बाल श्रम/मजदूरी पर निबंध (Child Labour Essay In Hindi)

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बाल मजदूरी पर निबंध (Child Labour Essay In Hindi)


प्रस्तावना

हमारे देश की जितनी भी जनता है उतनी ही समस्याएं है। ऐसा कोई इंसान नहीं है जिसे समस्या ना हो, देश का प्रत्येक स्वरूप किसी ना किसी प्रकार की समस्या है। हमारे देश में खाद्य समस्या, महंगाई की समस्या, जनसंख्या की समस्या, बेरोजगारी की समस्या, दहेज प्रथा की समस्या, सती प्रथा की समस्या ,जाति प्रथा की समस्या ,भाषा की समस्या, क्षेत्रवाद की समस्या ,सांप्रदायिकता की समस्या आदि न जाने कितने ही समस्या है।

जिनसे आज विकास का वह स्वरूप और रेखा दिखाई नही पड़ती जिसकी कल्पना आजादी मिलने के बाद हमने की थी। जो कुछ भी हो हमारे देश में अन्य समस्याओं की तरह बाल श्रमिकों की समस्या प्रतिदिन बढ़ती हुई, हमारे चिंतन विषय का एक प्रधान कारण बनी है। इसका समाधान करना हमारा परम कर्तव्य है।

बालश्रम का अर्थ

बालश्रम शब्द बाल ओर श्रम से मिलकर बना है। बाल ओर श्रम छोटे बच्चो से बाल मजदूरी करवाना है। भारत एक विकासशील देश है, भारत में 18 वर्ष की आयु में वोट डालने का अधिकार है। छोटे बच्चो से ऐसे काम करवाना जो उनके उम्र के बच्चो से नहीं करवाना चाहिए, या फिर पढाई कराने के बजाय उन्हें काम पर भेजना बाल मजदूरी कहलाती है।

बाल श्रम के प्रकार

(1) बाल्यावस्था – बहुत छोटे बच्चो से भीख मंगवाना ,चोरी करवाना आदी कार्य।

(2) किशोरावस्था – भीख, चोरी, कारखानों में काम, अनेतिक कार्य, आंतकवाद आदी कार्य।

(3) शेश्वस्था – बहुत छोटे बच्चो को गोद में लेकर भीख मांगना,आदी कार्य।

बालश्रम के कारण

(1) निर्धनता

निर्धनता वह सामाजिक अवस्था है जिसमें समाज का एक भाग अपने जीवन की आधारभूत आवश्यकताओं को भी पूरा नहीं कर पाता है और इसका कारन बेरोजगारी भी है। निर्धनता मापने की दो विधियां है जिसमे से पहली निरपेक्ष निर्धनता और दूसरी सापेक्ष निर्धनता है।

निर्धनता मापने की विभिन्न समितियां लकड़ावाला समिति, सुरेंद्र तेंदुलकर समिति, रंगराजन समिति, बेरोजगारी है। बेरोजगारी वह स्थिति है, जब देश में कार्य करने की जनशक्ति अधिक होती है और काम या कार्य करने पर राजी भी होती है, पर उन्हें प्रचलित मजदूरी दर पर कार्य नहीं मिल पाता है।

बेरोजगारी के कुछ प्रकार भी है, जैसे संरचनात्मक बेरोजगारी, घर्षणात्मक बेरोजगारी, शिक्षित बेरोजगारी, खुली बेरोजगारी, अदृश्य बेरोजगारी या छिपी हुई बेरोजगारी, मौसमी बेरोजगारी।

(2) अशिक्षित

बाल श्रम का महत्वपूर्ण कारण अशिक्षा या अशिक्षित रहना होता है। माता पिता का पड़ा लिखा ना होना और सामाजिक परिवेश का पढ़ा लिखा ना होना, बाल श्रम को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण कारण है।

(3) अधिक बच्चे

कई जाति वर्गों में अधिक से अधिक बच्चों का होना उनके लालन पालन में गिरावट लाता है और ऐसे में उनके माता-पिता उन्हें कई कार्यों में लगवा देते हैं। जैसे टायर में हवा भरबाना, होटल के बर्तन मजवाना, साग सब्जियां बिकवाना, चाय पानी होटलों में देना, चाट के ठेले पर काम करना, खिलौने बेचना जैसे आदि कार्य करवाने के लिए लगवा देते हैं।

(4) आवास की समस्या

बड़े शहरों में आवास क्षेत्र की अधिक समस्या होती है। जो लोग काम की तलाश में गांव से शहरों की ओर भागते हैं, उन्हें रहने के लिए घर नहीं मिलते। तो वह झुग्गी झोपड़ी और फुटपाथ पर रहने लगते हैं और यह समस्या बाल श्रम की अधिकता को पैदा करती हैं।

बाल मजदूरी कहा देखने को मिलती है?

(1) घरेलू कामकाज

बाल मजदूरी हमे घरो में दिखाई दे सकती है। कही बार छोटे बच्चों को घर में नौकर के रूप में रखा जाता है और उनसे झाड़ू, पोछा, बर्तन और कपडे धोने जैसे कार्य करवाये जाते है।

(2) उद्योग और कारखानों में बाल श्रम

बाल श्रम हमे उधोगों और कारखानों में देखने को मिल जाता है। कही बार बच्चो को जबरन पकड़ कर बहार देश में बाल मजदूरी करने के लिए नीच दिया जाता है और फिर उनसे कारखानों में कार्य करवाए जाते है।

(3) नशाखोरी

बाल श्रम कही बार तो बच्चे खुद से करने लगते है। बच्चे छोटे उम्र में बड़े लोगों को देखकर नशाखोरी करते हैं, जिसके लिए वह चोरी और गलत कार्य करने में लग जाते हैं। कही बार अच्छे घर के बच्चे भी घर से पैसे ना मिलने से या उन पैसो से उनकी जरूरते पूरी ना होने के वजह से बाल मजदूरी करने लगते है।

(4) खेती

बाल श्रम को हम खेती में भी बहुत बार होते देख सकते है, कही बार छोटे बालक और बालिकाओं को खेती किसानी में लगवा दिया जाता है। कही बार बच्चो की कोई मज़बूरी होती है, तो कही बार बच्चो को जबरन खेती के काम में लगा दिया जाता है।

देश में बाल श्रम की समस्या

हमारे देश में बाल श्रमिकों की समस्या क्यों है और किस प्रकार से उत्पन्न होकर आज हमारे लिए चुनौती बनी हुई हैं, इस पर विचारना बहुत ही आवश्यक और उचित जान पड़ता है।

हमारे देश में बाल श्रमिक निर्धनता की अधिकता के फलस्वरुप है। गरीबी सिर पर सवार होने के कारण बहुत से माता-पिता अपने बच्चों का लालन-पालन करने में असमर्थ हो जाते हैं। वे अपने दुखद और अभावग्रस्त जीवन के कारण अपने बच्चों का भरण पोषण के स्थान पर उनसे कुछ आय प्राप्त करना चाहते हैं।

इसलिए उन्हें किसी काम, धंधे, मजदूरी करने के लिए मजबूर कर देते हैं। इस तरह से यह बच्चे असमय में ही श्रमिक की जिंदगी बिताने लगते हैं।

बाल श्रमिकों की आयु और आंकड़े

सन 1983 को प्राप्त सूचना के अनुसार हमारे देश के जो बाल मजदूरी या बाल श्रमिक है, उनकी आयु लगभग 5 वर्ष से 12 वर्ष तक की है। इस आयु के बच्चे अनपढ़ और पढ़े-लिखे दोनों ही प्रकार के हैं। इस उम्र के बच्चे हमारे देश में करीब 6 करोड़ है।

इनमें तीन करोड़ के आसपास लड़के हैं, तो दो करोड़ से कुछ अधिक लड़कियों की संख्या है। यह बच्चे ना केवल एक राज्य क्षेत्र से संबंधित हैं, अपीतु इनका संबंध पूरे देश से है। दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि हमारे देश के बाल श्रमिक सभी भागों में छिटपुट रूप से हैं। जो एक राष्ट्रीय समस्या को उत्पन्न करने के लिए एक महान कारण बने हुए हैं।

प्राप्त आंकड़ों के अनुसार हमारे देश के विभिन्न राज्य के अंतर्गत बाल मजदूरों की संख्या अलग-अलग है। आंध्र प्रदेश में 25 लाख 40 हजार, महाराष्ट्र में 15 लाख 28 हजार, कर्नाटक में 11 लाख 25 हजार, गुजरात में 12 लाख 13 हजार, राजस्थान में 24 लाख 40 हजार, पश्चिम बंगाल में 2 लाख 57 हजार और केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली में 1 लाख 29 हजार है।

यह ध्यान देने की बात है कि ये संख्याएं इन राज्यो के स्कूली शिक्षा से संबंधित है। अगर हम समस्त देश की बाल श्रमिक की समस्या के प्रति ध्यान दें, तो हम कह पाएंगे कि हमारे देश में बाल मजदूरों की समस्या समान रूप से नहीं है।

ये बाल श्रमिक पूरे देश में है, लेकिन कहीं अधिक है तो कहीं बहुत कम है। यह समझा जाता है कि बाल श्रमिकों की संख्या हमारे  देश के उत्तरी भाग में पूरे देश की तुलना में कहीं अधिक है। उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल, मध्य प्रदेश और उड़ीसा में भी बाल श्रमिक अधिक है।

बाल मजदूर या बाल श्रमिकों की बढ़ती हुई संख्या हमारे राष्ट्र की एक व्यापक समस्या हो गई है, इसका निदान आवश्यक है। अभी हमारे लिए एक अच्छा अवसर है कि हम इस समस्या से तुरंत निजात पाने के लिए कदम उठाए ओर इस समस्या का अंत करे। यह समस्या और बड़े इससे पहले इसका अंत जरूरी है।

बाल श्रमिकों की दशा सुधारने के उपाय

बाल श्रम को पूरी तरह से हटवाने के लिए भारत सरकार ने कठोर नियम, धारा, दंड का प्रावधान बनाया है।

  • सर्व धर्म सम्मत शिक्षा – भारतीय संविधान में सर्व धर्म सम्मत शिक्षा अधिनियम अनुच्छेद 28 की व्यवस्था की गई है।
  • शिक्षा का अधिकार एवं निशुल्क शिक्षा – शिक्षा का अधिकार अनुच्छेद 21 में कहा गया है कि वर्ष 2002 में 86 संविधान संशोधन के द्वारा संविधान में अनुच्छेद 21 को जोड़ा गया है। प्रारंभिक शिक्षा को नागरिकों का मूल अधिकार बना दिया गया है। अनुच्छेद में कहा गया है कि सभी राज्य के 6 से 14 वर्ष के सभी बालकों के लिए निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा की व्यवस्था रहेगी।
  • अनुच्छेद 45 में निशुल्क शिक्षा तथा अनिवार्य शिक्षा का दायित्व राज्य सरकार को सौंपा गया था। इस धारा में यह कहा गया है की संविधान लागू होने के 10 वर्ष के अंदर राज्य में अपने क्षेत्र के सभी बालकों को 14 वर्ष की आयु होने तक निशुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने का प्रयास किया जायेगा।
  • अल्पसंख्यकों की शिक्षा – स्त्रियों बच्चों तथा पिछड़े वर्गों की शिक्षा के लिए अनुच्छेद 15 345 है।
  • गरीबों की गरीबी को समाप्त करना और गरीबी को हटाना चाहिए। गरीबों को इसके लिए हमारे देश के उच्च वर्ग ने अपनी योग्यता और अपने अनुकूल रूप से मदद करनी चाहिए।
  • भूखमरी को समाप्त करना तथा खाद्य सुरक्षा प्राप्त करना और पोषण में सुधार लाना, साथ ही सम पोषणीय कृषि को बढ़ावा देना चाहिए। जिससे भूख मरी जैसी समस्या ही हमारे देश से खत्म हो जाए ओर हमारे देश का कोई भी व्यक्ति भूखा ना सोए।
  • सर्व शिक्षा अभियान के द्वारा 6-14 वर्ष के सभी बालकों को आठवीं तक की शिक्षा निशुल्क एवं गुणात्मक प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराना चाहिए।
  • बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ को बढ़ावा देना चाहिए। क्योकि एक पुरुष जब सिक्षित होता है तो उसका पूरा परिवार शिक्षित होता है, किन्तु यदि एक महिला शिक्षित होती है तो उसका परिवार, समाज ओर पूरा देश शिक्षित होता है।

अन्य उपाय

भारत के नागरिक होने का कर्तव्य पालन करने हेतु, खासकर बच्चों पर ध्यान देना, स्कूल के आसपास असामाजिक कार्य को बंद करवाना, नशाखोरी बंद करवाना, मास हाथी जैसी दुकानों को वहां पढ़ने लिखने वाले जगह से हटवाना चाहिए। इस कार्य में साथ देने के लिए धनवान और धनवान वर्ग के लोगों को आगे आना चाहिए।

तथा बाल श्रम को देश के बाहर निकालने के लिए अपने तरफ से हो सके वह मदद करनी चाहिए, ताकि बच्चों का भविष्य सवार सके। हमारे देश में बाल श्रमिकों की दशा को सुधारने के लिए हमें सबसे पहले उनकी दुर्दशा को समझना और देखना चाहिए।

हमें यह पता लगाना चाहिए कि बच्चो को मजदूर या श्रमिक क्यों बनाया जाता हैं या वे हो जाते हैं। इस विषय में यह कह सकते हैं कि बहुत से माता-पिता अपनी निर्धनता के फलस्वरूप अपने बालकों को पूरी तरह से शिक्षा या अन्य किसी प्रकार से उनके जीवन को अच्छा नहीं कर पाते है।

वे उनकी सहायता के द्वारा अपना जीवन निर्वाह करना चाहते हैं। इसलिए बच्चे गांवों से शहरों में अपनी इस विवशता को लिए हुए जाते हैं। शहरों के कारखानों, होटलों, दुकानों इत्यादि स्थानों पर अपना भरण पोषण करते हुए अपने परिवार के लोगों की आर्थिक सहायता किया करते है।

यहां पर बच्चों की दयनीय दशा पर तनिक भी ध्यान न देते हुए उनका अत्यधिक शोषण उनके मालिक किया करते हैं। यही नही कुछ ऎसी भी सामाजिक और कठोर प्रवृति के व्यक्ति होते है, जो बच्चों को चकमा देकर उनका अपहरण करके उन्हें बेच देते हैं।

उसके बाद उन्हें ऐसी जगह पर बेचते हैं, जहां उनसे 16 से 18 घंटे तक काम लिया जाता है। या फिर उनसे भीख मंगवाया जाता है या फिर किसी और धंधे में लगा दिया जाता है।

उपसंहार

इस प्रकार हम देखते हैं कि हमारे देश के बाल मजदूर अत्यंत कस्टमय दशा को भोग रहे हैं। इनके जीवन स्तर को सुधारने और बाल मजदूर (बाल श्रमिक) की समस्या का समाधान करने के लिए सरकार को कड़े से कड़ा निर्देश लागू करना चाहिए।

इसका सहयोग हमें अवश्य देना होगा, तभी यह कार्य सार्थक होगा। हमारे देश में बाल श्रमिकों की दशा को सुधारने के लिए हमें सबसे पहले उनकी दुर्दशा को समझना और देखना होगा।

हमें यह पता लगाना होगा कि बच्चे आखिर क्यों एक बाल श्रमिक के रूप में आते हैं ओर ये श्रमिक कही दूसरी जगह से नहीं अपितु स्वयं के घर से पनपते है। इसके लिए सबसे पहले हमे हमारे देश से गरीबी को हटाना होगा, ताकि बाल श्रमिक जैसी समस्या हमारे देश से जड़ से ही ख़त्म हो जाए।


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तो यह था बाल श्रम/मजदूरी पर निबंध, आशा करता हूं कि बाल श्रम/मजदूरी एक अभिशाप पर हिंदी में लिखा निबंध (Hindi Essay On Child Labour) आपको पसंद आया होगा। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा है, तो इस लेख को सभी के साथ शेयर करे।

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