दहेज़ प्रथा एक अभिशाप पर निबंध (Dahej Pratha Essay In Hindi)

आज हम दहेज़ प्रथा एक अभिशाप पर निबंध (Essay On Dahej Pratha Ek Abhishap In Hindi) लिखेंगे। दहेज़ प्रथा पर लिखा यह निबंध बच्चो (kids) और class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए लिखा गया है।

दहेज़ प्रथा पर लिखा हुआ यह निबंध (Essay On Dahej Pratha In Hindi) आप अपने स्कूल या फिर कॉलेज प्रोजेक्ट के लिए इस्तेमाल कर सकते है। आपको हमारे इस वेबसाइट पर और भी कही विषयो पर हिंदी में निबंध मिलेंगे, जिन्हे आप पढ़ सकते है।


दहेज़ प्रथा एक अभिशाप और सामाजिक कलंक पर निबंध (Dahej Pratha Essay In Hindi)


प्रस्तावना

दहेज़ प्रथा एक कुप्रथा है जो सदियों से चली आ रही है। यह कुप्रथा एक अभिशाप से कम नहीं है। दहेज़ प्रथा की वजह से ना जाने कितनी नयी दुल्हनों और महिलाओं ने अपनी जान गवाई है। दहेज़ यानी शादी के वक़्त या उससे पहले लड़की वालो की तरफ से दिए जाने वाले कीमती उपहार और नकद राशि, कार इत्यादि महंगी चीज़ें।

दहेज़ प्रथा कई लोगो के लिए आम बात है, मगर दहेज़ प्रथा के कारण कितने मासूम महिलाओं को हिंसात्मक घटनाओ का सामना करना पड़ा है। दहेज़ प्रथा के विरूद्ध सरकार ने सख्त नियम बनाये है। लेकिन फिर भी आज बहुत से जगहों में दहेज़ प्रथा का चलन है जो बिलकुल गलत है।

दहेज़ लेना और देना दोनों गलत है। आजकल बहुत से घरो में बेटियों के जन्म के समय से माता -पिता को चिंता सताती है कि विवाह के वक़्त दहेज़ कितना देंगे? लोग इसलिए लड़कियों के जन्म पर दुखी हो जाते है और लड़कियों को ताने सुनने पड़ते है।

माता -पिता लड़कियों के शिक्षा के लिए पैसे नहीं बल्कि कई साल पहले से दहेज़ के लिए रूपए जोड़ना शुरू करते है। दहेज़ प्रथा देश की उन्नति में बाधक बन रहा है। यह कुप्रथा नारियों का अपमान और मानसिक उत्पीड़न कर रहा है। दहेज़ प्रथा देश की उन्नति पर लगा एक कलंक है, जिसे मिटाना अति आवश्यक हो गया है।

दहेज़ प्रथा एक गंभीर समस्या

देश की कई समस्याओं में से दहेज़ प्रथा एक गंभीर समस्या है, जिसे जड़ से उखाड़ फेकना ज़रूरी हो गया है। कब तक दहेज़ प्रथा के कारण लड़की और लड़कीवाले अपमानित जीवन जीयेंगे। यह एक महामारी की तरह देश में फैल गया है, इसे रोकना अत्यंत अनिवार्य है।

कन्या भ्रूण हत्या जैसे अपराध

दहेज़ प्रथा इस प्रकार समाज में प्रचलित हो गयी है, कि लोग नहीं चाहते उनके घर पर बेटी पैदा हो। बेटी पैदा होने पर उन्हें दहेज़ के लिए पैसा जोड़ना पड़ेगा, इसलिए माता पिता लड़की के जन्म होने से पहले माँ की कोख में अपने बच्चे को मार देते है। यह एक निंदनीय अपराध है और लड़कियों के प्रति लोगो की गलत मानसिकता दर्शाता है।

दहेज़ प्रथा का आरम्भ और नाजायज़ मांग

पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक पहले लड़की के माता पिता बेटी के विदाई के वक़्त कुछ उपहार दिया करते थे। इसमें लड़के वालो की कोई मांग नहीं हुआ करती थी। विवाह को एक शुभ बंधन माना जाता है। उस समय लड़के वाले स्वार्थी होकर कीमती वस्तुओं की मांग नहीं किया करते थे।

जैसे जैसे वक़्त बीतता गया, हिन्दू धर्मो में दहेज़ प्रथा ने एक अलग ही रूप धारण कर लिया। आज लड़के वाले विवाह से पहले लाखो रूपए नकद, गहने, गाड़ी इत्यादि महंगे चीज़ो की मांग लड़की वालो से करते है। कई जगहों पर लड़की वालो को धमकी दी जाती है कि अगर मांग पूरी नहीं की गयी तो विवाह नहीं होगा।

लड़कियों पर अत्याचार

जब दहेज़ की मांग लड़के वालो के अनुसार पूरी नहीं होती है, तो वह विवाह के पश्चात महिलाओं का शोषण करते है। आये दिन दहेज़ के लिए महिलाओं का मानसिक उत्पीड़न किया जाता है, ताकि वह अपने घर से और अधिक दहेज़ उन्हें लाकर दे। कुछ लड़के वाले दहेज़ तुरंत ना मिलने पर महिला को शादी के मंडप पर छोड़ देते है। यह एक कानूनी अपराध है।

दहेज़ प्रथा के बुरे परिणाम

अगर लड़की वाले विवाह के मौके पर मुंह माँगा दहेज़ ना दे पाए, तो विवाह के पश्चात लड़कियों का ससुराल में जीना दुश्वार हो जाता है। लड़कियों की जिंदगी नरक बन जाती है।लड़कियों के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है।

कभी – कभी हालत इतने गंभीर हो जाते है कि समाज के डर से वह अपने घर वापस नहीं जाती है और आत्महत्या कर लेती है। दहेज़ प्रथा के कारण कई नव वधुओं की जिन्दगी तबाह हो गयी है।

कुछ नरक जैसे ससुराल में पर्याप्त दहेज़ ना मिलने के कारण लड़कियों को जलाकर मार दिया जाता है। ऐसे अपराधों की हम कड़े शब्दों में निंदा करते है। लेकिन सरकार को इसके विरुद्ध ठोस कदम उठाने होंगे।

रूढ़िवादी सोच और पुराने रिवाज़

कुछ लोग दहेज़ प्रथा जैसे कुप्रथाओ को रिवाज़ मानकर चलाते है। ऐसे लोग लड़की वालो पर विवाह के समय दहेज़ देने के लिए दबाव डालते है। परंपरा के नाम पर लड़की और लड़की वालो का मानसिक शोषण होता है।

पुराने रीति रिवाज़ में पहले लोग अपने मुताबिक दहेज़ देते थे। लेकिन आजकल लड़के वालो के लिए दहेज़ लेना एक व्यापार सा बन गया है। ऐसे सोच वाले लोगो को दहेज़ में जितना गहना और पैसा मिलता है, उतना वह गर्व महसूस करते है।

आज की दहेज़ प्रथा

दहेज़ प्रथा एक गंदे मछली की तरह तालाब रूपी समाज को गन्दा कर रही है। दहेज़ लेने वाले को लज्जा आनी चाहिए, वह ऐसा अपराध करते है और उसको परंपरा की चादर पहनाते है।

आजकल लड़के वाले दहेज़ ना मिलने पर विवाह से ही मना कर देते है। आजकल के विवाहो में लड़के की आय जितनी अधिक होती है उसके अनुसार उसे उतना दहेज़ मिलता है। दहेज़ प्रथा गरीब, मध्यम वर्गीय और सभी वर्गों में प्रचलित हो गया है।

शिक्षा की कमी

इस देश में काफी लोग अशिक्षित होने के कारण दहेज़ प्रथा की इस भयावह रूप को समझ नहीं पाते है। वह समझते है दहेज़ देना उनका पारम्परिक कर्त्तव्य है। अशिक्षित होने के कारण ऐसे लोग आपराधिक और लालची लोगो की मनसा को समझ नहीं पाते है।

कमज़ोरियों का फायदा

आज कल हर परिवार को सुन्दर, काबिल और सर्वगुण संपन्न लड़की चाहिए। अगर किसी लड़की में कोई कमियां हो जैसे सांवला रंग या किसी प्रकार की कोई समस्या होती है, तो उसका विवाह जल्द नहीं हो पाता है।

ऐसे में लड़की वाले दहेज़ देने का प्रयास करते है, ताकि लड़की का विवाह हो जाए। इससे दहेज़ प्रथा को प्रोत्साहन मिलता है। दहेज़ प्रथा अपनी मज़बूत जड़े और शाखाएं फैला रही है, इन जड़ो को उखाड़ फेंकने का समय आ गया है।

रोजगार का ना होना

बहुत सारे युवक हमारे देश में बेरोजगार है। ऐसे बेरोजगार युवक शादी में लड़की वालो से दहेज़ मांगते है। दहेज़ में लाखो रुपयों की मदद मांगते है, ताकि कोई व्यापार में निवेश कर सके या शादी के पश्चात ख़ुशी और आराम के साथ उन पैसो से गुजारा कर सके।

इन गैर जिम्मेदार युवको को सबक सिखाने की ज़रूरत है ना की धन देने की। ऐसे लोग कभी नौकरी अथवा व्यापार नहीं करते है। लड़की वालो के पैसे पर सारी जिंदगी गुजारना चाहते है।

निष्कर्ष

दहेज़ प्रथा के कारण महिलाओं पर अत्याचार हो रहे है। आये दिन खबरों में दहेज़ के लिए महिलाओं की हत्याएं की जा रही है। घर परिवार में ऐसे आपराधिक षडयंत्रो के लिए गुनहगारों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

हम सभी को मिलकर इस दहेज़ प्रथा नामक कुप्रथा को खत्म करना होगा, जो कई महिलाओं के सर्वनाश के लिए जिम्मेदार है। जब नारी को उसका उचित सम्मान मिलेगा तब देश भी एक उन्नत देश कहलायेगा। इक्कीसवी शताब्दी में देश और अधिक प्रगति कर रहा है, इसलिए ऐसी कुप्रथाओ को खत्म करने की ज़रूरत है।


तो यह था दहेज़ प्रथा एक सामाजिक कलंक पर निबंध (Dowry System Essay In Hindi), आशा करता हूं कि दहेज़ प्रथा एक सामाजिक कलंक पर हिंदी में लिखा निबंध (Hindi Essay On Dahej Pratha Ek Samajik Kalank) आपको पसंद आया होगा। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा है, तो इस लेख को सभी के साथ शेयर करे।

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