमूल कांग्रेस की संस्थापक है। पश्चिम बंगाल में वह बेहद प्रसिद्ध है और लोग उन्हें श्रद्धा से दीदी कहते है। जयललिता भी तमिलनाडु में प्रसिद्ध क्रांतिकारी नेता के रूप में जानी जाती है। उन्हें तमिलनाडू के लोग माँ कहकर सम्बोधित करते है।

प्रतिभा पाटिल भी राजनीति क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत रही। देश के बाहरवें राष्ट्रपति के रूप में वह कार्यरत रही। उन्होंने महज़ 27 साल की उम्र से राजनीति में कदम रखा था। उन्होंने राज्यसभा की सदस्य होने के साथ, लोकसभा के संसद सदस्य के तौर पर कार्य किया।

पुरुषो के साथ महिलाओं ने भी राजनीति क्षेत्र में अपनी भूमिका निभायी है। अच्छे राजनेता है लेकिन हमे और अधिक भले और सच्चे राजनेताओ की ज़रूरत है। समाज को उन्नति का आईना दिखाने वाले शिक्षित युवाओ की ज़रूरत है, जो नेता के पद पर अच्छे कार्य कर सके।

हमारे देश में अधिकतर नेता सत्ता में आने से पूर्व, देशवासियों से मीठे मीठे वादे करते है। जैसे ही उन्हें उनकी कुर्सी मिल जाती है, वे अपना असली रंग दिखाने लगते है। लोग राजनेताओ पर विश्वास करके और भविष्य में उनकी योजनाओ से प्रभावित होकर वोट देते है।

बदले में भ्र्ष्ट नेताओ से उन्हें धोखा मिलता है। अक्सर यह देखा गया है की नेता सत्ता में आने से पहले आम जनता से कई तरह के वादे करते हैं, परन्तु सत्ता हासिल करने के बाद उन्हें भूल जाते हैं। ऐसा हर चुनाव में होता है। गरीब जनता को हर बार भ्रष्ट नेता बेवकूफ बना जाते है।

अक्सर देश के मंत्रियों और उनके पार्टी के कार्यकर्ताओ के घोटालो में भागीदार होने के समाचार आते है और लोगो को सोचने पर मज़बूर कर देते है कि आखिर उन्होंने अपने देश अथवा राज्य के लिए गलत लोगो की पार्टी का चुनाव किया।

सत्ता में होने के कारण इन भ्र्ष्ट लोगो को सजा नहीं होती है और वे गैर कानूनी तरीके से छूट जाते है। कानून सब के लिए बराबर है और ऐसे भ्र्ष्ट नेताओ को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

कुछ देशवासी रिश्वतखोरी के लिए सिर्फ मंत्रिपरिषदो पर आरोप लगाते है। यह एक विडंबना है कि हमारे समाज में कुछ लोग खुद अपने कार्य को जल्द पूरा करने के लिए और नौकरी पाने के लिए रिश्वत का सहारा लेते है।

अगर आज देश का धन वितरण और आर्थिक व्यवस्था प्रभावित है, तो उसका पूरा श्रेय भ्र्ष्ट नेताओ को जाता है। इस प्रकार की प्रदूषित राजनीति पर अंकुश लगाना अनिवार्य है।

लोगो को एकजुट होकर देश को भ्र्ष्टाचार मुक्त कराना होगा। हमारी शक्ति, हमारी एकता है और इस एकता से हम अनैतिक राजनीति के खिलाफ आवाज़ उठा सकते है। जैसे भारतीय लोगो ने अंग्रेज़ो के खिलाफ आंदोलन छेड़कर पूरे देश को आज़ाद करवाया था। उसी प्रकार हमे देश को भ्र्ष्टाचार जैसी गन्दगी से आज़ादी दिलवानी होगी।

देश की राजनितिक व्यवस्था भ्रष्टाचार के चपेट में है। लेकिन हमे सूझ बुझ और आत्म चिंतन करने के बाद राजनितिक नेताओं का चुनाव करना चाहिए। देश की प्रगति के लिए निश्चित रूप से राजनितिक व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है।

समाज की भलाई और राष्ट्र हित के लिए सकारात्मक परिवर्तन लाने की ज़रूरत है। जब राजनितिक व्यवस्था अच्छी होगी, तो निश्चित रूप से देश भ्रष्टाचार मुक्त होगा। भ्र्ष्टाचार मुक्त देश को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। समाज के सकारात्मक बदलाव की दृष्टि से राजनितिक व्यवस्था प्रणाली को बदलना अनिवार्य है।


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तो यह था राजनीति  पर निबंध, आशा करता हूं कि राजनीति  पर हिंदी में लिखा निबंध (Hindi Essay On Indian Politics) आपको पसंद आया होगा। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा है, तो इस लेख को सभी के साथ शेयर करे।

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