गाय पर निबंध (Cow Essay In Hindi Language)

आज के इस लेख में हम गाय पर निबंध (Essay On Cow In Hindi) लिखेंगे। गाय विषय पर लिखा यह निबंध बच्चो और class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए लिखा गया है।

गाय पर लिखा हुआ यह निबंध (Essay On Cow In Hindi) आप अपने स्कूल या फिर कॉलेज प्रोजेक्ट के लिए इस्तेमाल कर सकते है। आपको हमारे इस वेबसाइट पर और भी कही विषयो पर हिंदी में निबंध मिलेंगे, जिन्हे आप पढ़ सकते है।


गाय पर निबंध (Cow Essay In Hindi Language)


प्रस्तावना

गाय जिसे हिंदू धर्म में गौ माता कहकर सम्मान दिया जाता है, अत्यधिक उपयोगी पालतू पशु है। गाय पूरे विश्व में पाई जाती हैं। हिंदू धर्म में मान्यता है कि गाय में 322 करोड़ देवी देवता निवास करते हैं, इसलिए भारतवासी गाय को माता मानकर उनकी सेवा पूजा करते हैं।

गाय भगवान श्री कृष्ण जी की प्रिय थीं और वे रोज गाये चराने जाया करते थे। राष्ट्र की डेयरी विकास बोर्ड की वर्ष 2012 की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारतदेश में लगभग 190 मिलियन गाये पाई जाती हैं। सारी दुनिया में सबसे अधिक गाये हमारे भारत देश में ही मिलती हैं।

आज हम आपको गायों के महत्व और विशेषताओं के बारे में बताने जा रहे हैं, जिससे आपको हमारी गौ माता के बारे में विस्मित कर देने वाली जानकारियां मिलेंगी।

पुराने समय से ही दूसरे पालतु पशुओं की तुलना में गाय को अधिक महत्व दिया जाता है। आज भी बहुत से लोग रोजाना खाना बनाते समय पहली रोटी गाय के लिए बनाते हैं। वर्तमान समय में गायों को पालने का चलन कम हो गया है।

लेकिन इनकी धार्मिक महत्ता में कोई कमी नहीं आयी है, पिछले कुछ समय से तो लोग भारत में गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने की भी मांग उठा रहे हैं। धार्मिक ग्रंथों में लिखा है “गावो विश्वस्य मातर:” अर्थात गाय विश्व की माता है।

गाय सदा से ही मानवजाति के लिए हर प्रकार से लाभकारी रही है इसीलिए कहा गया है –

जन-जन घर पूजी जाती है।

जिस खूंटे पर बंधी रहती है,

सुख-समृद्धि सब लाती है।

गाय माता की शारीरिक संरचना

सामान्यतः गाय सारे देशों में एक जैसी ही होती हैं, लेकिन उनकी नस्ल और कद काठी थोड़ी अलग हो सकती है। गाय के शरीर का आकार काफी बड़ा होता है और उनका वज़न करीब 720 किलोग्राम से भी ज्यादा होता है।

कई गाये ज्यादा दूध देने वाली होती हैं और कुछ कम दूध देती हैं। वह हमें स्वस्थ और मजबूत बनाने के लिए दूध देती है। दूध हमारी प्रतिरक्षा शक्ति को बढ़ाकर हमें बीमारियों और संक्रमणों से दूर रखता है।

गाय के चार पैर होते हैं और उसके चारों पैरों में खुर्र होते हैं, जिसकी मदद से वह किसी भी प्रकार की पथरीली जगह पर चलने में समर्थ होती है। इनके मुख का आकार ऊपर से चौड़ा और नीचे से पतला होता है।

गाय की एक लम्बी पूंछ होती है जिससे वो अपने शरीर पर से मक्खी और मच्छर भगाती है। गाय के दो बड़े आकार के कान होते हैं जिनसे वो हर तरह की आवाजें सुन पाती है। इनकी बड़ी सी दो सुंदर आंखें होती हैं।

गाय माता के चार थन होते हैं और एक लंबी गर्दन होती है। ये बहुत ज्यादा समय तक जुगाली करके भोजन को चबाती रहती हैं। इनकी एक नाक और दो बड़े से सींग होते हैं।

गाय माता का पौराणिक और धार्मिक महत्व

गाय की पूजा के लिये गोपाष्टमी का त्यौहार भी हमारे भारत में मनाया जाता है। गायों की सेवा करने से ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। पुराणों के अनुसार ऐसा माना जाता है कि गाय के प्रत्येक अंग में देवता निवास करते हैं। आप किसी कारणवश तीर्थ जाने से असमर्थ हैं तो गाय की सेवा करें, आपको सभी तीर्थों का पुण्य प्राप्त हो जाएगा।

ऐसी भी मान्यता है कि गाय की सेवा के साथ-साथ उसकी साफ-सफाई का भी ध्यान रखें, उन्हें समय से भोजन कराएं, उनके आसपास के वातरवरण को साफ-सुथरा रखें और उन्हें मक्खी-मच्छर से भी बचाएं, तो उस व्यक्ति का कपिला गाय के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।

गाय माता की उपयोगिता

गाय को पाला जाता है और इसका दूध निकालकर बेचा जाता है। गाय के दूध में बहुत ताकत होती है। गाय एक बार में 5 से 10 लीटर तक दूध देती है, फिर भी अलग अलग नस्ल की गाय अलग मात्रा में दूध देती है। इनके दूध से पनीर, मक्खन, घी, छाछ और मिठाइयां आदि बनाए जाते हैं।

गाय के गोबर को सुखा दिया जाता है, फिर इसे ईंधन की तरह उपयोग करते हैं। किसान लोग इसके गोबर का प्रयोग खेतों में खाद की तरह भी करते हैं। पुराने समय में गायों को खेतो में हल जोतने के लिए भी उपयोग किया जाता था।

गाय जीवन पर्यन्त मानवों को लाभ पहुंचाती है और मरने के बाद इसकी खाल से चमड़े की तरह उपयोग में लाकर बहुत से चीज़े बनाते हैं। साथ ही इनकी हड्डियों से भी विशिष्ट कृतियां बनाई जाती हैं।

इनके गोमूत्र को बहुत पवित्र मानते हैं। गोमूत्र का उपयोग आयुर्वेदिक औषधियों में भी किया जाता है। जिससे अनेक प्रकार की बीमारियां मूल से खत्म हो जाती हैं। मनुष्य के जीवन स्तर को समृद्ध बनाने में गाय की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

गाय माता का वैज्ञानिक महत्व

गाय का सिर्फ आर्थिक और धार्मिक रूप से ही महत्व नहीं है, कई वैज्ञानिक तथ्य ऐसे भी हैं, जिनसे गाय महत्ता का पता चलता है। आजकल  दूध, दही और घी भैंस का ज्यादा लिया जाता है, क्योंकि वो गाय के दूध से थोड़ा सस्ता होता है।

लेकिन अगर गुणों की बात करें तो गाय का दूध ज्यादा अच्छा होता है। गाय के दूध से ज्यादा ताकत तो मिलती ही है और साथ ही इसमें वसा भी कम होती है। जबकि भैंस के दूध में वसा अधिक होती है। गाय के दूध से बनी सभी चीज़े बहुत पौष्टिक होती हैं।

ऐसी भी मान्यता है कि गाय ऑक्सीजन लेती है और ऑक्सीजन ही छोड़ती है। गौमूत्र में ऐसे बहुत से तत्व होते हैं जिनसे दिल के रोगियों को लाभ पहुंचता है। गौमूत्र में, सोडियम, यूरिक एसिड, नाइट्रोजन, फास्फेट, यूरिया, पोटेशियम और दूध देते समय हुए गौमूत्र में लेक्टोज की मात्रा ज्यादा होती है।

जो चिकित्सा के क्षेत्र में लाभदायक है, गोबर की खाद से भूमी उपजाऊ बनती है।

विभिन्न प्रकार की गाय

गाय कई तरह की होती हैं। कई गाय ज्यादा दूध देने की क्षमता रखती हैं तो कई ताकतवर होने के कारण खेतो में उपयोगी है। हमारे भारत देश में कई प्रकार की गाय की नस्लें पाई जाती हैं।

जैसे साहीवाल प्रजाति, गिर प्रजाति, लाल सिंधी प्रजाति, राठी नस्ल, कांकरेज, थारपरकर प्रजाति दज्जल और धन्नी प्रजाति, मेवाती, हासी-हिसार प्रजाति आदि। इनमें से सहिवाल और गिर काफी अच्छी और ज्यादा दूध देने वाली नस्लें हैं।

गायों का संरक्षण आवश्यक 

गाय हमारी माता है और इनकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। आजकल कई लोग अपने घर में गाय के लिए रोटी रखते है। बहुत सी जगहों पर कई संस्थाएं गौशाला बनाकर पुण्य का काम कर रही है, जो कि प्रशंसा के योग्य है।

इसके अलावा यांत्रिक कत्लखानों को बंद करने के आंदोलन, मांस निर्यात नीति का जोरो से विरोध चल रहा है। गौ रक्षा और पालन बढ़ाने के लिए सामाजिक धार्मिक संस्थाएं और गौ सेवक निरंतर प्रयास कर रहे हैं।

कई वर्षों से यह स्थिति बनी हुई है कि गांव में रहने वाले किसान स्वयं अपने गौ-वंश को गौशाला में छोड़ कर चले जाते हैं। गौशालाओं में ऐसी परिस्थतियां है कि वहां स्थान न होने और बहुत ज्यादा गायों की उपस्थिति के कारण उनकी देखभाल करना कठिन हो गया है।

अगर वास्तव में हमें गायों की सुरक्षा करनी है तो कुछ ऐसे उपाय किए जाने चाहिए, विचार जिनसे किसान फिर से गाय पालन करने के लिए प्रोत्साहित हों। इसके लिए गाय पालक किसानों को हर महिने गाय के लिए कुछ दान दिया जाना चाहिए।

अगर कोई किसान यांत्रिक खेती की जगह बैलों पर निर्भर है, तो ऐसे किसानों को दान या मुफ्त बीज और खाद दिए प्रदान की जाये।

गौ हत्या पर रोक

गाय को हिंदू धर्म में पवित्र माना जाता है इसलिए गौ-हत्या को वर्जित बताया गया है। कई धार्मिक कारणों और पशु संरक्षण के लिये प्रयास करने वाली संस्थाओं द्वारा भी समय-समय पर यह मुद्दा उठाया जाता है |

कई स्थानों पर गाय की हत्या रोकने के लिए सख्त कानून बनाए गए हैं। महाराष्ट्र में वर्ष 2015 में गोमांस पर प्रतिबंध लगाया गया। इसके बाद से देश में मांसाहार और गो-हत्या के नाम पर हिंसा का माहौल बनाने का संदेश भी दे दिया गया।

गुजरात में गौहत्या करने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा। दोष सिद्ध होने पर उम्रकैद की सजा दी जाएगी। इसके साथ ही गाय की तस्करी करने वालों के लिए भी 10 साल की सज़ा का प्रावधान है।

उपसंहार

गाय की महिमा को शब्दों में नहीं कहा जा सकता। मनुष्य अगर गौमाता को महत्व देना सीख ले तो गौमाता उनके दुख दूर कर देती है। गौओं के साथ मन से भी द्रोह न करें, उन्हें सदा सुख पहुंचाएं, उनका दिल से सत्कार करें और नमस्कार आदि के द्वारा उनका पूजन करते रहें।

जो मनुष्य इन बातों का पालन करता है वह जीवन में सुख एवं समृद्धि का भागी होता है। आजकल गायों के जीवन पर संकट आ गया है। हम उपयोग के बाद पॉलीथिन बैग को कचरे में फेंक देते हैं, इस कचरे को ये मूक गायें खा लेती है।

क्योंकि वे नहीं जानती की पॉलीथिन कितना हानिकारक है। इसे खाकर उन्हें अपनी ज़ान गंवानी पड़ती है। गाय के दूध में ऐसे सारे तत्व विद्यमान होते हैं, जो मानवों के जीवन के लिए आवश्यक हैं।

दूध पियें हम इसका अमृत, गाय ने हमको पाला.

हर घर में हो एक गाय और गाँव-गाँव गौशाला…

गायों को बचाना हमारा दायित्व है, हम सबको इनके संरक्षण हेतु दृढ़ संकल्पित होना होगा।


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तो यह था गाय पर निबंध, आशा करता हूं कि गाय विषय पर हिंदी में लिखा निबंध (Hindi Essay On Cow) आपको पसंद आया होगा। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा है, तो इस लेख को सभी के साथ शेयर करे।

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