गाँधी जयंती पर निबंध (Gandhi Jayanti Essay In Hindi)

आज के इस लेख में हम गाँधी जयंती पर निबंध (Essay On Gandhi Jayanti In Hindi) लिखेंगे। गाँधी जयंती पर लिखा यह निबंध बच्चो (kids) और class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए लिखा गया है।

गाँधी जयंती पर लिखा हुआ यह निबंध (Essay On Gandhi Jayanti In Hindi) आप अपने स्कूल या फिर कॉलेज प्रोजेक्ट के लिए इस्तेमाल कर सकते है। आपको हमारे इस वेबसाइट पर और भी कही विषयो पर हिंदी में निबंध मिलेंगे, जिन्हे आप पढ़ सकते है।


२ अक्टूबर गाँधी जयंती पर निबंध (2 October Gandhi Jayanti Essay In Hindi)


गाँधी जयंती

देश में हर साल बहुत से कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिसमें बहुत से सेनानियों के बलिदान की याद में और कुछ स्वतंत्रता सेनानियों के जन्म के अवसर पर कार्यक्रम होते हैं। जिसमें से गाँधी जयंती देश में हर साल मनाये जाने वाला एक कार्यक्रम है। जो हर वर्ष 2 अक्टूबर को मनाया जाता है।

यह भारत का राष्ट्रीय कार्यक्रम है। गाँधी जी के जीवन को समझने के लिए स्कूलों में विद्यार्थियों को छोटी उम्र में ही अलग-अलग शब्द सीमा और अलग-अलग तरीकों से सिखाया जाता है। गाँधीजी का बलिदान इतिहास में लिखा गया है। उनके द्वारा दिया गया बलिदान आज भी सर्वोपरि है।

2 अक्टूबर को पूरे देश में स्कूल और सरकारी दफ्तरों की छुट्टी रखी जाती है। इसे पूरे देश में सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में मनाया जाता है। गाँधी जयंती के दिन नई दिल्ली में गाँधी स्मारक पर श्रद्धांजलि, प्रार्थना जैसे कार्यक्रम किए जाते हैं। इस दिन यहां पर गाँधीजी के लिए भाषण, नाटक मंच, स्मृति समारोह, सभा आदि किए जाते हैं।

गाँधी जयंती को क्यों मनाते है?

हर साल 2 अक्टूबर को गाँधी जयंती मनाई जाती है, क्योंकि इस दिन गाँधी जी का जन्म हुआ था और गाँधीजी को याद करने के लिए तथा उनके बलिदानों को याद करने के लिए इस दिन को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।

यह विश्व अहिंसा दिवस के रूप में भी जाना जाता है। गाँधी जी ने देश भर में अहिंसा आंदोलन चलाया था, जिसके कारण पूरा विश्व उन्हें जानने लगा और सम्मान देने लगा। गाँधी जी कहते हैं कि अहिंसा एक दर्शन है एक सिद्धांत है और एक अनुभव भी है, जिसके अनुसार समाज को बहुत ही अच्छा किया जा सकता है।

राजघाट

गाँधी जयंती के दिन गाँधीजी की बनी हुई प्रतिमा जो कि नई दिल्ली राजघाट पर है, वहा गाँधी जयंती के दिन देश के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री गाँधी जी को श्रद्धांजलि देने के लिए आते हैं।

इस दिन दिल्ली में इस कार्यक्रम को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। यहां पर मंच आयोजित किए जाते हैं, नाटक रूपांतरण किये जाते हैं, भाषण दिए जाते हैं। इस दिन सभी स्कूलों और सरकारी दफ्तरों की छुट्टी रखी जाती है।

आजादी की शुरुआत

महात्मा गाँधी देश के राष्ट्रपिता थे, 2 अक्टूबर को पूरे देश में धूमधाम से गाँधी जयंती मनाई जाती है। गाँधी जी का जन्म 2 अक्टूबर 1877 मैं गुजरात के पोरबंदर जिले में हुआ। गाँधी जी ने लंदन में कानून की पढ़ाई करी थी और बैरिस्टर बाबू बनने के लिए गए थे।

जब उन्होंने लंदन में बैरिस्टर की डिग्री पूरी कर ली, तब गाँधीजी वापस भारत आ गए। तो उस वक़्त अंग्रेजी शासन का गुलाम था और लोगो पर बहुत अत्त्याचार होते थे, देश की ऐसी स्थिति देखकर गाँधी जी बहुत चिंतित हुए। जिसके बाद से उन्होंने देश में स्वतंत्रता की 1 लंबी लड़ाई शुरू कर दी और देश को आजाद कराया।

गाँधी जी ने स्वराज को प्राप्त करने के लिए, समाज में अस्पृश्यता हटाने के लिए, बुराइयों को मिटाने के लिए, किसानों की आर्थिक स्थिति को सही करने के लिए, महिलाओं को अधिकार दिलाने के लिए, इसके अलावा बहुत से महान कार्य किए।

महात्मा गाँधी ने ब्रिटिश शासन से आजादी प्राप्त करने के लिए भारतीय लोगों की मदद के लिए 1920 में असहयोग आंदोलन, 1930 में दांडी मार्च, नमक आंदोलन, 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन चलाए थे। अंग्रेजों को भारत छोड़ने के लिए उनका भारत छोड़ो आंदोलन बहुत ही कारगर सिद्ध हुआ।

गाँधीजी सविनय अवज्ञा आंदोलन

गाँधी जी ने देश को आजाद कराने के लिए बहुत से आंदोलन में भाग लिया और बहुत से आंदोलन गाँधी जी द्वारा चलाए गए। महात्मा गाँधी के साथ-साथ बहुत से स्वतंत्र सेनानी थे जिन्होंने देश को आजाद कराने के लिए अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

गाँधीजी का मानना था कि अंग्रेज भारत में राज करने में इसलिए सफल रहे, क्योंकि गाँधी जी को भारतीयों का सही से सहयोग नहीं मिल पाया। गाँधीजी कहते हैं कि अंग्रेजों को राजपाट चलाने के अलावा बहुत से आर्थिक और व्यापारिक कार्यों में भारतीय लोगों की आवश्यकता थी।

इन सभी चीजों का बहिष्कार करने के लिए, भारतीय नागरिकों को अंग्रेजों को मदद नहीं देने के लिए और अंग्रेजों का बहिष्कार करने के लिए इस आंदोलन को चलाया गया।

साइमन कमीशन का बहिष्कार

साइमन कमीशन एक बहुत ही क्रूर नीति बनाने वाला ब्रिटिश सरकारी सैनिक था। जिसने स्वराज पर अपना अधिकार बनाने की कोशिश की थी। अगली सरकार को डोमिनियन राज्य देने के पक्ष में नहीं रखा गया, इन्हीं बातों का विरोध करने के लिए गाँधी जी ने पहले अंग्रेजों को चेतावनी भी दी थी।

यदि भारत को स्वतंत्र नहीं किया गया तो अंग्रेजी हुकूमत को सामूहिक लोगों की अभिज्ञा का सामना करना पड़ेगा। ऐसे ही राजनीतिक और सामाजिक कारणों की वजह से सविनय अवज्ञा आंदोलन का जन्म हुआ। इस आंदोलन के अंदर गाँधीजी ने साइमन कमीशन का बहिष्कार किया और स्वराज पर अधिकार पाने के लिए अंग्रेजी सत्ता को हिला दिया।

सविनय अवज्ञा आंदोलन का उदय

महात्मा गाँधी के जन्म उत्सव पर यानी कि गाँधी जयंती के दिन महात्मा गाँधी द्वारा चालू किए गए सविनय अवज्ञा आंदोलन के बारे में बताया जाता है, कि कैसे इस आंदोलन की शुरुआत हुई। सविनय अवज्ञा आंदोलन 1919 में असहयोग आंदोलन के साथ, जो कि जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में हुआ था।

गाँधी जी द्वारा नमक सत्याग्रह आंदोलन चलाया गया, जिसके बाद ही सविनय अवज्ञा आंदोलन काफी प्रसिद्ध हो गया था। महात्मा गाँधी द्वारा शुरू किया गया नमक सत्याग्रह आंदोलन और दांडी यात्रा को हम सविनय अवज्ञा आंदोलन का आरंभ भी मान सकते हैं।

जब नमक सत्याग्रह आंदोलन की यात्रा 26 दिन तक चली थी, तो जय यात्रा 12 मार्च 1930 को शुरू हुई थी और 6 अप्रैल 1930 को डांडी गांव में खत्म हुई थी।

थोड़े ही समय में यह आंदोलन एक बड़े आंदोलन में बदल गया। लोगों ने अंग्रेजी सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों को चुनौती देना शुरू कर दिया और नमक बनाना शुरू कर दिया। जब कि इस आंदोलन के कारण 2 से ज्यादा लोग गिरफ्तार भी हुए थे, फिर भी अंग्रेजी हुकूमत को रोकने के लिए इस आंदोलन को जारी रखा गया।

अंग्रेजों ने बहुत से लोगों को गिरफ्तार किया लेकिन इस आंदोलन को नहीं रोक पाए। सविनय अवज्ञा आंदोलन में लोगों ने विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करना शुरू कर दिया और देश में स्वदेशी चीजों का उपयोग करने पर जोर दिया जाने लगा।

भारत में लोगों ने अंग्रेजी वस्तुओं को जलाकर इसका बहिष्कार किया। बाद में किसानों ने कर देने से भी मना कर दिया। गाँधी जी के आदेश पर विरोध की आवाज बहुत ही बुलंद हो गई, जिससे बहुत से अंग्रेजी अफसरों ने अंग्रेजी प्रशासन से इस्तीफा देना शुरू कर दिया।

गाँधी जी की पांच बातें

  • महात्मा गाँधी ने लंदन से पढ़ाई की थी और बैरिस्टर बाबू बन गए। वह जब बैरिस्टर बाबू बनने के बाद मुंबई आए तो हाईकोर्ट में उन्होंने पहला केस लड़ा, जिसमें गाँधीजी असफल रहे।
  • एप्पल कंपनी के मालिक स्टीव जॉब्स ने गाँधी जी को सम्मान देने के लिए गोल चश्मा पहना था और आज भी पहनते हैं।
  • महात्मा गाँधी के नाम से भारत में 50 से ज्यादा सड़के हैं और विदेशों में करीब 60 से ज्यादा सड़के हैं।
  • महात्मा गाँधी को 5 बार नोबेल पुरस्कार देने के लिए चुना गया, लेकिन उन्हें कभी दिया नहीं गया।
  • महात्मा गाँधी हमेशा 18 किलोमीटर की पैदल यात्रा करते थे।

पूरे देश में और दुनिया में महात्मा गाँधी के दर्शन, अहिंसा पर भरोसा और सिद्धांत आदि को फैलाने के लिए गाँधी जयंती को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के नाम से भी जाना जाने लगा।

दुनिया भर में लोगों को जागरूक किया जाने लगा और इस पर आधारित विषय वस्तु को बताया जाने लगा। २ अक्टूबर गाँधी जयंती के दिन भारत को आजादी दिलाने वाले योगदान और महात्मा गाँधी के यादगार जीवन को सम्मानित किया जाने लगा।

देश में आज भी गाँधी जयंती को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। गाँधी जी की हर एक बात कोई व्यक्ति यदि अपने जीवन में उतारे, तो कोई भी व्यक्ति अहिंसा के मार्ग को अपनाने मैं सफल रहेगा।


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तो यह था गाँधी जयंती पर निबंध, आशा करता हूं कि गाँधी जयंती पर हिंदी में लिखा निबंध (Hindi Essay On Gandhi Jayanti) आपको पसंद आया होगा। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा है, तो इस लेख को सभी के साथ शेयर करे।

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