बाढ़ पर निबंध (Flood Essay In Hindi)

आज हम बाढ़ पर निबंध (Essay On Flood In Hindi) लिखेंगे। बाढ़ पर लिखा यह निबंध बच्चो (kids) और class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए लिखा गया है।

बाढ़ पर लिखा हुआ यह निबंध (Essay On Flood In Hindi) आप अपने स्कूल या फिर कॉलेज प्रोजेक्ट के लिए इस्तेमाल कर सकते है। आपको हमारे इस वेबसाइट पर और भी कही विषयो पर हिंदी में निबंध मिलेंगे, जिन्हे आप पढ़ सकते है।


बाढ़ पर निबंध (Flood Essay In Hindi)


प्रस्तावना

सौरमंडल में हमारी पृथ्वी एक ऐसा ग्रह है, जिसमें जीवन संभव है। हमारी पृथ्वी को नीला ग्रह भी कहा जाता है। भौगोलिक दृष्टिकोण से जीवन के लिए यहां पर सारी सुविधा उपलब्ध है। पृथ्वी का वायुमंडल ऐसा बना है कि जिसमें सभी प्रकार के जीव – जंतु पनप सकते हैं।

पृथ्वी में लगभग 70% हिस्सा पानी है तथा 30% हिस्सा स्थल है। यदि हम देखें तो सबसे ज्यादा पृथ्वी में पानी की मात्रा है। पृथ्वी अपने आप में एक अनोखा ग्रह है, आए दिन प्राकृतिक तरीके से कोई ना कोई घटनाएं होती रहती है। जैसे ज्वालामुखी, भूकंप, बाढ़ आदि।

परंतु कुछ ऐसी भी घटनाएं होती है जिनका जिम्मेदार मनुष्य होता है। जैसे किसी भी नदी के ऊपर बांध बना दिया जाता है और उसमें ज्यादा बारिश का पानी इकट्ठा होने के कारण बाढ़ भी आ जाती है, जो आम जनता के लिए विनाशकारी साबित होता है।

बाढ़ एक ऐसी समस्या है जिसके वजह से जन, धन तथा जानवरों का भी नुकसान होता है। जब कुछ ही समय में अत्यधिक वर्षा हो जाती है और जल का स्तर नदी अथवा तालाबों में बढ़ जाता है जिस कारण आसपास का क्षेत्र पानी में जलमग्न हो जाता है, इस स्थिति को बाढ़ कहते हैं।

कहा जाता है कि जल ही जीवन है, जल के बिना कुछ भी पृथ्वी में संभव नहीं है। परंतु एक उचित ढंग से जल का इस्तेमाल करें तो, एक उचित ढंग से जल का इस्तेमाल करें तो वह जीवन को सवारता है। परंतु उसकी मात्रा बढ़ जाए तो वह एक विनाशकारी बाढ़ का रूप धारण कर लेता है।

बाढ़ एक प्राकृतिक तथा कृत्रिम आपदा है। जब अत्यधिक वर्षा होने के कारण नदियों तथा तालाबों का पानी अचानक बढ़ जाता है। जिससे वह अपने जल क्षेत्र को संभाल नहीं पाते हैं, तो आसपास के इलाकों में पानी भर जाता है। इस भरा वाले क्षेत्र को बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र कहते हैं, तथा पानी के वजह से हुई घटना को बाढ़ कहते हैं।

बाढ़ में इतनी गति होती है कि उसके रास्ते में चाहे जो भी आए जैसे घर, इमारत, बस, मनुष्य, जीव जंतु आदि सभी को नष्ट कर देती है। इसके वजह से कई हानियां मनुष्य को उठानी पड़ती है।

बाढ़ कई प्रकार से आ सकती है, जैसे बांध टूटने के कारण, बादल फट जाने के कारण तथा वनों की हद से ज्यादा कटाई, बढ़ता हुआ प्रदूषण आदि बाढ़ के कारक है। इनके वजह से बाढ़ आते ही रहती है।

बाढ़ के कारण

वैसे तो बाढ़ मनुष्य तथा प्रकृति के कारण आती है। इन्हें की गतिविधियों के चलते हुए बाढ़ की संभावना बनी रहती है बाढ़ उन इलाकों में ज्यादा आती है, जहां पर अधिक मात्रा में वर्षा होती है। बाढ़ के निम्नलिखित कारण है –

अधिक वर्षा

यह सबसे महत्वपूर्ण कारण है। जब भी अधिक वर्षा होती है तो जलभराव की समस्या उत्पन्न हो जाती है। नदी के जल धारण क्षमता से अधिक जल भर जाता है और आसपास के इलाके पानी में डूब जाते हैं।

इसी तरह बांध की जल धारण क्षमता से अधिक जल भर जाता है, तो वह बांध टूट जाता है। जिससे आसपास के गांव शहर जलमग्न हो जाते हैं। यह स्थिति केवल वर्षा ऋतु में ही संभव है परंतु उन इलाकों में यह अक्सर होता है जहां पर पहाड़ तथा पर्वत ज्यादा होते हैं।

बादल का फटना

यह 2007 में उत्तराखंड केदारनाथ में हुई एक घटना का उदाहरण है। जब उत्तराखंड में बादल फट गया था और कुछ ही समय में अत्यधिक बारिश हो गई थी। जिस वजह से पहाड़ी क्षेत्रों की मिट्टी बारिश के साथ बहकर मैदान की ओर आने लगी और तेजी से अपने साथ मलबा, पेड़ पौधे तथा अन्य पत्थर लाकर एक जगह इकट्ठे करने लगी।

इससे नदी में उफान आ गया और आसपास का इलाका इसके चपेट में आ गया, जिससे लगभग 1 लाख लोग प्रभावित हुए थे। बादल फटना ज्यादातर पहाड़ी क्षेत्रों में ही होता है, इसीलिए इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि जब भी पहाड़ी इलाके में घर बनाए तो थोड़ा ध्यान देकर बनाएं और हद से ज्यादा पहाड़ों का दोहन ना करें।

समुद्री बाढ़

समुद्री बाढ़ को हम एक तरह से सुनामी भी कह सकते हैं। सुनामी का कारण यह होता है कि अचानक समुद्र में किसी चक्रवात तूफान या समुद्र के अंदर तेज भूकंप आ जाने के कारण समुद्र में ऊंची ऊंची लहरें उठती है।

जिस वजह से समुद्र के आसपास का इलाका पानी में डूबने लगता है और यही पानी गांवों तथा शहरों की ओर जाने लगता है। जिस वजह से बाढ़ जैसी समस्या उत्पन्न हो जाती है। यह समस्या उन इलाकों में अक्सर होती है, जहां पर पेड़ों की संख्या कम होती है तथा समुद्री किनारे से शहर अथवा गांव नजदीक होते हैं।

भारत में सबसे ज्यादा केरल, उड़ीसा, आंध्र प्रदेश आदि राज्यों में जो समुद्र के किनारे हैं वहां पर यह समस्या अक्सर देखी गई है।

बांध का टूटना

बांध का टूटना भी बाढ़ जैसी समस्या को उत्पन्न करता है। जब भी बांध बनाए जाते हैं तो इस बात को ध्यान में रखकर बनाते हैं कि वह तीन ओर से पहाड़ी इलाके से घिरा हो और एक ओर से मानव निर्मित बाउंड्री बनाई जाती है, जो पानी के हिस्से को रोक के रखता है।

परंतु तेज बारिश हो जाने की वजह से बांध का जलस्तर बढ़ने लगता है। उसकी जल धारण क्षमता के अनुसार अधिक जल इकट्ठा होने लगता है और उसकी मानव निर्मित बाउंड्री उतनी सक्षम नहीं होती है और बांध टूट जाता है।

इसका यह भी कारण होता है कि भ्रष्टाचार और खराब निर्माण सामान का इस्तेमाल करके बांध बनाया जाता है। जिसकी बाउंड्री कमजोर होती है और वह जल धारण क्षमता से कम आनी ही धारण कर पाता है और उतने पानी में ही टूट जाता है। जिसमें आसपास के इलाके पूर्ण तरह डूब जाते हैं। परंतु यह समुद्री बाढ़ से कम प्रभावी है।

जलवायु परिवर्तन

दुनिया की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक जलवायु परिवर्तन भी है। उसके वजह से इंसानों को तो समस्या होती ही है, साथ ही जानवर भी इससे प्रभावित हुए हैं। जलवायु परिवर्तन की वजह से सबसे ज्यादा प्रभावित किसान है, क्योंकि बेमौसम में बारिश हो जाती है और बे मौसम में ही सूखा पड़ जाता है।

जिस वजह से कई जगह पर बहुत अधिक वर्षा होती है और कुछ क्षेत्रों में सूखा पड़ जाता है। जिन क्षेत्रों में अधिक वर्षा होती है वहां पर बाढ़ जैसी समस्या उत्पन्न हो जाती है, हाल ही के दिनों में उत्तर प्रदेश तथा बिहार के क्षेत्रों में यह घटना देखी गई है।

प्लास्टिक प्रदूषण

इस प्रदूषण से भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया जूझ रही है। यह इतनी बड़ी समस्या है कि इससे समुद्र भी अछूता नहीं है। समुद्र में रहने वाले जीव जंतु में भी प्लास्टिक के कारण समस्या उत्पन्न हो रही है। मनुष्य सारा प्लास्टिक समुद्र की गहराइयों में फेक देता है, जिससे वह समुद्री जीव में फसने लगता है, जिससे उनकी मौत हो जाती है।

यह एक बार का भी कारण है, क्योंकि नदियों में प्लास्टिक की मात्रा बढ़ने लगती है और वह उतनी मात्रा में पानी नहीं निकाल पाते है और अचानक पानी का स्तर बढ़ जाता है। जिस वजह से आसपास के क्षेत्र पानी में जलमग्न हो जाते हैं और बाढ़ आ जाती है।

बाढ़ के दुष्परिणाम

जल प्रदूषण

बाढ़ आने के बाद सबसे ज्यादा अगर समस्या उत्पन्न होती है तो वह जल की गुणवत्ता खराब होने से है। जब भी बाढ़ आती है तो स्वच्छ पानी में गंदे नालों का पानी मिल जाता है और उस पानी में रसायन तथा अन्य हानिकारक पदार्थ मिल जाते हैं, जो मनुष्य तथा जानवरों के लिए हानिकारक होता है और उसको पीने से मृत्यु हो जाती है।

फसलों का खराब होना

बाढ़ के कारण किसानों को भी नुकसान होता है, जिन इलाकों में बाढ़ आती है उसमें वही गई फसल खराब होने लगती है। ऐसा इसलिए होता है क्योकि अधिक मात्रा में पानी बढ़ जाने के कारण उस इलाके में लगाई गई फसलें अधिक पानी के कारण खराब हो जाती है, इससे किसानों को आर्थिक रूप से काफी क्षति होती है।

मानव तथा जानवर की हानि

बाढ़ के कारण कई मनुष्य इसमें बह जाते हैं और उनमें डूबकर मृत्यु हो जाती है। इसी तरह से जानवरों के साथ भी होता है उनके चारों तरफ पानी होता है, क्योंकि जानवर ज्यादा देर नहीं रह सकता है इसीलिए वहीं पर उनकी मौत हो जाती है।

ज्यादा दिनों तक पानी भरे रहने के कारण गंदे पानी के वजह से बीमारियां उत्पन्न होने लगती है और इसका सीधा असर जानवर तथा मनुष्य पर पड़ने लगता है। जिससे उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ता है और मृत्यु भी हो जाती है।

वनस्पति का नष्ट होना

बाढ़ की वजह से वनस्पतियों को भी काफी नुकसान सहन करना पड़ता है। यह सबसे ज्यादा पहाड़ी इलाके में होता है, वहां पर बाढ़ की वजह से भूस्खलन होने लगता है और बहुमूल्य वनस्पति पानी के साथ भर कर नष्ट हो जाते है।

बाढ़ से बचाव के उपाय

  • जब भी बाढ़ आती है, तो ऊँचे स्थानों पर चले जाए, दूषित पानी ना पिए, पानी को उबालकर पिए ताकि उस में मिले हुए हैं हानिकारक बैक्टीरिया मर जाए।
  • बाढ़ के दौरान प्रशासन के द्वारा कुछ चेतावनीया दी जाती है, उन चेतावनी यों को नियमित रूप से निर्वहन करें।
  • बाढ़ में फंसने के बाद अपने घर के छत पर निकल कर प्रशासन द्वारा दी जाने वाली सेवाओं का लाभ ले और उन्हें यह बताएं कि हम इस जगह पर फंसे हुए हैं। ऐसा उन्हें संकेत दे इस तरह से आप बाहर से बच सकते हैं।

निष्कर्ष 

बाढ़ एक प्राकृतिक घटना है जिसे मनुष्य संभाल नहीं सकता है। परन्तु अगर हम पानी का इस्तेमाल सही से करे और बाढ़ जैसी आपदाओं से बचने के लिए पहले से ही सतर्क रहे, तो हम बाढ़ के दुष्प्रभाव से खुद को बचा सकते है।

हमे उन सभी बातो पर गौर करना चाहिए और उन्हें सुधारने की कोशिश करनी चाहिए, जिनसे बाढ़ की समस्या उत्पन्न होती है। बाढ़ के वजह से बाढ़ ग्रस्त लोगो को बहुत आर्थिक और शारीरिक नुकसान पहुँचता है, ऐसे में हमे उनकी हर संभव मदद करनी चाहिए जो हम कर सकते है।


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तो यह था बाढ़ पर निबंध, आशा करता हूं कि बाढ़ पर हिंदी में लिखा निबंध (Hindi Essay On Flood) आपको पसंद आया होगा। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा है, तो इस लेख को सभी के साथ शेयर करे।

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