जी एस टी पर निबंध (GST Essay In Hindi)

आज हम जी एस टी पर निबंध (Essay On GST In Hindi) लिखेंगे। जी एस टी पर लिखा यह निबंध बच्चो (kids) और class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए लिखा गया है।

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जी एस टी पर निबंध (GST Essay In Hindi)


प्रस्तावना

जीएसटी का अर्थ है गुड्स और सर्विस टैक्स। यह एक वस्तु और सेवा कर है। गुड्स का अर्थ है सामान, यानी टीवी, बेड, कपड़े  इत्यादि। कई प्रकार की सेवाएं जिन पर टैक्स लगता है, वह है मोबाइल नेटवर्क, बैंकिंग इत्यादि।

कर दो प्रकार के होते है जो है डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स, अर्थात प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर। देश में डायरेक्ट टैक्स वह भरते है, जो नौकरी करते है। अप्रत्यक्ष कर यानी इनडायरेक्ट टैक्स सभी लोगो को सामान और सेवाओं के लिए देना पड़ता है।

सभी लोग खरीदारी और सेवाओं का इस्तेमाल करते है। इसके अनुसार यह कर यानी टैक्स उन्हें भुगतान करना होता है। इस कर का कार्यान्वयन भारत में एक जुलाई साल 2017 में हुआ है।

इस कर का संग्रह उपभोग की दृष्टि से होता है। यह पिछले करों की तरह मूल बिंदु से संग्रह के विपरीत है। इसके अलावा, उत्पादन प्रक्रिया में यह कर लागू होता है। रिफंड उत्पादन के विभिन्न चरणों में सभी पक्षों के लिए है।

जीएसटी में लगभग सभी अप्रत्यक्ष कर शामिल हैं। जीएसटी एक ऐसा कर है जो हर मूल्य पर जोड़ा जाता है। यह एक व्यापक और बहु -स्तरीय कर यानी मल्टीलेवल टैक्स है। यह एक ऐसा कर है जो देश में हर सामान और सेवाओं यानी सर्विसेस पर लगाया जाता है।

इस कर को देश के सभी बाज़ारो में मान्यता दी गयी है। यह जीएसटी टैक्स दरअसल निर्धारित वस्तुओं और सर्विसेज को टैक्स विभागों जैसे 0  प्रतिशत, पांच प्रतिशत, बारह प्रतिशत, अठारह प्रतिशत और अट्ठाईस प्रतिशत में वितरित किया गया है।

पूरे देश में जीएसटी एक समान कर व्यवस्था है, जो देश को एक बड़ा बाजार बनाता है। देश में प्रत्यक्ष कर जैसे आयकर, कॉर्पोरेट कर आदि जीएसटी से प्रभावित नहीं हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री और राज्य वित्त मंत्री भी सारे नियमो का अनुकरण करते हुए जीएसटी करो के दरों को निर्धारित करते है। देश में वस्तुओं और सेवाओं पर कर के साथ विदेशो से माल के आयात  पर सम्पूर्ण देश में एक जैसा कर लगाया जाता है।

जीएसटी की सरल शब्दों में परिभाषा

कोई भी उत्पाद या वस्तु निर्माण के आरम्भ से लेकर अंतिम चरण तक कई तरह के दौर से गुजरती है। वह सारे चरणों को विषय में समझना ज़रूरी है। पहला चरण होता है, उत्पाद को  बनाने के लिए कच्चे माल को खरीदना। दूसरे चरण में उत्पादों का निर्माण होता है।

तीसरे चरण में उत्पादों का भण्डारण यानी स्टोरेज का प्रबंध किया जाता है। चौथे चरण प्रोडक्ट रिटेलर के समक्ष जाता है। आखरी चरण में रिटेलर ग्राहकों को शेष माल बेचता है।

कर दरों को जीएसटी परिषद् नियमो के संग तैयार करता है। केंद्र और राज्य दोनों के माध्यम से कई अप्रत्यक्ष करो का स्थान जी एस टी लेता है। इसका नतीजा यह होता है कि कर का दबाव कम हो जाता है। कर यानी टैक्स का कैस्केडिंग खत्म हो जाता है।

ज़्यादातर कर GST से पहले 26/5 प्रतिशत कर के अंतर्गत आते थे। जीएसटी आने के पश्चात अठारह फीसदी कर के अंतर्गत, यानी लिमिट में आता है। कैस्केडिंग कर प्रभाव का तात्पर्य कर पर कर से है। जीएसटी टैक्स इन व्यापक प्रभावों को समाप्त करता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि जीएसटी एक व्यापक अप्रत्यक्ष कर है।

पेट्रोलियम उत्पाद, शराब पेय और बिजली जीएसटी के दायरे में नहीं आते हैं। किसी न किसी कीमती पत्थरों में 0/25% की विशेष दर होती है। सोने में 3% की विशेष दर भी होता है।जीएसटी ने निश्चित रूप से कई कर और शुल्क वसूल किए है।

इसके अंतर्गत केंद्रीय उत्पाद शुल्क, सेवा कर और अतिरिक्त सीमा शुल्क शामिल हैं। जीएसटी शासन ने लेवी यानी कर लगाने को खत्म कर दिया है। इसके साथ ही ये लेवी माल के अंतर-राज्य परिवहन पर लागू थे। जीएसटी का आवेदन सभी लेनदेन पर है। ये सारे लेन-देन, बिक्री, खरीद, हस्तांतरण और आयात हैं।

जीएसटी कैसे कार्य करता है?

जीएसटी सभी ज़रूरी प्रक्रियाओं के चरण में लगाया जाता है। निर्माता, थोक व्यापारी और उपभोक्ता के माध्यम से कीमत को चुकाया जाता है। यह सभी रजिस्टर्ड डीलर जीएसटी कर वसूलते है।

परन्तु वह इस पैसे को रखते नहीं है। वे इसका कर चालान के संग देश की सरकार को वापस चुकाते है और फिर क्रेडिट की मांग करते है। आखरी चरण में ग्राहक को कर का बोझ उठाना पड़ता है। आखरी में ग्राहक को खरीदी गयी सेवाओं पर जीएसटी की कीमत चुकानी पड़ती है।

जीएसटी की प्रबलता

यह जीएसटी विभिन्न स्तरों पर टैक्स की कैस्केडिंग को मिटाते है और माल को डीलरों के लिए कम दामों में उपलब्ध करवाते है। जीएसटी एकाउंट्स और बैंक जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाती है।

देश को बेहतर और अच्छे वस्तु और सेवा कर की ज़रूरत थी, जिसे जीएसटी ने सुलझाया है। अंतराष्ट्रीय स्तर और बाजार में हमारे देश को एक अच्छे स्तर पर रखता है। उम्मीद है यह कर सेवा उद्योग क्षेत्र और देश के अर्थव्यवस्था की उन्नति में योगदान देगा।

जैसा कि हम जानते है जब व्यापार होता है तब उत्पादों को बेचने और सर्विसेज पर टैक्स लगता है। यह अलग अलग टैक्स होते थे, लेकिन जीएसटी के आने के पश्चात सारे टैक्स खत्म हो गए।

मान लीजिये कि अगर कोई कपंनी पोशाक बनाती है, तो उसके लिए कच्चा माल चाहिए तो उसपर टैक्स देगी। कच्चा माल खरीदने से लेकर फैक्ट्री में बनाने तक फिर से टैक्स देगी, फिर बेचने पर टैक्स लगेगा।

इन सभी करो को जोड़कर एक नयी कीमत बनेगी। जीएसटी टैक्स ने टैक्स के इस प्रणाली को खत्म कर दिया है। इसका अर्थ है टैक्स कम हो गया है। मगर हर क्षेत्र में ऐसा मुमकिन नहीं है। जीएसटी आने के पश्चात किसी उत्पाद और सेवा पर दाम ज़्यादा तो किसी पर कम हुआ है। इसलिए जीएसटी के कर दरों को निर्धारित किया गया है।

जीएसटी के विभिन्न प्रकार

केंद्रीय वस्तु सेवा कर

यह कर राज्य सरकार के साथ उत्पादों और सर्विसेज के लेन देन के लिए है। यह कर केंद्र सरकार के माध्यम से लगाया जाता है। यह दूसरे केंद्र करो की जगह लेता है, जैसे केंद्रीय वस्तु पर टैक्स, केंद्र बिक्री कर, कस्टम ड्यूटी। इस कर को CGST कहा जाता है।

राज्य माल और सेवा कर

इसे अंग्रेजी में SGST कहा जाता है। यह जीएसटी कर राज्यों में होने वाले विभिन्न तरह के उत्पादों और सेवाओं पर लगाया जाता है। राज्य के उत्पादों और सेवाओं पर लगाया जाने वाला यह दूसरा जीएसटी है। इस तरह के जीएसटी लक्ज़री टैक्स, प्रवेश कर और मनोरंजन कर के जगह पर लगाया जाता है।

समन्वित माल और सर्विस यानी सेवा कर

आपको बता दे सीजीएसटी और एसजीएसटी जैसे कर राज्यों के अंदर वस्तुओं और सर्विसेज पर लगाए जाते है। लेकिन आईजीएसटी का तापर्य है दो राज्यों के बीच उत्पादों और सेवाओं पर जीएसटी लगाया जाना। आईजीएसटी कर को सेंट्रल गवर्नमेंट लगाती है और संग्रह करती है। इसके पश्चात राज्यों को प्रतिदान किया जाता है।

यूटीजीएसटी

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दमन और दिव, दादरा और नगर हवेली, चंडीगढ़ और लक्षदीप जैसे देश के कुछ यूनियन टेरिटरी यानी केंद्र शासित प्रदेश है। इस प्रकार का जीएसटी कर इन केंद्र शासित प्रदेशो के उत्पादों और सेवाओं पर लगाया जाता है।

यह जीएसटी दूसरे प्रदेशो में जारी नहीं होता है। इसका कारण यह है कि इसके लिए विधायिका की ज़रूरत होती है। सिर्फ दो यूनियन टेरिटरी यानी दिल्ली और पांडिचेरी में एसजीएसटी लागू होती है। इसकी वजह है उनके पास विधायिका होती है।

जीएसटी का पुराना इतिहास

साल 1999 में देश के पूर्व प्रधानमन्त्री अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार में जीएसटी को प्रस्थापित किया गया था। इस समिति का प्रतिष्ठापन वाजपेयी जी द्वारा पश्चिम बंगाल के वित् मंत्री असीम दासगुप्ता के माध्यम से किया गया था।

इस समिति का उद्देश्य जीएसटी मॉडल बनाना था। लेकिन तब इसे जारी नहीं किया गया था। इसे जुलाई 2017 में भाजपा सरकार यानी बीजेपी के नेतृत्व में निर्माण और लागू किया गया था।

केंद्रीय सरकार और राज्य सरकार की दृष्टि से

अभी के कर प्रक्रिया की तुलना में जीएसटी के आदेशों के पालन में दिक्कतें कम होगी। इससे केंद्र और राज्य दोनों लेवल पर रजिस्ट्रेशन की दिक्कतों से राहत मिलेगी।

व्यवसाय और उद्योग जगत की दृष्टि से

व्यापार जगत हमेशा इसी इंतज़ार में रहता है कि जीएसटी परिषद वस्तुओं के टेरिफ के बारें में क्या कहती है। यह व्यापार जगत के कई उद्योगों में प्रतिस्पर्धा के माहौल को तेज़ करेगी।

उपभोक्ताओं पर जीएसटी का असर

जीएसटी का आखरी अप्रत्यक्ष कर का भुगतान ग्राहकों को करना पड़ेगा। इससे ग्राहकों को भी फायदा होगा। वस्तुओं और सेवाओं के प्राइस रेट में कमी आएगी। लेकिन ऐसा सभी क्षेत्रों में नहीं हुआ है।

जीएसटी को लेकर कुछ लोगो की धारणा

जीएसटी कर उत्पादन और वितरण प्रणाली के लिए उम्दा है। मगर कुछ शोधकर्ताओं के मुताबिक देश के रियल स्टेट मार्किट पर इसका गलत प्रभाव पड़ेगा। कुछ जानकारों का मानना है कि सीजीएसटी, एसजीएसटी इत्यादि जीएसटी के बस अलग अलग नाम है।

इससे कुछ विशेष तरीके से कई स्थानों में कर की दृष्टि से कोई कमी नहीं आएगी। पहले के मुकाबले यह देश के मार्किट में ज़्यादा मुकाबला करवाएगा। यह उद्योग जगत में देखने को मिलेगा। कुछ लोगो ने जीएसटी से होने वाले कई नुकसान के बारें में अवगत करवाया है। यह उद्योग जगत की नज़र से ज़्यादा फायेमंद नहीं है।

निष्कर्ष

जीएसटी का कई क्षेत्रों में सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। यह भाजपा सरकार का एक महत्वपूर्ण कदम है, जो आगे चलकर देश की अर्थव्यवस्था और व्यापार जगत को बेहतर बनाएगी।जीएसटी टैक्स ग्राहकों के कर के बोझ की वृद्धि करता है।

जीएसटी कैस्केडिंग के दबाव को कम करता है। जीएसटी प्रक्रिया में सभी करो को एक साथ लाकर उसे बराबर से वितरित किया जाता है। इससे कर निर्धारण का जो दबाव है, वह काफी कम हो जाता है।

जीएसटी से कई लोगो को लाभ होगा। इससे दामों में गिरावट आएगी। कंपनियों को जीएसटी से सहायता मिलेगी। जीएसटी का मकसद सम्पूर्ण भारत में एक समान कर व्यवस्था लाना है। जीएसटी अलग अलग डीलरों से अलग अलग राज्यों और केंद्रीय टैक्स को कम करने में मदद करता है।


तो यह था जी एस टी पर निबंध, आशा करता हूं कि जी एस टी पर हिंदी में लिखा निबंध (Hindi Essay On GST) आपको पसंद आया होगा। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा है, तो इस लेख को सभी के साथ शेयर करे।

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