स्वतंत्रता दिवस पर निबंध (Independence Day Essay In Hindi)

आज के इस लेख में हम स्वतंत्रता दिवस पर निबंध (Essay On Independence Day In Hindi) लिखेंगे। स्वतंत्रता दिवस पर लिखा यह निबंध बच्चो और class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए लिखा गया है।

स्वतंत्रता दिवस पर लिखा हुआ यह निबंध (Essay On Independence Day In Hindi) आप अपने स्कूल या फिर कॉलेज प्रोजेक्ट के लिए इस्तेमाल कर सकते है। आपको हमारे इस वेबसाइट पर और भी कही विषयो पर हिंदी में निबंध मिलेंगे, जिन्हे आप पढ़ सकते है।


स्वतंत्रता दिवस पर निबंध (Independence Day Essay In Hindi)


स्वतंत्रता हर नागरिक का अधिकार है, परंतु यह भी सत्य है कि बिना आजाद देश के कोई भी नागरिक स्वतंत्र नहीं है। स्वतंत्रता का अर्थ केवल विदेशियों से अपने देश को आजाद कराना ही नहीं, बल्कि हर वह परंपरा, भेदभाव, आर्थिक गतिविधि और वह तमाम नियम, कानून से आजादी है, जिसके वजह से लोगों के ऊपर एक दबाव बना रहता है। जिससे आम नागरिक घुटन तथा असुरक्षित महसूस करता हैं।

यह स्वतंत्रता के लिए एक अधिकार की तरह काम करता हैं। भारत इतना बड़ा देश है की यह दुनिया में क्षेत्रफल की दृष्टि से सातवें स्थान पर आता है, तथा जनसंख्या की दृष्टि से देखें तो यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है।

आजादी के पहले भारत में बांग्लादेश, म्यानमार, पाकिस्तान आदि देश आया करते थे, परंतु विभाजन के बाद यह अलग-अलग देश बन गए हैं। आज हम भारत की स्वतंत्रता कैसे मिली तथा किन किन विदेशियों ने आक्रमण किया और भारत को गुलाम किया उसके बारे में इस लेख में बताएंगे। हम यह भी आपको बताएंगे कि भारत को स्वतंत्रता कैसे मिली और भारत का स्वतंत्रता दिवस कब और कैसे मनाया जाता है।

भारत का इतिहास

भारत में हर तरह के धर्म के लोग निवास करते हैं, यह एक ऐसा देश है जिसमें विविधता में भी एकता है। यह देश अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण भी एक दुनिया में अलग ही छाप छोड़ता है।

भारत की खोज पुर्तगाली वास्कोडिगामा ने की थी, जो पुर्तगाल से लेकर अफ़्रीका तक घूमते हुए भारत पहुंचा और वह कालीकट बंदरगाह पर आ पहुंचा। उसने भारत की वैभव गाथा और समृद्धि देखी और वह आश्चर्यचकित रह गया।

वास्कोडिगामा ने भारत के साथ व्यापार संबंध स्थापित किया, तब भारत में पाकिस्तान, म्यानमार, बांग्लादेश आदि देश सम्मिलित थे। यदि हम और इतिहास में जाए तो मौर्य साम्राज्य से लेकर मुगल साम्राज्य तक भारत एक विशाल उपमहाद्वीप हुआ करता था।

18 वीं सदी में ईस्ट इंडिया कंपनी के द्वारा अंग्रेजों का आगमन हुआ, बाद में धीरे-धीरे ब्रिटिश साम्राज्य ने पूरे भारत पर अपना कब्जा जमा लिया। जिससे भारतीय जनता काफी परेशान और चिंता करने लगी और देश में कई प्रकार की समस्याएं आने लगी।

स्वतंत्रता से पहले का भारत

वैसे तो भारत अपने समय में सोने की चिड़िया के नाम से जाना जाता था। परंतु ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत पर अपना कब्जा जमाना चालू कर दिया और भारत के शाही परिवारों को आपस में ही लड़ाना चालू कर दिया।

जिससे भारत के लोग आपस में लड़ बैठे। इसका फायदा उठाकर ब्रिटिश साम्राज्य उन लोगों से धन एकत्र कर ब्रिटेन भेजने लगे। इस दौर को मुगल साम्राज्य का पतन और ब्रिटिश साम्राज्य का नया सवेरा के रूप में देखा जाने लगा। भारत पर अंग्रेजों ने कई प्रकार के कानून बनाए और कई प्रकार के कानूनों के माध्यम से अत्याचार कीए।

मुगल साम्राज्य अपने आप में एक वैभवशाली साम्राज्य हुआ करता था। जो अफगानिस्तान के रास्ते से भारत पहुंचा, भारत पहुंचते ही मुगल साम्राज्य ने देखा कि हिंदुस्तान अमीर देश में से एक है।

जहां पर बड़े आसानी से शासन किया जा सकता है, क्योंकि हिंदुस्तान के लोगों के दिल बहुत नरम और मेहमानों को भगवान का दर्जा देने वाले थे। इसी लिए भारत के लोगों की यह एक कमजोरी बन गई और इसका फायदा विदेशी आक्रमणकारियों ने उठाया।

ब्रिटिश साम्राज्य के भारत में 200 साल

ब्रिटिश साम्राज्य ने भारत पर 200 साल तक राज किया। यह एक ऐसा दौर था जहा हिंदुस्तान आधुनिक भारत की ओर तो बढ़ रहा था प.रंतु शासन करने की सारी ताकत इंग्लैंड में बैठी महारानी विक्टोरिया के हाथ में थी।

भारत का सारा राजकोट तथा प्रशासनिक कार्य ब्रिटेन के संसद भवन से चला करता था। महारानी विक्टोरिया अपने मन मुताबिक भारत में कहीं पर भी अपने कर्मचारियों को भेज सकती थी और किसी भी तरह का कार्य करवा सकती थी।

18 सदी की बात करें तो महारानी विक्टोरिया का ब्रिटिश साम्राज्य लगभग पूरी दुनिया पर कायम था। उन्होंने जितने देशों पर राज किया है उन देशों का एक समूह बनाया, जिसे हम कॉमनवेल्थ कहते हैं।

हम एक दृष्टि से देखें तो ब्रिटिश साम्राज्य की कुछ अच्छी बातें भी थी। जैसे संचार, सेवाएं, तालाब, संस्था, रेलवे, डाकघर, स्कूल, सिविल सर्विस आदि जैसे महत्वपूर्ण कार्य भी किए थे। पर उनका अत्याचार और लोगों का शोषण इन सारी अच्छाइयों से ऊपर था।

स्वतंत्र भारत के लिए आंदोलन

जब भी पाप दुनिया में बढ़ता गया है, तब तक उसके विनाश के लिए कोई ना कोई ऐसा व्यक्ति आया है। जिन्होंने पाप करने वाले व्यक्ति को पराजित किया है। उसी तरह भारत एक ऐसा पवित्र देश है जिसके स्वतंत्रता के लिए किसी भी धर्म जाति परिवेश के लोग सब एक साथ आकर भारत को स्वतंत्र करने के लिए एकजुट हो गए।

भारत की स्वतंत्रता की कहानी 10 मई 1857 की क्रांति झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के द्वारा शुरू की गयी है। यह माना जाता है कि स्वतंत्रता की पहली लड़ाई महारानी लक्ष्मीबाई द्वारा शुरू की गई।

स्वतंत्रता की लड़ाई में लक्ष्मी बाई के साथ-साथ रानी दुर्गावती, झलकारी बाई न जाने ऐसी कितनी महिलाएं जो भारत को आजाद करने के लिए वीरगति को प्राप्त हो गयी। जब हम आधुनिक भारत की ओर कदम रख रहे थे।

तब से एक ऐसे व्यक्ति का नाम हमेशा लिया जाता था, जिन्हें हम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कहते हैं। पूर्ण स्वराज्य की घोषणा 1929 लाहौर सत्र में की गई थी, यह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन था।

महात्मा गांधी, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह आदि महापुरुषों ने हिंदुस्तान को आजाद कराने के लिए कई ऐसे आंदोलन चलाएं और अंग्रेजों की नाक में दम करते रहे। महात्मा गांधी के नेतृत्व में सविनय अवज्ञा आंदोलन, दांडी यात्रा, भारत छोड़ो आंदोलन आदि आंदोलन चलाए गए।

जिससे अंग्रेजों की नियुक्त अकेली हो गई थी, ब्रिटिश साम्राज्य की आखिरी वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन द्वारा भारत की सत्ता हिंदुस्तान को सौंप दी गई। परंतु हिंदुस्तान और पाकिस्तान को अलग अलग रहने की सलाह भी दी।

वास्तविकता में लॉर्ड माउंटबेटन भारत को जाते-जाते भी धर्म के अनुसार विभाजित करने का षड्यंत्र बना कर गए थे। भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 और ऐसे कई अधिनियम लगातार आते रहे, जिसमें भारत को कई तरह से मजबूत भी किया और कमजोर भी किया।

भारत और पाकिस्तान का बंटवारा

भारत को स्वतंत्र करने के लिए हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध जैसे सारे धर्म एक साथ आकर हिंदुस्तान को अलग कर दिए। कहा जाता है कि मोहम्मद अली जिन्ना और पंडित नेहरू के बीच में अनबन हुआ करती थी।

मोहम्मद अली जिन्ना मुसलमानों के सबसे बड़े नेता थे, जो भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बनना चाहते थे। परंतु महात्मा गांधी, पंडित नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल में से पंडित नेहरू भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने।

मोहम्मद अली जिन्ना को यह बात अच्छी नहीं लगी और वह पाकिस्तान को अलग करने के लिए जोर देने लगे। वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने भारत के पहले गवर्नर जनरल के रूप में पद संभाला और उन्हीं के नेतृत्व में भारत और पाकिस्तान को अलग कर दिया गया।

लॉर्ड माउंटबेटन ने जो अधिकार पत्र हिंदुस्तान और पाकिस्तान के सामने रखा। उसमें लिखा था कि किसी भी प्रकार के सांप्रदायिक दंगों को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा और कोई भी हिंदू या मुस्लिम अपने पसंदीदा देश में रहने के लिए जा सकता है।

पाकिस्तान एक मुस्लिम राष्ट्र चाहता था, उन्होंने जिन्ना के कहे अनुसार पाकिस्तान को मुस्लिम राज और मुस्लिम लीग के द्वारा निर्वाचित एक अलग पाकिस्तान बना दिया। 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान का जन्म हुआ, जो दुनिया के नक्शे में कहीं नहीं था।

देश के प्रथम प्रधानमंत्री मोहम्मद अली जिन्ना बने और दूसरे ही रात 12:00 बजे 15 अगस्त 1947 भारत को स्वतंत्रता मिली यह तारीख भारत के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों से लिखी गई है। मध्य रात्रि में दुनिया में भारत ने एक राष्ट्र के रूप में जन्म लिया, जो एक स्वतंत्र राष्ट्र था। भारत इसे स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाने लगे।

स्वतंत्र भारत का संविधान

भारत का सबसे मजबूत हिस्सा भारत का लचीला और आकर्षक संविधान है। इस संविधान को बनाने के लिए डॉक्टर भीमराव अंबेडकर तथा उनकी टीम ने मिलकर भारत का और दुनिया के सबसे बड़े संविधान का निर्माण किया था।

संविधान सभा के अस्थाई अध्यक्ष के रूप में सच्चिदानंद सिन्हा ने शपथ ली, परंतु जल्द ही भारत के प्रथम अध्यक्ष और राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद को नियुक्त किया गया। महात्मा गांधी तथा पंडित नेहरू के परामर्श से भारत एक नए दिशा की ओर बढ़ रहा था।

परंतु मौजूदा हालात को देखते हुए ऐसे कई निर्णय लेने में भारत असमर्थ रहा, क्योंकि उस समय भुखमरी अशिक्षित जैसे बड़ी बीमारियां भारत को चारों ओर से घेर चुकी थी। एक महान देश को चलाने के लिए प्रधानमंत्री की आवश्यकता होती है।

प्रधानमंत्री की नियुक्ति के लिए महात्मा गांधी जी का सहयोग अति आवश्यक हुआ करता था। उस समय सरदार व्ल्लभ भाई पटेल और पंडित नेहरू के बीच में किसी एक को प्रधानमंत्री बनना था।

जब प्रधानमंत्री के लिए वोटिंग चालू हुई, तो सबसे ज्यादा वोट सरदार वल्लभभाई पटेल को मिले, परंतु महात्मा गांधी के निर्णय के अनुसार जवाहरलाल नेहरू को देश का प्रथम प्रधानमंत्री बनाया गया। और हमारा देश आधुनिक भारत बनने के लिए निकल पड़ा।

स्वतंत्र भारत का रूप

जब भारत को स्वतंत्रता मिली तब भारत में नाहीं खाने को भोजन था और ना ही पहनने को कपड़े, हमारे देश के सामने एक नई चुनौती थी। लगभग 36 करोड़ जनसंख्या थी, इतनी बड़ी जनसंख्या का पालन पोषण करना एक अलग ही चुनौती बन गई।

परंतु देश को ऐसे प्रधानमंत्री मिले जिन्होंने निरंतर अपने प्रयासों से देश वासियो को भुखमरी और बीमारियों से बचाया। उन्होंने मेडिकल कॉलेज, आई आई टी, आई आई एम, इसरो, मौसम विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण संस्थाएं चालू किए और भारत को एक शिक्षित भारत बनाने के लिए कार्य करते रहें।

जब किसानों के सामने सूखा पड़ा तो पंडित नेहरू ने तालाबों और नदियों के माध्यम से महलों का निर्माण किया और सूखे खेतों तक पानी पहुंचाया। जैसे-जैसे वक्त बीतता रहा वैसे वैसे भारत को एक से बढ़कर एक प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति मिलते रहे।

अपने भारत को एक विकासशील देश बनाया और आज हम यहां आशा कर सकते हैं, कि हमारी पीढ़ी स्वतंत्रता को हमेशा याद रखेंगी, जिसके लिए हमारे असंग पूर्वजों और स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना खून देकर एक सफल भारत बनाया।

स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री का संबोधन

जब से भारत आजाद हुआ है तब से हर प्रधानमंत्री अपने देश के नागरिकों को संबोधित करते है। यह संबोधन का कार्य बड़े ही हर्षोल्लास से किया जाता है। इसे एक पर्व के रूप में लोग मनाते हैं।

इस बात का ध्यान भी रखा जाता है कि स्वतंत्रता दिवस के माध्यम से शहीद हुए जवानों को भी याद किया जाये, प्रधानमंत्री हर साल दिल्ली के लाल किले की प्राचीर से भारत की जनता को संबोधित करते हैं। प्रधानमंत्री अपने संबोधन में साल भर में किए गए कार्यों का उल्लेख करते हैं।

यह सारा कार्यक्रम प्रधानमंत्री के अगुवाई में किया जाता है। प्रधानमंत्री और उनके मंत्री गण मंत्रालय में ध्वजारोहण करते हैं। सबसे पहले दिल्ली के लाल किले के प्राचीर से देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा भारतीय नागरिकों को संबोधित किया गया था।

उनका कार्यकाल लगभग 16 वर्ष का था। उसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री देश के दूसरे प्रधानमंत्री बने तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी अब तक 6 बार संबोधित कर चुके हैं।

स्वतंत्रता दिवस पर होने वाले कार्यक्रम

स्वतंत्रता दिवस पर होने वाली चहल-पहल पूरे देश में रहती है। इसका सबसे ज्यादा असर दिल्ली जो भारत की राजधानी है वहां रहता है। संसद भवन से लेकर लालकिले तक और राष्ट्रपति भवन तक समस्त जगह ध्वजारोहण किया जाता है।

राष्ट्रपति अपने राष्ट्र भवन में होने वाले कार्यक्रम के प्रमुख रहते हैं, उस दिन राष्ट्रपति दिल्ली के लाल किले में नहीं जाते हैं। वहां के समस्त कार्यक्रम का नेतृत्व केवल प्रधानमंत्री ही करते हैं।

यदि हम स्कूल, कॉलेज की बात करें तो यहां पर रंगारंग कार्यक्रम भी किए जाते हैं। जिसमें संगीत डांस नाटक आदि के द्वारा लोग अपनी भावनाएं एवं देश के प्रति प्रेम जाहिर करते हैं। स्वतंत्रता दिवस पर हर शहर गांव में देश प्रेम के गाने सुनाई देते हैं।

वक्त के हिसाब से स्वतंत्रता दिवस मनाने के तरीको में भी बहुत बदलाव आया है। इस दिन रैलियों के माध्यम से स्कूली बच्चे शहर में लोगों को स्वतंत्रता दिवस के प्रति जागरूक करते हैं, बच्चे इसमें बढ़-चढ़कर भाग भी लेते हैं।

स्वतंत्र दिवस पर शहीद जवानों की याद

इस दिन जितने भी शहरों या गांव में जवान अपने देश की रक्षा के लिए गए और वह शहीद हो गए, उन्हें इस दिन जरूर याद किया जाता है। उन सभी जवानों के लिए एक अलग ही लम्हा बनाने की कोशिश की जाती है।

सबसे पहले देश के प्रधानमंत्री लगभग 7:00 बजे दिल्ली गेट पर जाते हैं। उनकी अगुवाई के लिए केंद्रीय रक्षा मंत्री, थल सेना प्रमुख, जल सेना प्रमुख, वायु सेना प्रमुख तथा राज्य केंद्रीय रक्षा मंत्री अगवानी के लिए रहते हैं। इंडिया गेट में एक उल्टी राइफल के ऊपर हेलमेट रखा हुआ है। जिसे शहीद जवानों की याद में पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा बनाया गया था।

इस इंडिया गेट में शहीद जवानों के नाम लिखे हुए हैं, इसीलिए स्वतंत्रता दिवस पर सबसे बड़ा आकर्षण का केंद्र इंडिया गेट होता है। यहां पर प्रधानमंत्री शहीद जवानों को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं और इस तरह से देश के कोने कोने में शहीद जवानों को याद किया जाता है।


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आशा करता हूं मेरे द्वारा दी गई जानकारी से आप संतुष्ट होंगे। इस लेख का उद्देश्य भारत को स्वतंत्रता कैसे मिली तथा किन विदेशियों ने भारत पर शासन किया इसके बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी देना है।

तो यह था स्वतंत्रता दिवस पर निबंध, आशा करता हूं कि स्वतंत्रता दिवस पर हिंदी में लिखा निबंध (Hindi Essay On Independence Day) आपको पसंद आया होगा। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा है, तो इस लेख को सभी के साथ शेयर करे।

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