वसंत ऋतु पर निबंध (Spring Season Essay In Hindi)

आज के इस लेख में हम वसंत ऋतु पर निबंध (Essay On Basant Ritu In Hindi) लिखेंगे। वसंत ऋतु पर लिखा यह निबंध बच्चो (kids) और class 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए लिखा गया है।

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वसंत ऋतु पर निबंध (Basant Ritu Essay In Hindi)


प्रस्तावना

बसंत ऋतु में कण कण में नवजीवन का संचार हो जाता है। व्रक्ष की शाखाओं पर पक्षियो का कर्णप्रिय कलख सुनाई पड़ता है। पवन सुगन्धित से पागल हो कर छेड़छाड़ करने लगता है।वसंत की हवा एक मदमस्त हाथी के समान चलकर आती हुई शोभायमान होती है।

भवरों की गुजार पवन रूपी हाथी के गले मे बंधी, बजती हुई घण्टियों के समान लगती है। चारो ओर खिले हुए पुष्पों से हाथी के मद-जल के समान पुष्प रस टपकता है। बिहारी लिखते है।

रनिज भ्रन घण्टावली, झरित वान मधु नीरू।
मन्द-मन्द आवतु चलायो, कुंजरू कुंज समीर।।

बसंत के बाद पुनः वही ऋतु चक्र प्रारम्भ हो जाता है।

प्रकृति का रूप चित हर्षक

प्रकृति का तो प्रत्येक रूप चित हर्षक है और प्रकृति नर्तकी हर पल नई-नई अदाएं दिखाती है। प्रकृति के जिस रूप दृष्टिपात करो, वही ह्रदय को अपने मोह पाश में बांध लेता है। प्रकृति सजीवता, मोहकता, कौतूहलता के लिए मानव के निकट आती है और उनमें एक पुलक भर देती है।

तब मनुष्य प्रकृति के झर-झर बहती नदियों, गगन चुम्बी पहाड़ो, पाताल सदृश्य खाईयो, छाया देते व्रक्ष, जगमगाते जुगनुओं, अपना सर्वस्व लुटाते पुष्पो, मुस्कराती कलियों के विस्तृत क्षेत्र को त्यागकर स्वयं को मानव सौंदर्य की सकुंचित सिमा में कैद नही करना चाहता। इसलिए तो पन्त ने कहा है की..

“छोड़ द्रमो की भृदु छाया, तोड़ प्रकृति से भी भाया,
बाले तेरे बाल जाल में कैसे उलझा दु लोचना।”

अतः स्पष्ट है कि मानव-सौंदर्य की अपेक्षा प्रकृति सौंदर्य अधिक मनोहारी है।

वसंत को ऋतु का राजा कहते है

वसंत के मौसम को ऋतुराज इसलिए कहते है, क्योंकि यह सभी ऋतुओ का राजा है। इस ऋतु में प्रकृति पूरे यौवन होती है। इस ऋतु के आने पर सर्दी कम हो जाती है। मौसम सुहावना हो जाता है। इस समय पंचतत्व अपना प्रकोप छोड़कर सुहावने रूप में प्रकट होते है।

पंचतत्व-जल, वायु, धरती, आकाश और अग्नि सभी अपना मोहक रूप दिखाते है। पेड़ो में नए पत्ते आने लगते है, आप बोरो से लड़ जाते है और खेत सरसो के फूलों से भरे पिले दिखाई देते है। सरसों के पीले फूल ऋतुराज के आगमन की घोषणा करते है।

खेतों में फूली हुई सरसो, पवन के झोकों से हिलती ऐसी दिखाई देती है, मानो सामने सोने का सागर लहरा रहा हो। कोयल पंचम स्वर में गाती है और सभी को कुहू-कुहू की आवाज से मंत्रमुग्ध करती है। इस ऋतु में उसकी छठा देखते ही बनती है। इस ऋतु में कई प्रमुख त्यौहार मनाये जाते है, जैसे वसंत पंचमी, महाशिवरात्रि, होली आदी।

वसंत ऋतु को ऋतुराज कहा जाता है, क्योंकि इसका प्रभाव और महत्व सभी ऋतुओ से बढ़कर होता है। वसंत ऋतु का महत्व और प्रभाव कितना बड़ा होता है, इस पर विचार करते है तो हम यह देखते है कि यह सचमुच में ऋतुओ का शिरोमणि है।

वसंत ऋतु का आगमन

सर्वप्रथम वसंत का आगमन होता है। पौराणिक वसंत कामदेव का पुत्र बतलाया जाता है। रूप – सौंदर्य के कामदेव के घर में पुत्रउत्पत्ति का समाचार पाते ही प्रकृति नृत्यरत हो जाती है।उसकी देह प्रफुलता से रोमांचित हो उठती है।

भांति-भांति के पुष्प उसके आभूषणों का कार्य करते हैं। हरियाली उसके वस्त्र तथा कोयल की मधुर पंचम स्वर्ग वाली कुक उसका स्वर्ग बन जाती है। रुपयोवन संपन्न प्रकृति इठलाते ओर मदमाते हुए पुत्र बसंत का सजधज के स्वागत करती है।

तुम आओ तुम्हारे लिए वसुधा में हृदय पर मंच बना दिए हैं।
पथ में हरियाली के सुंदर-सुंदर पाँवड़े भी बिछवा दिए हैं।
चारों ओर पराग भरे सुमनों के नए विरवा लगवा दिए हैं। ऋतुराज! तुम्हारे ही स्वागत में सरसों के दिए जलवा दिए हैं।

सुंदर – सुखद, आकर्षक, सर्वाधिक रोचक ऋतु बसंत ऋतु है। इसका समय 22 फरवरी से 22 अप्रैल तक होता है। भारतीय गणना के अनुसार इसका समय फाल्गुन से वैशाख माह तक होता है।

सचमुच इस ऋतु का सौंदर्य सर्वाधिक होता है। इस ऋतु में प्रकृति के सभी अंग मस्ती में हंसने लगते हैं। सारा वातावरण मस्ती से झूम उठता है। वन में, उपवन में, बाग में, कुंज में, गली – गली में, गांव -घर और सब जगह बसंत ऋतु की छटा देखते ही बनती है। प्रकृति का नया रूप हर प्रकार से आकर्षक, सुहावना और मस्ती से भरा हुआ दिखाई देता है।

किसानों के लिए वसंत ऋतु का महत्व

किसानों के लिए बसंत ऋतु सुख का संदेश लाता है। अपने खेतों में लहलहाती फसलों को देखकर किसान खुशी में झूम उठते हैं।धरती के पुत्रों के लिए धरती माता सोना उगलती है।किसान आने वाले कल के सुंदर सुहावने सपने ले रहा होता है। धरती ही किसान की संपत्ति है।

अपने परिश्रम का फल वह अपनी आंखों के सामने देखकर फूला नहीं समाता। उसका मन मयूर की तरह नाच उठता है। खेतों में सरसों ऐसी प्रतीत होती है, मानो धरती ने पीली ओढ़नी ओढ़ रखी हो। धरती इस प्रकार नई नवेली दुल्हन सी दिखाई देती है।

वसंत ऋतु के प्रमुख त्यौहार

बसंत ऋतु को ऋतुपति कहते हैं। इस ऋतु के अंतर्गत ही संवत ओर सौर वर्ष का नया चक्र प्रारंभ होता है। इस ऋतु के अंतर्गत पड़ने वाले दो प्रमुख त्योहार होली और रामनवमी का अत्यधिक महत्व और सम्मान है। ये दोनों ही त्यौहार लोकप्रिय है और इनको मनाकर मन प्रसन्न हो उठता है।

कवियों की दृष्टि से यह ऋतु बहुत ही प्रेरणादायक, उत्साहवर्धक और रोचक ऋतु है। इसकी प्रशंसा में अनेकानेक रचनाएं रची गई है। सचमुच इस ऋतु के आनंद को भला हम कैसे भूल सकते हैं। मनुष्य ही नहीं, देवता भी इस ऋतु का आनंद प्राप्त करने के लिए तरसते रहते हैं।

नवरात्रि का व्रत, उपवास और अनेक प्रकार की देव आराधना इस ऋतु के अंतर्गत होती हैं। उनमे देव शक्तियां प्रभावित होती है। वे अपनी प्रसन्नता के सौभाग्य पूर्ण इस ऋतु की सभा को निखारने में मनुष्य को अपना योगदान देते हैं। वास्तव में वसंत को ऋतुराज, ऋतुपति आदि नाम देना सार्थक ही है।

बसंत ऋतु का त्यौहार केवल मौसमी पर्व ही नहीं, इसका धार्मिक महत्व भी माना जाता है। लोग इस दिन को शुभ मानते हैं और कई समारोह इसी दिन निश्चित किए जाते हैं। बसंत आता है और साथ लाता है रंग भरी होली, जिसमें बच्चों, नवयुवक, नवयुवतिया और यहां तक की बुजुर्गों को भी रंग खेलने का मन ललक उठता है।

बसंत ऋतु की शोभा इसके द्वारा दुगुनी हो जाती है। स्वास्थ्य सुधारने के लिए यह ऋतु विशेष महत्व रखता है। देह में फुर्ती सी आ जाती है, ना तो सर्दी की कंप-कँपी और ना गर्मी की लूं। ऐसे सुंदर दिन और शीतल रात्रि का मौह सबको बसंत की प्रशंसा करने पर बाध्य कर देता है।

वसंत ऋतु की सुंदरता देखते ही बनती है। हर जगह हरियाली और सुन्दर फूलो की भरमार होती है। इस मौसम में लोग घूमने फिरने का आनंद भी बहुत लेते है। जब धरती पर प्राकृतिक तौर पर सुंदरता छाई हो तो कोन नही चाहेंगा की इस सुंदरता को नजदीकी से देखा जाए।

इसलिए लोग जगह- जगह घूमते फिरते दिख जाते है। सरसो की पीली-पीली चुनरी मानो कोई नई नवेली दुल्हन हो। वाकई धरती की सुंदरता हम सभी का मन मोह लेती है।

वसंत पंचमी

वसंत पंचमी को ऋतुराज के आगमन में उत्सव के रूप में मनाया जाता है। वसंत पंचमी के दिन लोग खेलते है, झूला झूलते है और अपनी प्रसन्नता को व्यक्त करते है। हर घर मे वसंती हलवा, केसरिया खीर बनती है। इस दिन लोग पिले रंग के वस्त्र पहनते है और बच्चे पिले रंग की पतंग उड़ाते है।

फाल्गुन की पंचमी को वसंत पंचमी का मेला लगता है। इस दिन लोग सुबह से लेकर शाम तक पतंगे उड़ाते रहते है। होली को भी बंसत ऋतु का ही त्यौहार माना जाता है। उस दिन सारा वातावरण रंगीन हो जाता है और सभी आनंद से मगन होते है।

इस दिन पिले वस्त्र धारण करके माँ सरस्वती की आराधना मन्दिरो ओर घरो में की जाती है और उनसे आशीर्वाद मांगते है की है-विद्या की देवी हमे विद्या प्रदान करे। साथ ही इस दिन अपने कलम पुस्तक सभी की पूजा की जाती है।

आखिरकार विद्या की देवी ही तो है जो हमे ज्ञानवान बनाती है। वसंत पंचमी के इस त्यौहार को सभी हर्षोउल्लास के साथ मनाते है ओर सरस्वती देवी की आराधना करते है। इस दिन माँ सरस्वती की आरती आदि का पाठ करते है।

उपसंहार

अतः यह कहा जा सकता है कि मनुष्य प्रकृति सौंदर्य से स्वयं को उदासीन नही रख सकता है। यदि मनुष्य प्रकृति सौंदर्य को ह्रदय के आँखों से देखे तो उसे सर्वत्र आनंद ही आनंद बिखरा दिखाई देगा। अन्यथा वह अपने ही घरों में  कैद होकर रह जाएगा।

प्रकृति सौंदर्य हर उस प्राणी के लिए है, जो प्रकृति की गोद में आए। इसलिए महादेवी वर्मा का यह कथन अक्षरसः सत्य है की तारों से भरी चांदनी रात रोगी को नर्स से अधिक सुख दे सकती है, यदि वह उसकी भाषा समझने में समर्थ हो।

ऋतुराज वसंत सृष्टि में नवीनता का प्रतिनिधि बनकर आता है। यह बड़ा आनंददायक ऋतु है। इस ऋतु में ना अधिक गर्मी होती है ओर ना अधिक ठंडक। यह देवदूत वसंत जन-जन की नवनिर्माण और हास-विलास के माध्यम से धर्म,अर्थ, काम और मोक्ष के पथ पर अग्रसर होते रहने की प्रेरणा प्रदान करता है।

कभी अपने पथ पर चल कर कोई गलत कार्य ना करे और वसंत ऋतु के मौसम का दिल से स्वागत करे और इसका आनंद ले।


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तो यह था वसंत ऋतु पर निबंध, आशा करता हूं कि वसंत ऋतु पर हिंदी में लिखा निबंध (Hindi Essay On Basant Ritu) आपको पसंद आया होगा। अगर आपको यह लेख अच्छा लगा है, तो इस लेख को सभी के साथ शेयर करे।

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