भारत में लोकतंत्र पर निबंध (Indian Democracy Essay In Hindi)

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भारत में लोकतंत्र पर निबंध (Democracy Of India Essay In Hindi)


प्रस्तावना

भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतान्त्रिक देश है। लोकतंत्र का तात्पर्य है, जनता का शासन। लोक यानी जनता और तंत्र का अर्थ है शासन। ब्रिटिश शासनकाल के पश्चात जब देश को आज़ादी प्राप्त हुयी, तब भारत को लोकतान्त्रिक देश घोषित किया गया था। यहाँ प्रत्येक आदमी को वोट देने का अधिकार है।

सभी लोग समान रूप से मतदान दे सकते है। लोकतंत्र का अधिकार सबसे महत्वपूर्ण है। देश के सभी लोग सोच विचार करके अपने अनुसार मतदान देते है, जिसके आधार पर सरकार का गठन होता है। स्वतंत्रता के पश्चात देश एक लोकतान्त्रिक देश में बदल चूका है।

समस्त संसार में हमारा देश भारत सबसे बड़ा लोकतान्त्रिक देश है। इस देश में सभी लोगो के धर्म को मान्यता दी गयी है। धर्म, भेद, जाति के आधार पर किसी का भेदभाव नहीं किया जाता है। अगर ऐसा कोई भी करता है, तो यह अपराध है। संविधान के अनुसार सभी लोग एक समान है।

देश के पांच लोकतान्त्रिक स्तम्भ यानी सिद्धांत है। वह है समाजवादी, संप्रभु, धर्मनिरपेक्ष, लोकतंत्र और लोकतान्त्रिक गणराज्य।

लोकतान्त्रिक राष्ट्र का इतिहास

पुराने वक़्त में भारत में मुग़ल और मौर्य सम्राटो का शासन चलता था। तब के ज़माने में जो भी वंश जिस देश को जीत लेता था, उसी के पीढ़ियों के लोग राजगद्दी पर बैठते थे और उन्ही का शासन चलता था। पीढ़ीगत उन्ही के परिवार के लोग राज करते थे। सभी पीढ़ी के बनाये हुए नियम और कानून भिन्न थे।

उसके बाद अंग्रेज़ो और मुग़ल शासको का राज हमारे देश पर चलता था। तब जनता को कई अपमान और मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। अंग्रेज़ो ने भारतीयों को कई तकलीफें दी और उन्हें गुलाम बनाया। उसके बाद सन 1947 में देश आज़ाद हुआ और हमारा देश एक लोकतान्त्रिक देश घोषित किया गया।

संविधान और देश का प्रशासन

भारत में संविधान सन 1950 में लागू किया गया था। इस लोकतान्त्रिक देश में न्याय, मित्रता, आज़ादी और लोगो में समानता जैसे मूल्यों को महत्व दिया गया। देश की केंद्र सरकार नियम और कानूनों का निर्माण करती है। संसद, केंद्र सरकार का दायित्व होती है।

देश में लोकसभा का चुनाव केंद्र सरकार के लिए किया जाता है। संविधान द्वारा दी गयी सभी ताकतों का उपयोग केंद्र सरकार भली भाँती करती है। संसद का चुनाव हर पांच वर्ष में होता है। राज्य सरकार द्वारा देश के सभी राज्यों को शासित किआ जाता है।

देश में कुल मिलाकर 29 राज्य और 7 केंद्र शासित प्रदेश है। राजनैतिक दल  केंद्र और राज्य, आम लोगो के वोटो को प्राप्त करती है। इन वोटो से सरकार का गठन होता है। सभी राज्यों का शासन राज्यपाल और मुख्यमंत्री द्वारा किया जाता है।

देश के हर राज्य का नेतृत्व मुख्यमंत्री करते है। राज्य अथवा प्रदेश की बागडोर उनके फैसले पर निर्भर करती है। मुख्यमंत्री का कार्य बहुत महत्वपूर्ण होता है। वह राज्य की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा इत्यादि सभी क्षेत्रों की उन्नति में मुख्य भूमिका निभाते है।

मंत्रिपरिषद के प्रमुख मुख्यमंत्री होते है। देश में संसद के दो सदन होते है, लोकसभा और राज्यसभा। दोनों सदन अपने निर्धारित नियमो का पालन करती है। केंद्र और राज्य सरकार के द्वारा राष्ट्रपति का चयन किया जाता है। राज्यों का प्रमुख राष्ट्रपति होता है।

चुनाव पर्व

भारत के कई राजनितिक दल है। चुनाव के समय विभिन्न राजनितिक दल अपना प्रचार – प्रसार करते है। सारे राजनितिक दल लोगो से अपने पुराने कार्यकाल के बारे में चर्चा करते है। लोगो से देश की उन्नति के विषय में बात करते है।

वह लोगो से वादे करते है, यदि अगर वह चुनाव में जीते तो वे किस तरह देश और राज्य को प्रगति की ओर ले जाएंगे। वह किस तरह की योजनाए करेंगे जिससे देश का फायदा होगा।वह लोगो को बताते है कि वह किन क्षेत्रों में क्या काम करेंगे। देश में अगर कोई भी व्यक्ति या महिला 18  साल या उससे अधिक हो वह वोट दे सकता है। सभी देशवासी को वोट देने का पूरा हक़ है।

चुनाव के पहले सम्पूर्ण जानकारी

देश में सरकार और विभिन्न राजनितिक दल, लोगो के वोट पाने के लिए उन्हें आकर्षित करते है। हमारे देश में चुनाव के समय भाषण और चुनाव रैली आम बात है। लोगो को मतदान करने से पहले सभी राजनितिक दलों के बारे में पता होना चाहिए। मतदान सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि देशवासियों की अहम जिम्मेदारी है।

देशवासियों का कर्त्तव्य है कि वह सही नेता और सही पार्टी को वोट दे। सही राजनेता देश की तरक्की करेगा और सही फैसले लेगा। इसलिए लोगो को चुनाव से पूर्व सभी राजनितिक दलों के बारे में जानकारी होनी चाहिए। इससे उन्हें पता चलेगा कि कौन योग्य और कौन अयोग्य।

जनता को उस इंसान को वोट देना चाहिए जो योग्य हो। देश में हर पांच वर्ष में राज्य और केंद्रीय सरकार के माध्यम से चुनाव करवाया जाता है। विद्यालय और कॉलेज में विद्यार्थियों को लोकतंत्र के एहमियत को समझाने के लिए कई प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किये जाते है। लोग अपना कीमती वोट देकर अपना मनपसंद शासक चुनते है।

देश की राजनितिक पार्टियां

देश में कई राष्ट्रिय राजनितिक पार्टियां है। जैसे भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी, अखिल बहुजन समाज पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, राष्ट्रीयवादी कांग्रेस पार्टी, तृणमूल कांग्रेस पार्टी, नेशनल पीपुल्स पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी।

भारत में कई तरह के राजनितिक दल है। राजनितिक दलों को तीन समूहों में वितरित किया गया है। उनके नाम है राष्ट्रिय दल, क्षेत्रीय दल और गैर मान्यता दल। जो दल स्थानीय, राज्य और राष्ट्रिय स्तर पर चुनाव में हिस्सा लेना चाहता है, उनका नाम भारतीय निर्वाचन आयोग में पंजीकृत होना चाहिए।

जो पार्टी मान्यता प्राप्त होती है, उनका अपना चुनाव चिन्ह होता है। ऐसे राजनितिक दल अपने चुनाव का प्रचार – प्रसार रेडियो और टीवी पर करते है। उसके बाद निर्वाचान आयोग राजनीतिक पार्टियों से चुनाव के तारीखों के विषय में विचार -विमर्श करते है।

लोकतंत्र के ज़रूरी पांच सिद्धांत

संप्रभु

हमारा देश भारत और उसके सरकार की बागडोर उन्ही के हाथों में है, किसी भी विदेशी देश के ताकत के नियंत्रण में बिलकुल भी नहीं है। कोई भी देश हमारे देश के किसी भी फैसले या मामलो में हस्तक्षेप नहीं कर सकता है।

समाजवादी

देश के सभी नागरिक एक समान है। इस देश में समस्त देशवासियों को आर्थिक और समाजिक समानता दि जानी चाहिए।

धर्मनिरपेक्षता

देश में हर धर्म को मानने वाले लोग रहते है। देश सभी लोगो के धर्म और उनके विश्वास का सम्मान करता है। यहाँ सभी धर्म के लोग मिल जुलकर रहते है। सभी लोग जिस भी धर्म को चाहे उन्हें मान सकते है और चाहे तो अस्वीकार भी कर सकते है। भारत एक धर्म निरपेक्ष देश है।

लोकतंत्र

लोकतंत्र का तात्पर्य है, देश की जनता द्वारा सरकार को चुना जाना। देश के सरकार की बागडोर किस पार्टी के हाथों में होगी वह देश के नागरिक मतदान करके फैसला लेते है।

गणतंत्र

देश के स्वतंत्रता के पश्चात संविधान के नियमो की शुरुआत हुयी थी। अब पहले की तरह देश की बागडोर किसी राजा, रानी के हाथों में नहीं होगी। वंशानुगत या पीढ़ीगत शासन से देश मुक्त हुआ था। देश के शासक को लोकसभा और राज्य सभा के माध्यम से चुना जाता है। इन सभी चीज़ो का निर्णय जनता करती है।

देश में लोकतंत्र स्थापित करने के तरीके

शिक्षा को अधिक बढ़ावा देना महत्वपूर्ण है। देश में मौजूद जातिगत भेदभाव जैसी सोच को मिटाना होगा। सभी लोग शिक्षित होंगे तो सही निर्णय लेंगे और देश की उन्नति होगी। लोगो को अपने सोच को सबके आगे रखने की आज़ादी होनी चाहिए। लोगो को किसी के दबाव में आकर मतदान नहीं करना चाहिए।

देश के सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार को रोकने की भी ज़रूरत है। भ्रष्टाचार एक दीमक की तरह है जो देश की प्रगति को अंदर ही अंदर खा रही है। सरकार को भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े कानून बनाने की ज़रूरत है। भ्रष्टाचार के उन्मूलन के लिए वक़्त आ गया है कि सख्त नियम लागू किया जाए।

कई लोग मतदान देने को इतना ज़रूरी महसूस नहीं करते है। वह सोचते है, उनके एक वोट से क्या फायदा होगा। लेकिन चुनाव में हर एक वोट माईने रखता है। प्रत्येक इंसान को वोट देने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

गरीबी को उसके जड़ से उखाड़ फेंकना ज़रूरी है। देश में आर्थिक असमानता अधिक है। देश से गरीबी मिटाने के लिए कई प्रयास किये गए है और योजनाएं बनाई गयी है। अभी भी बहुत कुछ देश की सरकार को करने की ज़रूरत है।

देश के लोगो को सचेत करने की ज़रूरत है कि वह एक योग्य और सही उम्मीदवार का चयन करे। जिन सदस्यों को निर्वाचित किया गया है, उनके कार्य की देख रेख करना, एक दायित्वशील विपक्ष का गठन लोकसभा और विधानसभा में करने की ज़रूरत है।

निष्कर्ष

जब भारत को पंद्रह अगस्त 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त हुयी थी, तब भारत एक लोकतान्त्रिक देश में परिवर्तित हो गया। भारत का दुनिया भर में सम्मान किया जाता है, क्यों कि यह लोकतान्त्रिक देश है।

लेकिन अभी भी भारत की प्रगति के लिए बहुत कुछ करना बाकी है। देश को अशिक्षा और गरीबी जैसे समस्याओं से मुक्ति दिलानी होगी। जब जनता और सरकार एक साथ मिलकर कार्य करेगी तो लोकतंत्र और ज़्यादा मज़बूत बनेगा और इससे देश विकसित होगा।


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तो यह था भारत में लोकतंत्र पर निबंध, आशा करता हूं कि भारतीय लोकतंत्र पर हिंदी में लिखा निबंध (Hindi Essay On Indian Democracy) आपको पसंद आया होगा। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा है, तो इस लेख को सभी के साथ शेयर करे।

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