हनुमान जयंती पर निबंध (Hanuman Jayanti Essay In Hindi)

आज हम हनुमान जयंती पर निबंध (Essay On Hanuman Jayanti In Hindi) लिखेंगे। हनुमान जयंती पर लिखा यह निबंध बच्चो (kids) और class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए लिखा गया है।

हनुमान जयंती पर लिखा हुआ यह निबंध (Essay On Hanuman Jayanti In Hindi) आप अपने स्कूल या फिर कॉलेज प्रोजेक्ट के लिए इस्तेमाल कर सकते है। आपको हमारे इस वेबसाइट पर और भी कही विषयो पर हिंदी में निबंध मिलेंगे, जिन्हे आप पढ़ सकते है।


हनुमान जयंती पर निबंध (Hanuman Jayanti Essay In Hindi)


प्रस्तावना

हनुमान जी का नाम आते ही हमारे सामने हनुमान जी की जो छबि आती है, वो श्री राम जी के सबसे बड़े बलशाली, ताकतवर भक्त के रूप में आती है। हनुमान जी हमारे देश भारत के सबसे बड़े महाकाव्य रामायण में सर्वप्रथम आता है।

कुछ लोगो के विचारानुसार हनुमान जी शिवजी के 11 वे रूद्रावतार है, जो सबसे बलवान ओर बुद्धिमान माने जाते है। माना जाता है कि हनुमान जी का जन्म श्री राम जी की सहायता करने के लिए हुआ था।

हनुमान जी की ताकत और उनकी बुद्धि की अनेकों कहानियां प्रचलित है। कहते भी है कि कलयुग में कोई ईश्वर अगर इस धरती पर है, तो वो है केवल श्री राम भक्त हनुमान जी। उन्हें वायुपुत्र कहा जाता है, क्योंकि उनका वेग वायु से भी तेज है और कहा जाता है की वो वायु देव के पुत्र है।

हनुमान जी के भक्त बल, बुद्धि की कामना उनसे करते है। हनुमान जी का नाम लेते ही सभी दुख दूर हो जाते है। उनका नाम सुनने मात्र से ही सभी बुरी शक्तिया दूर भाग जाती है।कहते है कलयुग में सिर्फ हनुमान जी ही है, जो सशरीर विधमान है और जब तक श्री राम जी का नाम इस धरती पर रहेगा, तब तक श्री राम भक्त हनुमान जी भी रहेंगे।

हनुमान जी का जन्म

ऋषि मुनी या ज्योतिषियों की सटीक गणना के अनुसार हनुमान जी का जन्म 58 हजार 112 वर्ष पहले हुआ था। मान्यताओं के अनुसार त्रेतायुग के आखरी चरण में, चेत्र पूर्णिमा को मंगलवार के दिन, चित्रा नक्षत्र व मेष लग्न के योग में, सुबह 6.03 बजे भारत देश मे झारखंड के गुमला जिले के आंजन नाम की छोटे से पहाड़ी गांव की एक गुफा में हनुमान जी का जन्म हुआ था।

उनके जन्म की ये जानकारी कई ज्योतिषयों के गणना नुसार है, जो सटीक गणना है। परंतु उनके जन्म को लेकर कुछ भी निश्चित नही माना जाता है। ऐसा कहा जाता है, क्योंकि मध्यप्रदेश के आदिवासी इलाके के लोगो का कहना है की हनुमान जी का जन्म मध्यप्रदेश में हुआ।

जबकि कर्नाटक के रहने वालो कि ये धारणा है कि हनुमान जी कर्नाटक में पैदा हुए थे। पम्पा ओर किष्किंधा के ध्वंसावशेष अब भी हम्पी में देखे जा सकते है। फादर कामिल बुल्के ने लिखा है कि हनुमान जी वानर पंथ में पैदा हुए थे।

इस प्रकार हनुमान जी के जन्म को लेकर कई तरह की मान्यताएं है, परंतु उनकी शक्ति को कोई भी नकार नहीँ सकता। कहा जाता है कि जिसने हनुमान जी का नाम लिया उसने अपने जीवन वो सब पा लिया जो वो चाहता है।

हनुमान जयंती कब मनाई जाती है?

हमारे देश मे कई तरह के त्योहार आते है। उनमें हनुमान जयंती का त्योहार भी एक महत्वपूर्ण त्योहार है। इस त्यौहार को हम सभी हनुमान जी के जन्मदिवस के रूप में मनाते है। यह त्योहार चेत्र माह में मार्च-अप्रेल के महिने में मनाया जाता है।

जबकि केरल और तमिलनाडु में हनुमान जयंती दिसम्बर जनवरी में मनाया जाता है। इस दीन हनुमान जी के भक्त सुर्यउदय से पहले ही उठकर मंदिरों में स्नान आदि करके एकत्रीत हो जाते है।

फिर आरती, पूजापाठ आदि होता है। हनुमान जी की आध्यात्मिक स्मृतियों ओर उनकी बुराई पर अच्छाई की जीत की रामकथा सुनाई जाती है। इस दिन, दिन भर ही हनुमान जी के भक्तों का मंदिर में आना जाना लगा रहता है। सभी भक्त अपने दुखों को दूर करने की कामना हनुमान जी से करते है और बल, बुद्धि की कामना करते है।

हनुमान जयंती कैसे मनाई जाती है?

हनुमान जी के भक्त पूरे भारत देश मे अनन्य है। इस दिन हनुमान जी के भक्त सुबह प्रातःकाल स्नान आदि करके हनुमान जी की पूजा अर्चना करते है। इस दिन भक्त पूरे दिन व्रत रखते है। उत्तर भारत मे हर एक किलोमीटर पर हनुमान जी का एक मंदिर दिखाई पड़ ही जाता है।

मंदिर छोटे हो या बड़े हर जगह उनके भक्त दिखाई पड़ ही जाते है। हनुमान जयंती पूरे रीतिरिवाज ओर परम्परा के अनुसार मनाते है। इस दिन हनुमान जी की मूर्ति को सिंदूर, फूल और आम के पत्तों से सजाया जाता है।

इस दिन लोग उत्साह के साथ इस त्योहार को मनाते है। फल, मिठाई आदि प्रसाद के रूप में चढ़ाते है। जिसको प्रसाद के रूप में ही भक्तजन को वितरित किया जाता है। इस दिन हनुमान चालीसा का पाठ पड़ते भक्तगण दिखाई देते है। साथ ही सायंकाल से सुंदरकांड की शुरुआत होती है और किसी – किसी मंदिर में तो पूरी रात इस पाठ का मंचन होता है।

हनुमान जयंती के दिन भण्डारे का आयोजन भी किया जाता है। इस भण्डारे में सभी का स्वागत होता है। जिसमे छोटे- बड़े या जात पात का कोई महत्व नहीं रहता ओर भण्डारे के साथ ही कही भक्तों को रोककर उन्हें प्रसाद और शर्बत आदि प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है।

इस दीन या प्रत्येक दिन हनुमान जी के मंदिर के दरवाजे सभी के लिए हमेशा ही खुले रहते है। इंसान भले ही आपस मे भेदभाव रखे, परंतु भगवान जी की नजरों में सब बराबर होते है और उनकी उपासना से मनुष्य हमेशा एक अच्छा इंसान ओर साहस, बल, बुद्धि का आशिर्वाद प्राप्त करता है।

हनुमान जी को भक्तगण अच्छे और बुरे दोनों ही समय मे याद करते है। उन्हें हिन्दू धर्म मे सबसे शक्तिशाली देवता के रूप में जाना जाता है। हनुमान जी संकटमोचन श्री बजरंगबली के नाम से पूरी दुनिया मे विख्यात है।

हनुमान जी का नाम हनुमान कैसे पड़ा?

हनुमान जी जब छोटे थे, तो बहुत नटखट थे। बजरंगबली नाम उनका उनके पिता केसरी जी ने रखा था। एक बार की बात है कि हनुमान जी को बहुत भूख लग रही थी और उनकी माँ अंजना उनके लिए भोजन ला ही रही थी, कि उन्होंने खेल खेल में ही सूर्य भगवान को फल के जैसा समझ कर उन्हें ही खाने के लिए अपने मुंह मे रख लिया।

ऐसा होने से उनकी माँ अंजना परेशान हो गयी। सूर्य देव को मुँह में रखने से चारों ओर अंधकार छा गया ओर इस बात की खबर जब स्वर्ग के राजा देवराज इंद्र को पता चली तो उन्हें बहुत गुस्सा आ गया।

गुस्से में ही उन्होंने अपने वज्र से हनुमान जी की ठोड़ी पर प्रहार किया, जिसकी बजह से वो टूट गयी ओर हनुमान जी वही मूर्छित हो कर गिर गए। जब यह बात पवन देव को पता चली, तो उन्होंने धरती के वायु का संचार रोक दिया।

समस्त संसार बिना वायु के विचलित हो उठा। तब ब्रह्मा जी ने आकर बालक मारुति को पुनःजिवित किया और वायुदेव को अनुरोध किया कि वो वायु का पुनः संचार करें, अन्यथा समस्त संसार मृतु को प्राप्त हो जायेगा।

सबके आग्रह करने पर वायु देव मान गए। तब वायुदेव के साथ बाकि समस्त देवताओं ने उन्हें वरदान दिये। साथ ही ब्रह्मादेव सहित अन्य देवताओं ने उन्हें हनु अर्थात ठुड्डी पर चोट लगने के कारण हनुमान नाम दिया। ठोड़ी को संस्कृत में हनु कहते है और तब से बजरंगबली का नाम हनुमान पड़ा।

हनुमान जी के नाम

हमारे धार्मिक पुस्तकों में सभी देवी देवताओं के 108 नाम बताए गए है। ओर सभी देवी देवताओं के 108 नाम महत्वपूर्ण होते है। उसी प्रकार हनुमान जी के भी 108 नाम है। कहा जाता है कि मंगलवार का दिन हनुमान जी का विशेष दिन होता है, क्योंकि इसी दिन हनुमान जी का जन्म हुआ था। जिसे हम हनुमान जयंती के रूप में मनाते है।

हनुमान जी की पूजा अर्चना करने से सभी तरह के कष्ट दूर होते है, क्योंकि हनुमान जी को संकटमोचन हनुमान कहा जाता है। कहा जाता है कि मंगलवार के दिन अगर हमने हनुमान जी के 108 नाम का जाप किया, तो अच्छी नींद आती है, परेशानियों से निजात मिलती है और कोई भी डर या बाधा या बुरे सपनो से मुक्ति मिलती है।

हनुमान जी भी अपने भक्तों को कष्ठ ओर दुखी नहीं देख सकते, इसलिए हनुमान जी की उपासना करने से हनुमान जी जल्द ही प्रसन्न हो जाते है और उनके भक्तों के दुख दूर करते है।

रामलीला मे हनुमान जी की महत्वपूर्ण भूमिका 

हम सब बचपन से ही देखते ओर सुनते आ रहे है जब भी नवरात्र शुरू होती है। रामलीला का मंचन भी शुरू हो जाता है और कई जगह पर रामलीला की मंडली रामायण का जीवंत मंचन करते है।

रामलीला में भगवान श्री राम के जीवन की हर घटनाओं को दर्शया जाता है। जब भी कही रामलीला का प्रदर्शन हो वहां हनुमान जी का नाम ना आये ऐसा तो होही नहीँ सकता। क्योंकि पूरी रामायण में हनुमान जी का महत्व अत्यधिक है। जो कि राम जी के सबसे बड़े भक्त के रूप में दिखाई पड़ते है।

साथ ही वानर सेना के महत्व का भी पता चलता है। जब रामलीला में जय श्री राम का नाम आता है, तो उस वक्त बच्चों से लेकर बड़े सभी खुशी से जय श्री राम का आगाज़ करते है।क्योंकि राम जी की उपासना के साथ हनुमान जी की उपासना का वरदान हनुमान जी को प्राप्त हुआ है। तो चलिए कहते है जय श्री राम।  

उपसंहार

हनुमान जयंती के दिन ही नही अपितु हर दिन हनुमान जी के प्रत्येक मंदिर में, चाहे वो देश दुनिया मे किसी भी कोने में ही क्यों ना हो, उनकी उपासना को भक्तगण महत्वपूर्ण स्थान देते है। कहते है की जब तक राम जी का नाम इस पृथ्वी पर रहेंगा, तब तक हनुमान जी का नाम भी रहेगा। राम जी जँहा वँहा हनुमान जी भी रहेंगे और ये वरदान स्वयं राम जी ने हनुमान जी को दिया था।

हनुमान जी साक्षात इस धरती पर विराजमान है, इसलिए हनुमान जी की जयंती वाले दिन ही नही बल्कि बाकि दिन भी उनकी उपासना बड़े जोर शोर से की जाती है। उनकी उपासना ऐसी करि जाती है कि ऐसा अनुभव होता है, जैसे साक्षात हनुमान जी अपने भक्तों के दुख और तकलीफों को दूर करने के लिए स्वयं पधारते है।


तो यह था हनुमान जयंती पर निबंध (Hanuman Jayanti Essay In Hindi), आशा करता हूं कि हनुमान जयंती पर हिंदी में लिखा निबंध (Hindi Essay On Hanuman Jayanti) आपको पसंद आया होगा। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा है, तो इस लेख को सभी के साथ शेयर करे।

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