घरेलु उद्योग पर निबंध (Gharelu Udyog Essay In Hindi)

आज के इस लेख में हम घरेलु उद्योग पर निबंध (Essay On Gharelu Udyog In Hindi) लिखेंगे। घरेलु उद्योग पर लिखा यह निबंध बच्चो (kids) और class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए लिखा गया है।

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घरेलु उद्योग पर निबंध (Gharelu Udyog Essay In Hindi)


हमारे देश में दिन -प्रतिदिन बेरोजगारी की समस्या चरम सीमा पर पहुँच रही है। सरकार मुमकिन कोशिश करने के साथ नयी योजनाएं भी बना रही है, ताकि गरीबो और मध्यम वर्गीय लोगो की इस परेशानी को दूर कर सके।

बेरोजगारी जैसे परेशानी को दूर करने के लिए हम घरेलू उद्योग और लघु उद्योग आरम्भ कर सकते है। गरीब या उससे भी निम्न स्तर पर जीने वाले लोगो के पास दो वक़्त का खाना मुश्किल से जुट पाता है।

अगर व्यक्ति घर से छोटा हस्तशिल्प का उद्योग आरम्भ करे तो फिर हाथ से बने हुए चीज़ो को बाज़ारो में अच्छे कीमत पर बेचा जा सकता है। ऐसे उद्योगों में पंद्रह ज़रूरतमंद और मेहनती लोगो को शामिल करे तो घरेलू उद्योग अच्छा -ख़ासा चल सकता है।

कभी – कभी सरकार पर रोज़गार के लिए पूरी तरीके से भरोसा करना बेरोजगार व्यक्ति के लिए भारी पर सकता है। हमे ज़रूरत है आत्मविश्वास और आत्मचिंतन करने की, साथ ही समय का सदुपयोग करके नए घरेलु उद्योग स्थापना करने की।

हमे ऐसे कुटीर उद्योगो की स्थापना करनी चाहिए जिसमे ज़्यादा भुगतान ना करना पड़े और जिसमे विशाल जगह की ज़रूरत ना पड़े। शुरुआत हमेशा मुश्किल होती है, लेकिन अगर दिशा सही हो तो आगे चल कर उद्योग को विस्तृत किया जा सकता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में ज़्यादातर लोग, लघु अथवा घरेलू उद्योग के माध्यम से जीवन गुजारा करते है। बहुत सारी औरते सिलाई जैसे घरेलु उद्योग चलाती है। हाथो के काम जैसे सिलाई, कढ़ाई और बुनाई में महिला दुरुस्त होती है। बहुत सारी महिलाएं फैक्टरियों से सिलाई का कॉन्ट्रैक्ट लेकर पूरा करती है और घर का खर्चा चलाती है।

लघु उद्योग कई प्रकार के होते है जो घर पर शुरू किये जा सकते है। जैसे टोकरी बनाना, चटाई बनाना और हाथो से बने हुए पंखे बनाना। हाल ही में कोरोना महामारी के दौरान कुछ स्त्रियाए विभिन्न प्रकार के डिज़ाइनर मास्क घर पर बना रही है। इससे समाज भी सुरक्षित रहेगा और उन्हें घर चलाने के लिए रोज़गार भी प्राप्त होगा।

घरेलू उद्योग में छोटे -छोटे कार्य होते है, जिसे लोग सामूहिक रूप से करते है। भारतीय समाज औद्योगीकरण और प्रौद्योगिकी के तरफ ज़्यादा भाग रहा है। मोदी जी की सरकार ने शिक्षा नीति में कौशल यानी स्किल डेवलपमेंट को अभी महत्व दिया है।

भारत की परंपरा और संस्कृति में हाथ से बनी हुयी चीज़ें को बड़ा महत्व है। हस्तशिल्प द्वारा हज़ारो लोग अपना जीवन यापन कर रहे है। घरेलू उद्योग में आम तौर पर मोमबत्ती बनाना, मिटटी के बर्तन, डब्बा व्यापार, भगवान् की मूर्तियां, नक्काशी इत्यादि कार्य शामिल है।

बहुत से घरो में घर का खाना बनाकर, घरो -घरो में जाकर पहुंचाते है। मुंबई शहर में डब्ब्लेवाले के बैगर लोगो का जीवन नहीं चलता है। भारत में हर महीने कुछ ना कुछ त्यौहार रहता है। इन त्योहारों से संबंधित लोग घर पर वस्तु बनाकर उसे मेले में बेचते है, जिससे उनकी अच्छी आमदनी होती है।

भारत में ज़्यादातर लोग गाँव में लघु उद्योग करते है। कुम्हार अपने हाथों से अनोखे और लाजवाब मिटटी के बर्तन बनाता है। उसके बाद भट्टी में उसको सुखाकर मज़बूत करता है और उसके बाद रंगो से उस पर नक्काशी करता है।

भारत सरकार लघु उद्योग करने के लिए लोगो को लोन की सुविधा दे रही है। लोन लेकर लोग अपना घरेलू उद्योग आरम्भ कर सकते है। हथकरघा, सिलाई और जूते बनाने का उद्योग इत्यादि व्यापार कर सकते है।

जीवन जीने के लिए पैसो की ज़रूरत होती है। बहुत से लोग अच्छी डिग्री लेकर अच्छे कंपनी में रोज़गार कर लेते है। परन्तु सभी लोगो की ज़िन्दगी इतनी सरल नहीं होती है। हर किसी को नौकरी करने का अवसर प्राप्त नहीं होता है, इसलिए कुछ लोग लघु और कुटीर उद्योग के माध्यम से रोज़गार करते है।

घरेलू उद्योग से आरम्भ में अधिक कमाई नहीं हो पाती है, लेकिन निरंतर प्रयास और परिश्रम से लघु उद्योग को बड़े उद्योग में बदला जा सकता है। जिस देश में घरेलू उद्योग को प्रोत्साहित किया जाता है, उस देश के लोग कभी बेरोजगार नहीं होते है।

अगर व्यक्ति घरेलू उद्योग शुरू करे, तब उसे वक़्त के साथ साथ अच्छी जानकारी प्राप्त हो जाती है। अनुभव से व्यक्ति अच्छे व्यापारी भी बन सकते है। इससे हम समूह में आस -पड़ोस के लोगो के साथ मिलकर काम कर सकते है।

इस प्रकार लघु उद्योग के क्षेत्र से हम अपने देश को तरक्की की ओर ले जा सकते है और देश से बेरोज़गारी का नामो निशान मिटा सकते है। सभी लोगो को एक साथ मिलकर, हाथों से अच्छे समान बनाकर मार्किट में लाना होगा।

बाज़ार में वस्तुओं को अच्छे दामों में बेचना होगा। भारत में ऐसे कई राज्य है जो कुटीर और घरेलू उद्योग को प्रोत्साहित कर रहे है। भारत सरकार कई प्रकार के योजनाओ के माध्यम से घरेलू उद्योग प्रारम्भ करने के लिए लोगो को उचित लोन प्रदान कर रहे है।

इसका फायदा यह होगा की लोगो को उद्योग जैसे डेयरी, मुर्गी पालन, पशु पालन जैसे उद्योगों में रोजगार के अवसर मिलेंगे। सरकार द्वारा इन सभी प्रकार के लघु उद्योगों में मदद की जा रही है।

हाथो से निर्मित की गयी इस बेहतरीन प्रक्रिया को शिल्पकारी कहते है। देश के कुशल कारीगर सरल उपकरणों से अलग- अलग प्रकार के हैरान कर देने वाले अद्भुत और मन मोह लेने वाले समान बनाते है। कुशल और अनुभवी कारीगर लकड़ी, चट्टान, पत्थर, धातु, संगमरमर इत्यादि चीज़ों से सामान बखूभी बनाना जानते है।

ग्रामीण लोग आज भी अपने रचनात्मक गुणों के कारण,  कलात्मक वस्तुएं बनाकर अपनी आजीविका कमाते है। पूरे विश्व में भारत अपनी कला और पारम्परिक संस्कृति के कारण प्रसिद्ध है।

भारत के विभिन्न प्रकार के हस्तशिल्प की चर्चा दुनिया भर में है। विदेशो से आकर पर्यटक इन हस्तशिल्पो को बेहद पसंद करते है और खरीदते है। घरेलू उद्योग के माद्यम से ऐसे कारीगर, हाथो से बनी हुयी चीज़ो को रोज़ाना बेचकर अपना दैनिक जीवन चलाते है।

भारत के विभिन्न प्रकार के हस्तशिल्प है, जैसे की बांस हस्तशिल्प। यह सबसे पर्यावरण अनुकूलित हस्तशिल्प है। बांस की मदद से टोकरी, गुड़िया,  खिलोने, सजावट के सामान इत्यादि बनाकर लोग अपना घर चलाते है।

बैत से टोकरिया, ट्रे और फर्नीचर बनाये जाते है। ओडिशा राज्य में हड्डी और सींग के कई प्रकार के हस्तशिल्प बनाये जाते है। यह हस्तशिल्प बेहद जीवंत लगते है और इन हस्तशिल्पो को पक्षी और जानवरो का रूप दिया जाता है।

राजस्थान राज्य में पीतल के हस्तशिल्प प्रसिद्ध है। पीतल से बने भगवान् की मूर्तियां और अनगिनत सामान कारीगरों द्वारा बनाये जाते है। भारत में विभिन्न प्रकार के मिटटी के हस्तशिल्प जैसे लाल बर्तन, ग्रे बर्तन और काले बर्तन के रूप में कारीगर बनाते है। पश्चिम बंगाल के कृष्णागर, लखनऊ, हिमाचल प्रदेश इत्यादि राज्यों में मिटटी के हस्तशिल्प पाए जाते है।

पश्चिम बंगाल, असम और बिहार जैसे राज्यों में जूट हस्तशिल्प से हज़ारो कारीगर स्वयम आजीविका कमाते है। जूट के बैग, फूटवेयर, सजावट के सामान इत्यादि बनाये जाते है।

भारत में दिल्ली, राजगीर, पटना, गया जैसे क्षेत्रों में कागज़ से बने वस्तु जैसे पतंग, सजावटी फूल, खिलोने, हाथ के पंखे, लैंप शेड बेहद मशहूर है। राजस्थान, जयपुर और मध्य प्रदेश संगमरमर की लाजवाब नक्काशी के लिए लोकप्रिय है।

समुद्री शैल से विभिन्न प्रकार के वस्तु बनाये जाते है। ऐसे कारीगर घरो में अथवा समूह में शैल के सामान जैसे चूड़ियां, लॉकेट, चमच इत्यादि बनाते है। जिन क्षेत्रों में समुद्र होते है, वहां समुद्र के किनारे शैल के बने समान बिक्री किये जाते है।

मीनाकारी अथवा चांदी का महीन काम करके बहुत सारे कारीगर ऐसे लघु उद्योगों से आजीविका कमाते है। ऐसे हस्तशिल्प ओडिशा और तेलंगना में लोकप्रिय है। कई औरतें समूह बनाकर बुनाई और कढ़ाई जैसे महीन कार्य करके कपड़े बनाती है। कपड़ो में महीन एम्ब्रॉयडरी भी करती है।

बुनाई जैसे बांधनी जैसे कपड़े जामनगर और राजकोट में बेहद प्रसिद्ध है। देश के लिए छोटे उद्योग धंधे गरीब और अल्पविकसित वर्ग के लिए लाभदायक है। आज कल बड़े शहरों में भी घरेलू उद्योगों का निर्माण हो रहा है। जापान एक ऐसा देश है, जहाँ घरेलू उद्योग से लोग अच्छी खासी कमाई कर लेते है।

राष्ट्र पिता गांधी जी ने कहा था कि लघु या घरेलू उद्योग को प्राथमिकता ना देकर कोई भी देश उन्नति नहीं कर सकता है। भारत विकाशील देश है और यहां अनगिनत गाँव है। यहां घरेलू उद्योगों को बेइंतेहा प्रोत्साहन मिलना चाहिए।

आज कल कई स्थानों पर ऐसा देखने को मिलता है, जहां लोग हैंडलूम की बेहतरीन चीज़ो को नज़रअंदाज़ कर नकली सिंथेटिक वस्तुओं को खरीदते है। यहीं वजह है कई अच्छे कारीगर और हस्तशिल्प बेरोजगार हो जाते है।

लोग औद्योगीकरण में इतने व्यस्त हो गए है कि लघु और कुटीर उद्योग के महत्व को भूल रहे है। औद्योगीकरण में जहाँ देश ने प्रगति की, वहां प्रदूषण भी फैलाया है। जितना महत्व मशीनों को दिया गया उतना ही महत्व कारीगरों को भी दिया जाना चाहिए था।

लघु या घरेलू उद्योग प्रारम्भ करने से पूर्व यह चयन करना आवश्यक है, कि कौन सा लघु उद्योग व्यक्ति के लिए बेहतर होगा। कितना निवेश करना है और किस प्रकार के कौशल से व्यक्ति संबंध रखता है, इस पर भी यह उद्योग निर्भर करता है।

गांव और कस्बो में लोग चाय की दूकान, अगरबत्ती की दूकान आदि घर चलाते है। गाय और भैसो का पालन भी एक उम्दा घरेलू उद्योग है। अगर पशु पालन जैसे उद्योग भली – भाँती से किया जाए तो उससे लाखो रूपए कमाया जा सकता है।

विभिन्न प्रकार के सब्ज़ी की खेती से भी अच्छा लाभ हो सकता है। कृषि संबंधित कार्यो में लगन और मेहनत की आवश्यकता है। कृषि क्षेत्र में तकनीकी ज्ञान व्यक्ति को होना ज़रूरी है।कुटीर उद्योग व्यक्ति के परिश्रम पर केंद्रित है।

ऐसे उद्योगों में कम से कम पूंजी लगायी जाती है, जिससे लोगो के रोजगार में वृद्धि होती है। बड़े उद्योगों की तुलना में लघु उद्योग में अधिक से अधिक लोग काम करते है। वहां सभी का समान अधिकार होता है। लघु उद्योग में श्रमिकों का शोषण नहीं होता है और इसलिए आय वितरण में बराबर का अधिकार होता है।

बड़े और विस्तृत उद्योग स्थापित करने के लिए कई तरह के सुविधाओं जैसे जमीन, पानी, बिजली इत्यादि कई चीज़ों की आवश्यकता होती है। जबकि लघु और घरेलू उद्योग को गाँव या शहर में कहीं पर भी बसाया जा सकता है।

घरेलू और कुटीर उद्योगों के लिए ज़्यादा तकनीकी ज्ञान की ज़रूरत नहीं होती है। बहुत सारे लोगो को कम प्रशिक्षण देकर भी उनसे काम करवाया जा सकता है। कुटीर और घरेलू उद्योग ऐसे उद्योग है, जिसमे कम वक़्त में जल्द उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

कुटीर उद्योग देश के तकरीबन लाखो लोगो को रोजगार के मौके देता है। भारत का कुल औद्योगिक उत्पादन में से 45 फीसदी योगदान लघु उद्योगों का है।

घरेलू उद्योग देश के सामाजिक और आर्थिक प्रगति में अहम भूमिका निभाते है। घरेलू उद्योग जो भी व्यक्ति शुरू करना चाहता है, वह निसंकोच रूप से आरम्भ कर सकता है और सरकार की सहायता से अपने उद्योग को विकसित कर सकता है।

सरकार का यह उद्देश्य है, कि वह इन घरेलू उद्योगों के माध्यम से कई लोगो को दैनिक रोजगार के अवसर प्रदान कर सके। लघु उद्योग द्वारा लोगो की बेरोजगारी की परेशानी  दूर हो जायेगी और सभी लोग एक सुखी जीवन यापन कर पाएंगे।

सरकार का दायित्व है कि वह इस प्रकार के लघु उद्योगों के लिए लोगो को  प्रशिक्षण उपलब्ध करवाए। न्यूनतम ब्याज पर उधार का प्रबंध लोगो को करवाए, साथ ही समाग्रियों या उत्पादों को बेचने के लिए उचित बाजार सुलभ कराये।


तो यह था घरेलु उद्योग पर निबंध, आशा करता हूं कि घरेलु उद्योग पर हिंदी में लिखा निबंध (Hindi Essay On Gharelu Udyog) आपको पसंद आया होगा। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा है, तो इस लेख को सभी के साथ शेयर करे।

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