वैश्वीकरण पर निबंध (Globalization Essay In Hindi)

आज हम वैश्वीकरण पर निबंध (Essay On Globalization In Hindi) लिखेंगे। वैश्वीकरण पर लिखा यह निबंध बच्चो (kids) और class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए लिखा गया है।

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वैश्वीकरण पर निबंध (Globalization Essay In Hindi)


प्रस्तावना

वैश्वीकरण या ग्लोबलाइजेशन का अर्थ होता है, किसी व्यापार को पूरी दुनिया तक फैलाना। लेकिन पिछले कुछ दशकों में वैश्वीकरण या ग्लोबलाइजेशन का अर्थ केवल इतना ही नहीं रह गया है। अब वैश्वीकरण या ग्लोबलाइजेशन अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं के बीच उत्पादों, व्यापार, तकनीकी, दर्शन, व्यवसाय, कारोबार, कम्पनी आदि के उपर भी लागू होता है।

वैश्वीकरण या ग्लोबलाइजेशन एक बहुत ही अहम प्रक्रिया है। यह पूरी दुनिया को जोड़ती है। इससे आर्थिक मजबूती देखने को मिलती है। यह देश दुनिया के बाजारों का एक सफल आंतरिक संपर्क का निर्माण करता है।

आज के समय में हम मैकडॉनल्ड (McDonalds) से काफी भलीभांति परिचित होंगे। यह एक वैश्वीकरण या ग्लोबलाइजेशन का ही उदाहरण है। आज के समय में मैकडॉनल्ड्स पूरे विश्व भर में प्रसिद्ध है और कई देशों में मैकडॉनल्स अपना व्यापार करता है।

पिछले दशकों में पूरी दुनिया में बहुत तेजी से ग्लोबलाइजेशन या वैश्वीकरण हुआ है। पूरे विश्व भर में आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पारस्परिकता में तकनीकी, दूर संचार, यातायात आदि के क्षेत्र में काफी तेजी से वृद्धि होना, ग्लोबलाइजेशन या वैश्वीकरण का ही परिणाम है।

ग्लोबलाइजेशन या वैश्वीकरण के प्रभाव

पिछले कुछ दर्शकों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बिल्कुल नई दिशा दे दी है। ग्लोबलाइजेशन या वैश्वीकरण ने न केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार बल्कि राष्ट्रीय बाजार को भी सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। हालांकि हमें कई रूप में ग्लोबलाइजेशन या वैश्वीकरण प्रकृति के लिए लाभदयक साबित नहीं हुआ। जिसके नकारात्मक परिणाम हमें भुगतने पड़ रहे हैं।

हमने पिछले कुछ वर्षों में इस बात पर गौर किया कि, हमारे बीच ऑनलाइन शॉपिंग का चलन बढ़ गया है। अब हम देश विदेश से अपने लिए किसी भी चीज को आसानी से मंगवा सकते हैं।

यह वैश्वीकरण का ही प्रतीक है। पहले ऐसा करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती थी। अक्सर अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं का व्यापार केवल प्रधानमंत्री तथा मंत्रियों का कार्य माना जाता था। लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय व्यापार के क्षेत्र में काफी छूट मिल गई है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में तेजी से वृद्धि हो रही है।

हालांकि ग्लोबलाइजेशन और वैश्वीकरण की प्रक्रिया में प्रकृति को काफी नुकसान हुआ है। इन नुकसान की भरपाई करने के लिए अंतरराष्ट्रीय कंपनियां पर्यावरण के प्रति कई बड़े कदम उठा रही हैं और बड़े स्तर पर पर्यावरण जागरूकता फैलाने की कोशिश की जा रही है।

वैश्वीकरण या ग्लोबलाइजेशन के कारण ही विकसित देशों की कंपनियां अपना व्यापार पूरी दुनिया में फैलाने में सफल हुई है। वैश्वीकरण के कारण कई देशों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।

सभी लोग ज्यादा से ज्यादा मात्रा में उत्पादक होने की कोशिश करते हैं। यह हमें एक प्रतियोगी संसार की ओर ले जा रहा है। यह एक ऐसे बाजार का निर्माण करता है, जहां पर बहुत ज्यादा प्रतियोगिता होती है और ग्राहक का ध्यान सबसे पहले रखा जाता है।

ग्लोबलाइजेशन या वैश्वीकरण के फायदे

वैश्वीकरण के कारण हमें काफी सारी सेवाओं का लाभ हुआ है। इसका सबसे बड़ा उदाहण शिक्षा क्षेत्र में भी देखा जा सकता है। वैश्वीकरण या ग्लोबलाइजेशन के कारण ही भारतीय छात्र इंटरनेट से परिचित हुए। इंटरनेट के कारण भारत में एक नई क्रांति आई है।

इंटरनेट के माध्यम से ही भारतीय छात्र अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय से जुड़ने में सफलता प्राप्त कर रहे हैं। इससे भारतीय छात्रों को बहुत लाभ हुआ है। इतना ही नहीं वैश्वीकरण या ग्लोबलाइजेशन के चलते हमें स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी वृद्धि देखने को मिलती है।

वैश्वीकरण में ग्लोबलाइजेशन के चलते ही हमें कई मशीनें अपने देश में उपलब्ध कराई जाती हैं। स्वास्थ्य को नियमित करने वाली विद्युत मशीन आदि वैश्वीकरण या ग्लोबलाइजेशन के कारण हम तक पहुंचाई जाती हैं।

यह तो हम सभी जानते हैं कि हमारा देश कृषि प्रधान देश है। वैश्वीकरण और ग्लोबलाइजेशन ने कृषि क्षेत्र में भी अपनी अहम भूमिका निभाई है। ग्लोबलाइजेशन के कारण कृषि क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के बीजों की किस्मों को लाकर, उत्पादन बड़े स्तर पर प्रभावित हुआ है। इसी प्रकार से रोजगार के क्षेत्र में भी वैश्वीकरण और ग्लोबलाइजेशन ने अपनी अहम भूमिका निभाई है।

वैश्वीकरण या ग्लोबलाइजेशन का पर्यावरण पर प्रभाव

किसी सिक्के के दो पहलू की तरह वैश्वीकरण या ग्लोबलाइजेशन के भी दो प्रभाव हमें देखने को मिलते हैं। एक है इसका सकारात्मक प्रभाव और दूसरा है इसका नकारात्मक प्रभाव। वैश्वीकरण या ग्लोबलाइजेशन की सकारात्मकता को हम कई क्षेत्रों में महसूस कर सकते हैं।

लेकिन यह बात किसी से छुपी नहीं है कि वैश्वीकरण या ग्लोबलाइजेशन ने पर्यावरण को बुरी तरह से प्रभावित किया है। राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय कंपनियां अपना अंतरिक मुनाफा बढ़ाने के लिए पर्यावरण को हानि पहुंचाते जा रही हैं। दुनिया भर में प्रदूषण कंट्रोल में नहीं है। विश्व भर की कई औद्योगिक राजधानियां प्रदूषण  की समस्या का सामना कर रही हैं।

प्रदूषण के कारण होने वाली बीमारियों में भी इजाफा देखा गया है। छोटे-छोटे बच्चे भी आम प्रदूषण के कारण होने वाली बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। विश्व भर के सामान्य तापमान में भी वृद्धि आई है। धरती का तापमान लगातार गर्म होता जा रहा है।

हवा के साथ साथ पानी भी प्रदूषित होता जा रहा है। हालांकि कई वैश्विक कंपनियों ने इसके दुष्प्रभाव को कम करने की पूरी कोशिश की है। कंपनियां इसके नकारात्मक प्रभाव से निपटने के लिए अलग-अलग तरह के प्रयास कर रही हैं। कंपनियों को हरियाली सुरक्षित रखने का प्रयास करना चाहिए और ऐसी तकनीक का इस्तेमाल करना चाहिए, जिससे कि पर्यावरण को कुछ नुकसान ना हो।

निष्कर्ष

यह बिल्कुल सच है कि वैश्वीकरण या ग्लोबलाइजेशन के कारण है हम एक नई किस्म की दुनिया से अवगत हुए हैं। आज के समय में सब कुछ काफी आसान हो गया है। दुनिया में हर चीज आज हमारे पास मौजूद होती है। यह सब वैश्वीकरण या ग्लोबलाइजेशन के बदौलत ही संभव हो पाया है।

वैश्वीकरण या ग्लोबलाइजेशन कई मायनों में हमारे लिए लाभदायक साबित हुआ है। लेकिन इसके दुष्प्रभावों को अनदेखा नहीं किया जा सकता। हमें कोशिश करनी चाहिए कि हम इसके दुष्प्रभावों को कम कर सके।

बड़े स्तर पर पर्यावरण के प्रति जागरूक करने वाले कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित किए जाते रहते हैं। लेकिन तब भी किसी ऐसी तकनीक को विकसित करने की जरूरत है, जिससे कि वैश्वीकरण और पर्यावरण दोनों ही सुरक्षित रहे।


तो यह था वैश्वीकरण पर निबंध, आशा करता हूं कि वैश्वीकरण पर हिंदी में लिखा निबंध (Hindi Essay On Globalization) आपको पसंद आया होगा। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा है, तो इस लेख को सभी के साथ शेयर करे।

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