बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध (Beti Bachao Beti Padhao Essay In Hindi)

आज के इस लेख में हम बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध (Essay On Beti Bachao Beti Padhao In Hindi) लिखेंगे। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ विषय पर लिखा यह निबंध बच्चो और class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए लिखा गया है।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ विषय पर लिखा हुआ यह निबंध (Essay On Beti Bachao Beti Padhao In Hindi) आप अपने स्कूल या फिर कॉलेज प्रोजेक्ट के लिए इस्तेमाल कर सकते है। आपको हमारे इस वेबसाइट पर और भी कही विषयो पर हिंदी में निबंध मिलेंगे, जिन्हे आप पढ़ सकते है।


बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध (Beti Bachao Beti Padhao Essay In Hindi)


प्रस्तावना

बेटी, मां, बहन और पत्नी ये सभी एक महिला के ही रूप हैं, हर रूप में वो सम्माननीय है, प्रेम और आदर के योग्य है। संसार में जीवन इनकी ही वजह से संभव है और स्त्री व पुरुष के समान अधिकार है।

परन्तु आज भी शायद बहुत से लोग इस बात को समझ नहीं पाए हैं इसलिए वे बेटी और बेटे में भेदभाव करते हैं। बेटियों को हीन समझते हैं और उन्हें उनके अधिकारों से वंचित रखते हैं। किसी कवि ने ठीक ही कहा है कि –

मेहनत करते हैं बेटे

पर अव्वल आती हैं बेटियां,

रुलाते हैं जब खूब बेटे

तब हंसाती हैं बेटियां,

नाम करें न करें बेटे

पर नाम कमाती हैं बेटियां,……

आज हम इसी गंभीर और चिंतनीय विषय पर निबंध प्रस्तुत कर रहे हैं।

हमारे पुरुष प्रधान भारत देश में बालिकाओं की दशा अच्छी नहीं है। कई लोग घर में बेटी का जन्म होना अच्छा नहीं मानते और कई बार तो उन्हें जन्म लेने से पहले ही उनकी हत्या कर दि जाती है। ऐसे लोगो का मानना है कि बेटियां बोझ होती है और बेटे कमाई का साधन।

ये सिर्फ इंसानों की दकियानूसी सोच ही है, वरना आज के इस युग में महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं है। कल्पना चावला, किरण बेदी, किरण मजूमदार शॉ,पीटी ऊषा, सानिया मिर्जा, साइना नेहवाल ने भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी प्रसिद्धि प्राप्त की है।

प्रियंका चोपड़ा, ऐश्वर्या राय, लारा दत्ता, सुष्मिता सेन ने दुनिया में भारतीय सुंदरता और समझदारी का झंडा फहराया। सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों में भी महिलाओं के प्रतिशत में बहुत अधिक  बढ़ोतरी हुई है।

आज महिलाएं घरों में बंद एक अबला नहीं है बल्कि एक शक्तिशाली व्यक्त्तिव की मालकिन बन गई है। खेल, चिकित्सा, व्यापार, राजनीति, फिल्म,  वकालत जैसे सारे क्षेत्रों में महिलाओं की शक्ति साफ नजर आती है।

फिर भी कुछ तुच्छ मानसिकता के लोग बेटियों को उचित शिक्षा नहीं देते है और उन्हें घर के काम काज में लगा देते हैं, और बेटों को उच्च शिक्षा दिलाते हैं। जिसकी वजह से बालिकाओं का भविष्य अंधेरे में चला गया है।

बालिकाओं को किसी परिवारिक निर्णय या फैसले पर अपनी बात कहने का भी हक नहीं मिलता है। उनको हर वस्तु से वंचित रखा जाता है| कुछ घरों में तो बालिकाओं के साथ जैसे किसी वस्तु की तरह बर्ताव किया जाता है और उन्हें स्नेह, ममता और प्यार तो सपने में भी नहीं मिलता।

देश के कई राज्यों में लिंगानुपात अत्यधिक गिर गया है और बेटियों की संख्या दिन प्रतिदिन कम होती जा रही है। इसे देखते हुए सरकार ने एक योजना का शुभारंभ किया ताकि देश की बेटियों की स्थिति में सुधार किया जा सके। किसी ने सही कहा है –

कैसे खाओगे उनके हाथ की रोटियां,

जब पैदा ही नहीं होने दोगे बेटियां।

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान का शुभारंभ

बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना का अर्थ है कन्या शिशु को बचाइए और इन्हें शिक्षित कीजिए। हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने 22 जनवरी 2015 को बालिका दिवस के मौके पर इस योजना की शुरुआत की।

जिससे समाज में बेटियों को उनके अधिकार मिल सकें। इस योजना के लिए सरकार ने 100 करोड़ रूपए का बजट तय किया है| इस योजना की शुरुआत के समय नरेंद्र मोदी जी ने कहा कि “हम भारतीयों को घर में कन्या की जन्म को एक उत्सव की तरह मनाना चाहिए| हमें अपने बच्चियों पर गर्व करना चाहिए|”

भारत में 2001 की जनगणना में 0-6 वर्ष के बच्चों का लिंग अनुपात का आंकड़ा 1000 लड़कों के अनुपात में लड़कियों की संख्या 927 थी। जो कि 2010 की जनगणना में घटकर 1000 लड़कों के अनुपात में 918 लड़कियां हो गई। ये एक चिंता का विषय है इसलिए सरकार को ये योजना शुरू करने की आवश्यकता महसूस हुई।

UNICEF ने भारत को बाल लिंग अनुपात में 195 देशों में से 41 वाँ स्थान दिया है। यानि की हम लिंग अनुपात में 40 देशों से पीछे हैं|

इसके बाद में 2001 की राष्ट्रिय जनगणना के बाद इसे समाज की एक बढ़ती हुई समस्या के रूप में घोषित किया गया था। महिलाओं की आबादी में 2011 तक कमी जारी रही थी। इसके पश्चात् कन्या शिशु के अनुपात को नियंत्रित करने के लिए सरकार द्वारा इस प्रथा पर सख्ती से प्रतिबंध लगाया गया था।

जब तक समाज के लोग नहीं जागेंगे और इस अपराध के विरुद्ध आवाज नहीं उठाएंगे तब तक न जाने कितनी ही मासूमों का गर्भ में ही गला घोंटा जाता रहेगा और अगर गलती से वे इस दुनिया में आ भी गई तो उनकी नन्ही आंखों को खुलने से पहले ही बंद कर दिया जाएगा।

इस योजना से लड़कों और लड़कियों के प्रति भेदभाव खत्म होगा और कन्या भ्रूण हत्या का अन्त करने में ये मुख्य कड़ी साबित होगी। इस अभियान को सफल बनाने के लिए कई प्रकार की गतिविधियों जैसे दीवार लेखन, टीवी विज्ञापनों, रैलियां, होर्डिंग, वीडियो फिल्मों, एनिमेशन, वाद-विवाद, निबंध लेखन इत्यादि का आयोजन करके सभी लोगों में प्रचार किया गया।इस अभियान का बहुत सी सरकारी और प्राइवेट कंपनियों द्वारा समर्थन किया गया।

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के उद्देश्य

इस अभियान के मुख्य उद्देश्य बालिकाओं की सुरक्षा करना और कन्या भ्रूण हत्या को रोकना है। इसके अलावा बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देना और उनके भविष्य को संवारना भी इसका उद्देश्य है। सरकार ने लिंग अनुपात में समानता लाने के लिए ये योजना शुरू की।

ताकि बालिकाएं दुनिया में सर उठकर जी पाएं और उनका जीवन स्तर भी ऊंचा उठे। इसका उद्देश्य बेटियों के अस्तित्व को बचाना एवं उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित करना भी है। शिक्षा के साथ-साथ बालिकाओं को अन्य क्षेत्रों में भी आगे बढ़ाना एवं उनकी इसमें भागीदारी को सुनिश्चित करना भी इसका मुख्य लक्ष्य है|

इस अभियान के द्वारा समाज में महिलाओं के साथ हो रहे अन्याय और अत्याचार के विरूद्ध एक पहल हुई है। इससे बालक और बालिकाओं के बीच समानता का व्यवहार होगा। बेटियों को उनकी शिक्षा के लिए और साथ ही उनके विवाह के लिए भी सहायता उपलब्ध करवाई जाएगी, जिससे उनके विवाह में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी।

इस योजना से बालिकाओं को उनके अधिकार प्राप्त होंगे जिनकी वे हकदार हैं साथ ही महिला सशक्तिकरण के लिए भी यह अभियान एक मजबूत कड़ी है।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के कार्य

हर थोड़े दिनों बाद हमें कन्या भ्रूण हत्या, दहेज प्रथा, महिलाओं पर शारीरिक और मानसिक अत्याचार जैसे अपराधों की खबर देखने और सुनने को मिलती है। जिसके लिए भारत देश की सरकार इन बालिकाओं को बचाने और उनके अच्छे भविष्य के लिए हर संभव कोशिश कर रही है और अलग अलग योजनाएं चला रही है|

बालिकाओं की देखभाल और परवरिश अच्छी हो इसके लिए कई तरह के नए नियम कानून भी लागू किये जा रहे हैं। इसके साथ ही पुराने नियम कानूनों को बदला भी जा रहा है|

इस योजना के तहत मुख्य रूप से लड़के एवं लड़कियों के लिंग अनुपात में ध्यान केन्द्रित किया गया है, ताकि महिलाओं के साथ हो रहे भेदभाव और सेक्स डेटरमिनेशन टेस्ट को रोका जा सके।

इस अभियान का संचालन तीन स्तर पर हो रहा है, राष्ट्रीय स्तर पर, राजकीय स्तर पर और जिला स्तर पर। इस योजना में माता पिता एक निश्चित धनराशि अपनी बेटी के बैंक खाते में जमा करवाते हैं और सरकार उस राशि पर लाभ प्रदान करती है ताकि वह धनराशि बालिका की उच्च शिक्षा में और विवाह में काम आए।

जिससे बेटियों को बोझ ना समझा जाए। सरकार इस अभियान के द्वारा बालिकाओं की सुरक्षा और उनके उज्जवल भविष्य की कामना करती है।

उपसंहार

इस अभियान के शुरुआती दौर में सभी ने इसका स्वागत और समर्थन किया लेकिन फिर भी ये इतना सफल नहीं हो पाया जितना सोचा गया था। बालिकाओं की स्थिति में सुधार लाने के लिए लोगों को जागरूक होना होगा और सभी को एकजुट होकर इस समस्या का समाधान करना होगा।

एक बच्ची दुनिया में आकर सबसे पहले बेटी बनती है। वे अपने माता पिता के लिए विपत्ति के समय में ढाल बनकर खड़ी रहती है। बालिका बन कर भाई की मदद करती है। बाद में धर्मपत्नी बनकर अपने पति और ससुराल वालों का हर अच्छी बुरी परिस्थिति में साथ निभाती है।

वह त्यागमूर्ति मां के रूप में अपने बच्चों पर सब कुछ कुर्बान कर जाती है और अपने बच्चों में अच्छे संस्कारों के बीज बोती है, जिससे वे आगे चलकर अच्छे इंसान बनें। सभी को बेटी और बेटों के साथ एक समान व्यवहार करना चाहिए।

उन्हें समान रूप से शिक्षा और जीवन स्तर देना चाहिए, समान अधिकार और प्यार – दुलार देना चाहिए, क्योंकि किसी भी देश के विकास के लिए बेटियां समान रूप से जिम्मेदार है।

“बेटी है कोई बोझ नहीं है, इस बात को अब समझो यारों,

बेटों से बढ़कर हैं होतीं, इन्हें कोख में न मारो,

बिन पत्नी , बेटी , माँ, बहन के, कभी न किसी का गुजारा हो”


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तो यह था बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर निबंध, आशा करता हूं कि  बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ विषय पर हिंदी में लिखा निबंध (Hindi Essay On Beti Bachao Beti Padhao) आपको पसंद आया होगा। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा है, तो इस लेख को सभी के साथ शेयर करे।

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